Thursday, 20 November 2014

संत समाज और भारतीय आतंकवाद



हाल ही में रामपाल की गिरफ्तारी जिस तरह से हुई उससे ये बात साफ़ हो गई के रामपाल कोई साधारण व्यक्तिव का बंदा नहीं हे अपितु वह एक ऐसा व्यक्ति हे अकेले जिसको गिरफ्तारभर करने के लिए भारत जैसे विशाल देश को आर्मी की सहायता लेनी पड़ी.    यहाँ ये बात भी साफ़ करता चलू की भारत में दो तरह के संत समाज हे एक ओह जो मानवता और प्रेम में विश्वास रखते हे दूसरा ओह जो हिँसा मानव हत्या और आतंकवाद के हामी हेरामपाल शायद उसी हिंसा वादी संत समाज और मानव हत्या की अगली कड़ी हो सकता हे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, असीमानंद, दयानंद पण्डे जो के आतंकवादी गतिविद्यो में पाये गए और अभी जेल में हेभारत सरकार की आतंकवाद के ऊपर मेहरबानी हुई और असीमानंद जेल से छूट गया.  


जिस तरह से रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस असमर्थ दिखी और रामपाल के आतंकवादियों ने पुलिस के ऊपर बम, पिस्तौल, तलवारो और कई घातक हतियारो से धावा बोल दिया उससे साफ़ हे रामपाल और उसका आश्रम देशद्रोही गतिविधयों में लिप्त  हे.   हाल ही में वगा बॉर्डर पे जो आतकवादी हमला हुआ उसमे भी रामपाल और उसके आतंकवादीओ का हाथ हो सकता  हे.   यह तो भारत सरकार की विवशता हे की ओह खबरों को दबा कर असली खबर बहार नहीं आने दे रही हे और गिरफ्तारी की वजह महज़ एक कोर्ट  के सुमनस को अटेंड नहीं करना बता रही हेजबकि असली बात  कुछ और ही  हे

बाबा के आश्रम से बरामद हतियार

इससे पहले भी संतो को गिरफ्तार किया गया लेकिन कभी भी आर्मी की ज़रुरत नहीं पड़ी और संतो के भक्तो ने कभी भी पुलिस के ऊपर हल्ला नहीं बोला ओह भी बमो से और पिस्तौल से.  रामपाल का आश्रम एक पुलिस छावनी में तब्दील हो चूका हेऔर अंतमे बुधवार रात रामपाल को उसके आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी के साथ ही दो हफ्ते से पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच चल रहा तनावपूर्ण गतिरोध खत्म हो गया। रामपाल के आश्रम से कम से कम १५,००० समर्थकों जिनको रामपाल ने बंदी बना कर  रखा था पुलिस ने उनको भी बाहर निकालने में कामयाबी हासिल कि.  इस सारी कारवाही में ४९२ आतंकवादी भी गिरफ्तार हुए  


में थोड़ा सा पीछे की तरफ जाना चाऊंगा सन २००२ के दंगो के बाद बड़ौदा में एक ७०० साल पुराने सूफी के मज़ार को तोड़ने का  मोदी सरकार ने आदेश दिया.  जिसके विरोध में ज़यादा नहीं ५०० वे ७०० मुसलमान इकट्टा हुए, फ़ौरन पुलिस ने जवाबी कारवाही की और आनन फानन में गोकि चला डाली जिसमे से १२ मुसलमान बच्चे शहीद हो गये.  और पुलिस ने सिर्फ आधे दिन में ही उस मज़ार को शहीद कर के मोदी के आदेश का पालन किया, और कोई पुलिस ज़ख़्मी नहीं हुआ.  और रामपाल को गिरफ्तार करते वक़्त २०० अफ़राद ज़ख़्मी हुए. जिसमे ७० पत्रकार, १०५ पुलिस और बाक़ी नार्मल पब्लिक, फिर भी रामपाल जैसे देश द्रोही और आतंकवाद के हामी को पकड़ने में दो हफ्ते का वक़्त कियो।  में मोदी सरकार से जवाब का तलबगार हू


ज़ुबेर एहमद खान

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