अज़ीज़ नाज़रीन
भारत में इन्तेख़ाबी जंग का आगाज़ होने से कुछ ११-१२ रोज़ क़ब्ल मेने अक़वाम ए मुत्तहिदा और आलमी बरादरी अमेरिका इंग्लैंड को मुखातिब कर कई मज़मून अंग्रेज़ी में शाया किये थे की जब तक भारत पर दहशतगर्दों की हुकूमत है और हिटलर के मानिंद एक निहायत ही ज़ालिम तरीन दरिंदा हाकिम है तब तक आज़ादाना और मुंसिफ़ाना बिला ख़ौफ़ इन्तेख़ाब और राये शुमारी के मरहले को मुकम्मल करना मुमकिन नहीं है।
मेने अक़वाम ए मुताहिदा और आलमी बरादरी से दरख़्वास्त की थी भारत में अक़वाम ए मुताहिदा के ज़ेरे क़ियादत इन्तेख़ाबी मरहले को पूरा होने दीजिये। भारत की फ़ौज, पुलिस, इन्तेज़ामियाँ और इलेक्शन कमीशन ज़ाफ़रानी ग़ुलामी का पट्टा गले में बाँध कर ज़ाफ़रानी तंज़ीम और दहशतगर्दों के लिए ज़मीन हमवार कर रहा है। हमें भारत के किसी भी जमहूरी इदारे पर यक़ीन नहीं है, की ऐसे हालात में भारत में मुंसिफ़ाना आज़ाद बिला ख़ौफ़ इन्तेख़ाब होना मुमकिन होगा।
जिन हल्क़ों में दहशतगर्दों का क़ब्ज़ा है वहां पर बेलोट पर बुलेट के ज़ारिये मुत्तासिर करने की हिकमत नज़र आ रही है। भारत के सूबे शुमाल के संभल में पुलिस और दिगर इन्तेख़ाबी अफसरों ने जिस अंदाज़ में बरहना नाच किया है उससे जमहूरी निज़ाम और इंतख़ाब का मज़ाक़ बना कर रख दिया है। जब ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को अपनी शाकिस्त साफ़ ज़ाहिर होने लगी तो मुस्लिम वोटर्स को दौड़ा दौड़ा लाठीये भांची और उनको वोट ही नहीं करने दिया। मुस्लिम मस्तूरातों की शिकायत है की उनको घर में एक कमरे में ले जा कर क़ैद कर दिया और वोट दिने के लिए निकालने ही नहीं दिया गया।
यही सब दहशत रामपुर बाई इलेक्शन में पुलिस और फ़ौज ने मुस्लिम वोटर्स के साथ की थी। वोह वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वाइरल हुआ था उस ही दहशत के चलते आज़म खान शाकिस्त खा गए थे और हिन्दू दहशतगर्द रामपुर पर क़ाबिज़ हुआ था।
इतना ही नहीं जिन हल्क़ों में मुस्लिम अक्सरियत कम है और हिन्दू वोटर्स ज़ाफ़रानी दहशत से नाराज़ हैं वहां पर EVM को जला कर ख़ाक करने की हिकमत की गई है। गुजरात, सूबे शुमाल के बाद हिन्दू दहशत की तीसरी बड़ी ज़मीन मध्य प्रदेश के बैतूल में लोकसभा का इन्तेख़ाब कराकर वापस आ रहे राये दिहंदेगी (मतदान) टीम की बस में आग लग गई. जलती बस से राये दिहंदेगी (मतदान) मुलाज़मीन ने कूदकर जान बचाई. बस में ६राये दिहंदेगी टीम के लगभग ४५ मुलाज़िम सवार थे। इस दानिस्ता की गई ख़ुराफ़ात और साजिशी अमल में इन्तेख़ाबी मुलाज़िम मेहफ़ूज़ रहे जब्की बस धू-धूकर आतिश ए नार हो गई जिसमे ६ पोलिंग की मशीनों में से महज़ दो ही मेहफ़ूज़ रही बाक़ी सब जल कर ख़ाक़ हो गई हैं. इन ४ मशीनों की तमाम मालूमात जल कर राख हो गई।
नाज़रीन अभी तो राये शुमारी पूरी तरह से मुक्कम्मल भी नहीं हुई है और शाकिस्त के ख़ौफ़ से ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों ने ऐसे हालात पैदा करना शुरू कर दिए जिससे उनको फतह नसीब हो सके। जब वोटों की गिनती की जाएगी तब मशीनों को अगवाह करना और मुखलीफिनों के वोटों की गिनती होने ही नहीं देना ऐसे तमाम साजिश और दहशत मचाई जाएगी।
इन्ही सब बातों का भारत के अवाम पर बोहोत सख़्त असर पड़ रहा है और उनका राये शुमारी से एतेबार ही उठ गया है। मेरे एक रिश्तेदार ने इन्तेख़ाब के पहले फेज़ के मुकम्मल होने के बाद फ़ोन पर पूछा था आपकी जानकारी और सहाफ़त क्या कहती है इस बार सेक्युलर महाज़ आएगा या ज़ाफ़रानी दहशत क़ाबिज़ रहेगी। उसके ऊपर मेने यही बोला था अगर इन्तेख़ाब मुंसिफ़ाना हक़ और इन्साफ के साथ हुए तो ज़ाफ़रानी बुरी तरह शाकिस्त खायेगें। लेकिन अगर बेलोट के ऊपर बुलेट क़ाबिज़ रही और साजिश, फ़रेब किया तो ज़ाफ़रानी जीत के लिए कुछ भी कर सकतें हैं।
यही हाल रहा तो ज़ाफ़रानी दहशत के चलते जो कभी नहीं हुआ वोह अब हो जाएगा भारत में तानाशाही या हूकूमशाही नाफ़िज़ हो जाएगी। जिसके लिए कभी पाकिस्तान मशहूर था और पकिस्तानिओं को भारत के नुमाइंदे हर आलमी फ़ोरम पर ज़लील करते थे अब भारत के नुमाइंदे पाकिस्तान और बंगलदेश से उस ही मुद्दे पर ज़लील होंगे।
सहाफ़ी ज़ुबेर