Wednesday, 3 April 2024

चीन महान ने ३० जगहों के बाद अरुणाचल का नाम किया "जंगनान"

अज़ीज़ नाज़रीन, 

ज़ाफ़रानी दहशत को अरुणाचल पर उसके झूठे दावे को करारा तमाचा पड़ा जब चीन महान ने माता के दावे को बोगस बताते हुए चीन के दावे को पुख़्ता कर पूरे सूबे का ही नाम तब्दील कर दिया।  अब से अरुणाचल "जंगनान" के नाम से जाना जाएगा।  मोतबर ज़राये से मालूम हुआ है की चीनी हुकूमत की जानिब से इत्तेला (Notification) अक़वाम मुत्तहिदा को मिला कर तमाम आलमी बरादरी को भेजी जा चुकी हैं।   ३० जगहों के नाम तब्दील करने के बाद चीन का माता के ऊपर ज़बरदस्त हमला है। 

नाज़रीन अब से किसी भी अवाम लंगूर लँगूरनियों या भारत की हुकूमत ने चीन के उस ख़ित्ते को "जंगनान" से नहीं मुख़ातिब किया तो उसके ऊपर अक़वाम मुत्तहिदा के क़रारदार की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने के जुर्म में सख़्त हिकमत होगी।  

ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को मुस्लिम नाम तब्दील करने की बोहोत फ़िक्र रहती थी अब से उनको भी चीन महान ने तब्दील किये हुए नामों से मुख़ातिब करना होगा।  इनके अब्बा जान, चचा जान ने अंग्रेज़ों की ग़ुलामी कर भारत को तोड़ दिया नालायक़ आवारा अय्याश औलादों ने नार्थ ईस्ट और कश्मीर को भारत से तोड़ दिया।  अब खेलते रहो ३७०- ३७० या सिनिमा में मसनूई कारगरदेगी कर के खुशी हासिल करते रहो जो हक़ीक़त से काफ़ी दूर है। 

जैसी भारत के दहशत आज़म की फ़ितरत है पराये अवाम के बाथरूम में झांका ताकी करने की और उसके दहशतगर्दों की फ़ितरत है अवाम के किचन खाने की प्लेट में झाँकने की क्या पकाया जा रहा है क्या खाया जा रहा है।  उस ही ग़लीज़ और नापाक हिकमत को आगे करते हुए भारत की फ़ितरत भी दूसरों की ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने की होती जा रही थी।  पहले मुसलमानों के बंगलों, ज़मीनों, घरों को तोड़ कर उन पर हुकूमत ने क़ब्ज़ा किया फिर मस्जिदों, मदरसों, ख़ानक़ाहों, मज़ारों, क़ब्रस्तानों को तोड़ कर उन पर हुकूमत ने क़ब्ज़ा किया।  फिर पड़ोसियों की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करने की ग़लीज़ नियत थी।  जिसको पाकिस्तान, नेपाल और अब चीन ने ज़बरदस्त झटका दिया है।

माता की क़ब्ज़ा करने और तोहसीह की इस ही ग़लीज़ हिकमत से तमाम पडोसी परेशान हैं। नेपाल के कालापानी, लिम्पियाधुरा, लिपुलेख पर माता अपना दावा ठोंकती हैं।  वोह मेरा है, में उसकी।  पाकिस्तान के कश्मीर पर अपना दावा ठोंकती हैं।  भारत पूरे कश्मीर मुल्क पर तोहसीह कर के हड़पना चाहता है।  अपने ज़ालिम, दरिंदा सिफ़त, फ़िर्क़ा परस्त फ़ौज को तैनात कर रखा है।  कश्मीर में जो ज़ुल्म किया है नौजवान नस्लों को गोलियां मारना, उनके ऊपर तशद्दुत करना, ख़ातूनों के साथ ज़िना करना, भारतीय फ़ौज के कर्नल, मेजर ज़बरदस्ती कश्मीरी मुस्लिम बच्चिओं को उठा ले जाते और उनको अपनी हवस का शिकार बनाते।  अगर किसी अहले खाना ने आवाज़ बुलंद करने की जुर्रत की तो होती थी उस घर की तबाही।  पूरा पूरा खानदान दहशतगर्दी के नाम पर तबाह कर दिया जाता था।  यह ज़ुल्म तारीख़ का हिस्सा बन चुके हैं।   

जब कश्मीर पर फ़ौज भेज कर हड़प करने की नाकाम कोशिश की थी तब सूबे हरयाणा का वज़ीर आला ७० साल का बूढ़ा बोलता है अब हमें कश्मीर की गोरी चमड़ी का सूख भोगने को मिलेगा।  इतनी गन्दी ज़ेहनियत उस पर हेमंत उससे ज़्यादा आगे बढ़ कर बोलता है। हिंदुस्तान से संघी दरिंदे अपनी जवानी निकालने और ज़िना करने की नियत ले कर कश्मीर में भरे गए।  आसिफा जैसी ना जाने कितनी अपनी अस्मत लूटवा चुकी होंगीं।   

चीन के इलाक़ों पर भी माता की ऐसी ही गंदी और ग़लीज़ नियत थी।   लेकिन चीन ने इतने झटके दिये की माता जी पूरी लाल हो गई।  

।। लाल सलाम ।।

सूबे शुमाल में साधू के ख़ाकी दहशतगर्दों (पुलिस) ने फ़रेबी बोगस शिकायत पर पिछले साल तक मुस्लिम अवाम के किचन में जा कर पकाई गई तरकारी तक खोल कर देखी कहीं गाये का गोश्त तो नहीं पकाया है।  यहाँ तक की अगर पकाई गई तरकारी बकरे के गोश्त की थी तब भी घर के सरबराह और उसके फ़रज़न्दों को गिरफ्तार किया गया था।  किचन की हांडी खोल कर देखते हुए ख़ाकी दहशतगर्दों के वीडियो खूब वाइरल हुए थे।  लेकिन इस बेशर्म नालायक़ हुकूमत के एहसास को ज़र्रा भर ईज़ा नहीं पहुंची इतनी बेहिस सरकार को जब उससे ज़्यादा क़ुव्वत वाले मुल्क के फटके पड़ रहें हैं तो मिस्कीन बन रहा है।

यह वही ग़लीज़ और गन्दी ज़ेहनियत है जो भारतीय फ़ौज और पुलिस वालों ने नक्सल मुत्तासिर इलाक़े में १ नहीं २ नहीं बल्कि ५० से ज़्यादा आदिवासी ख़ातूनों के साथ गिरोह गर्दाना ज़िना बिल जब्र किया।  जब उन्होंने शिकायत दर्ज की तो उनकी छाती खोल कर निप्पल निचोड़ कर तस्दीक की गई की ज़िना हुआ है या नहीं।  अगर उसके अंदर से पानी ख़ारिज हुआ मतलब उनके साथ ज़िना हुआ है।  " बेशर्म "  

जब ज़ेहनों में इतनी गंदगी भरी है तो बड़ी बड़ी बातें मत करो "महिला सशक्तीकरण" बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।  तुम हम को क्या रिवायत बताओगे और ख़ातूनों की इज़्ज़त करना सिखाओगे जिनके यहाँ वालेदा जैसी भाभी मेहफ़ूज़ नहीं है।  हलाला पर बात करने वाले लंगूरों ज़रा "नियोग" पर भी कुछ बोल दो।   

जितनी भी लँगूरनियाँ हैं अंजना से ले कर मांजना तक ट्रिप्पल तलाक़ पर मुस्लिम ख़ातूनों की हमदर्द बन कर बाल्टी भर भर के आंसू बहा रही थी मुस्लिम ख़ातूनों की अस्मत और उनके हक़ की बात कर रही थी।  अपने गिरेबान में झांक कर देखें और डंके के चोट पर कहें की हिन्दू "नियोग" सक़ाफ़त के चलते उनको कभी भी अपने ख़ुद के क़रीबी रिश्तेदारों से ख़ौफ़ नहीं लगा।  या उनको कभी डर नहीं लगा की उनका शोहर ही किसी पराये मर्द के साथ हमबिस्तरी करवाने की इजाज़त नहीं दे दे।  और हम मज़हब का काली करतूत हरामकारी को भी जाइज़ बोलने पर मजबूर रहें। पैदा होने वाले हरामी को समाज में जाइज़ औलाद बोलते रहें।  

जितना ज़ुल्म, शिद्दत, जब्र, नाइंसाफी भारत के मुस्लिम अवाम के साथ दरिंदे, जल्लाद, हिटलर हुकूमत ने किया है उस सब का हिसाब ऊपर वाला ले कर रहेगा।  इस ही जहाँ में सब कुछ भोगना होगा।  हर उस इंसान को सही वक़्त पर ज़बरदस्त जवाब मिलेगा। 

ऊपर वाले की लाठी बेआवाज़ है लेकिन जब ज़ालिम, दरिंदे, जल्लाद, नाइंसाफ, फ़िर्क़ापरस्त, क़ातिल पर पढ़ती है तो तबाह और बर्बाद कर देती है। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...