Monday, 28 August 2023

तालिब ए इल्मों की ख़ुदकाशिओं से दहला कोटा, अब तक २४।

अज़ीज़ नाज़रीन,

राजस्थान के कोटा में बरोज़ इतवार को NEET की तैयारी कर रहे मज़ीद दो और तालिब ए इल्मों ने ख़ुदकशी कर ली।  तालिब ए इल्मों में बढ़ते हुए ख़ुदक़शी के रूझान को देखते हुए हुकूमत में हड़कंप मचा हुआ है।  क्या नोजवान तब्क़ा मर्कज़ को कोई पैग़ाम देना चाहता है जसको हुकूमत अनदेखा कर रही है।  कियोंके किसी के पास से कोई ख़ुदक़शी नोट नहीं मिला है।  अब कोटा में आला तालीम लेने आने वाले नौजवानों के मुस्तक़बिल पर सवाल उठने लगे हैं।  क्या इसके लिए मरकज़ की ग़फ़लत भरी और ज़ाफ़रानी तंज़ीम की ज़हरीली हिकमत ए अमली ज़िम्मेदार तो नहीं है।  इस साल यह ख़बरनामा लिखे जाने तक कोटा में ख़ुदकशी कर के अकाल मौत मरने वाले तालिब ए इल्मों की तादाद २४ हो गई है।  

नाज़रीन अभी उत्तर प्रदेश के स्कूल में एक मुस्लिम ७ साल के मासूम पर दुर्गा वाहिनी की उस्ताद और ख़ातून की ज़बरदस्त बर्बरता और दहशत देखने को मिली थी।  जिसने वोह वीडियो और मज़ीद बच्चो में पेवस्त होते उस ज़हर को देखा मुस्तक़बिल का सोच कर सिहर उठा।   क्या अक्सरियत अवाम में बढ़ती हुए ख़ुदकशी की वारदात कही इस ज़ुल्म और बर्बरता के खिलाफ मौजूदा मरकज़ी हुकूमत और ज़ाफ़रानी ज़हर को एक पैग़ाम तो नहीं दे रहें हैं।

जो ज़हर ज़ाफ़रानी तंज़ीम और मियां घुमक्कड़ ने तमाम भारत में फैला दिया उस से ख़फ़ा हो कर कहीं अक्सरियत अवाम और अक्सरियत तुलबा हुकूमत को एक पैग़ाम देना चाहतें होगा।  इतवार कोटा में एक तबाह कून खबर ले कर आया जहाँ बा एक वक़्त दो तालिब ए इल्मों एक ही दिन ख़ुदकशी कर ली।  दोनों के पास से कोई ख़ुदकशी नोट नहीं मिला है। 

पुलिस के मुताबिक, आविष्कार शंबाजी कासले (१७) ने जवाहर नगर में अपने कोचिंग सेंटर की बिल्डिंग की छठी मंजिल से दोपहर करीब ३.१५  बजे छलांग लगा ली. उसने यह कदम इंस्टीट्यूट का टेस्ट देने के बाद उठाया. साइंस नगर के सीओ धर्मवीर सिंह ने कहा कि इंस्टिट्यूट के मुलाज़िम कासले को अस्पताल लेकर गए, लेकिन रास्ते में ही वोह हलाक हो गया।    

अभी कोटा इंस्टिट्यूट कासले की मौत से उभर भी नहीं पाया था उसकी मौत के महज़ चार घंटे बाद ही आदर्श राज (18) ने फांसी लगाकर ख़ुदक़शी कर ली।  पुलिस ने बताया कि आदर्श मासबिक़ति इम्तेहानात (प्रतियोगी परीक्षाओं) की तैयारी कर रहा था, उसने शाम करीब ७ बजे कुन्हाड़ी पुलिस थाना क्षेत्र में अपने किराए के फ्लैट में फांसी लगा ली.

नाज़रीन जिस अंदाज़ में भारत में हर जानिब मार काट ख़ाना जंगी ज़हर फ़िरक़ापरस्ती नाइंसाफ़ी की हवा चल पड़ी है उससे अक्सरियत अवाम के नौजवान तबक़े के ऊपर उसके बोहोत ही मुज़िर असरात पड़ रहें हैं।   हुकूमत फ़िल वक़्त ग़फ़लत में रहे लेकिन यह बात तिब्बी और नफ़्सियाती महेरीनों से साबित हो चुकी है जो पेशावर मुजरिम नहीं होतें हैं और उनके सामने अगर कोई जुर्म होता है।  किसी अकेली मासूम बच्ची के कपडे फाड़ कर ८-९ मवाली उसकी अस्मत रेज़ी करतें हैं या किसी मासूम को उस हद तक मारा जाता है की वोह जान की भीक मांग कर तड़प तड़प कर मर जाए दंगा फसाद आगज़नी तो ऐसे हादसात जिसके साथ होतें हैं वोह तो मर ही जाता है लेकिन जो आम अवाम है उस हादसे को देख कर नफ़्सियती मरीज़ बन जाता है।  ख़ास कर के जब वोह उस मज़लूम के हक़ में चाहा कर कुछ नहीं कर पाया हो।   कियोंके उसके पास इतनी क़ुव्वत और ताक़त नहीं है।  ऐसे बच्चे और नौजवान ज़्यादातर ऐसे हादसों को भूला नहीं पाते और बोहोत सख्त ज़ेहनी दबाव में रहतें हैं वोह हादसे उसके ज़हन से ना निकल पाने की वजह से वोह ज़ेहनी मरीज़ हो कर अपनी ज़िन्दगी को ख़तम कर देतें हैं। 

ख़ुदकशी के पीछे कुछ ज़ाती वजह भी होती है मुफ़लिसी, मोहब्बत में नाकामी, घरेलू तनाव वग़ैरा।  लेकिन एक बात ज़रूर बताना चाहूंगा की कांग्रेस ने भी हुकूमत की है और जब से इस सहाफ़ी ने होश सम्भाला है मेने कभी इतनी बड़ी तादात में हिदुस्तान में बढ़ती हुए ख़ुदकशी नहीं देखी।  ज़ाफ़रानी तंज़ीम इक़्तेदार के नशे में चूर है हर जानिब उसको सत्ता ही दिख रही है लेकिन इस नशे में वोह अपने कितने बर्बाद कर बैठी है जब इसका इल्म होगा तो कोई पूरसान ए हाल ना होगा। 

कल ही सूबे शुमाल में एक ४० साल का नौजवान भारत की गटर - २ देखने गया और गटर देखने के बाद इतना दबाव महसूस हुआ की हार्ट अटैक से थिएटर के दरवाज़े पर ही गिर पड़ा और मारा गया।  कहाँ एक सिनिमा तफरीह के लिए बनाई थी कहाँ इंसान का हार्ट अटक की वजह बनी। 

अभी जाएफरानी तंज़ीम हिन्दू दहशत को उस ज़हर का पता नहीं पड़ रहा है जो इन्होने बोया है लेकिन जब उसको खा कर इनके अपने ही मारे जाने लगेगें तब इनके पास सिवाए रोने के कुछ नहीं बचेगा। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...