अज़ीज़ नाज़रीन,
गुजिस्ता साल भाई मूसावाला की शहादत की खबर जब मन्ज़रे आम पार आई तब पहली ख़बर पर तास्सुरात थे की अगर यह शख्स संघी और बीजेपी फितरत का था और पंजाब में क़त्ले आम करने की नियत से मरकज़ का नुमाइंदा था तो इज़हारे ख़ुशी है अगरचे यह एक सिख था तो तशवीश है। लेकिन जैसे जैसे तफ्तीश आगे बढ़ी तो इल्म हुआ की उनको शहीद ही मर्कज़ के दहशतगर्द दाख़ला एक तड़ी पार मुजरिम बाहुबली अमित शाह के इशारे पर बोहोत ही ख़ुफ़िया तरीक़ेकार हिकमते अमली इख़्तेयार कर के किया गया है।
इस बात को ख़बरनामों की दूसरी ख़बर पर मेने मन्ज़रे आम कर दिया था की भाई मूसवाला की शहादत में मर्कज़ का वज़ीरे दाख़ला मुलव्विस है और उनकी शहादत दरअसल मरकज़ का बदला है जो उनसे लिया गया है।
मज़ीद यह भी बताया गया था की भाई मूसावाला की शहादत के ग़ुबार और ग़ुस्से को भले ही मरकज़ फील वक़्त दबा दे लेकिन इसके दूरंदेश नताईज भयानक होंगे। पंजाब में १९८४ में इंदिरा गांधी की मौत के बाद जो ख़ालिस्तान तहरीक का आगाज़ हुआ था वही हालात फिर से देख रहा हूँ। मज़ीद मरकज़ को तम्बीह की थी के ऑपरेशन ब्लू स्टार के जैसे कोई भी हिमाक़त करने की अगर मरकज़ सोच रही है तो ग़फ़लत में ना रहे अगर ऐसी कोई भी हिकमत की तो पंजाब अलहदा हो जाएगा।
फिर हुआ वही जिसका खादशा था मरकज़ के इशारों पर "वारिस पंजाब दे" और अज़ीम सिख रहनुमा संत भाई अमृतपाल सिंह के क़रीबी भाई लवप्रीत तूफ़ान को गिरफ्तार कर के हुकूमत ने फिर से शहीद सिख रहबर पेशवा भिंड़रवाल जी को ज़िंदा कर दिया है।
नाज़रीन
अभी ३ रोज़ क़ब्ल एक मज़मून में लिखा था की भारत की दहशतगर्द तंज़ीमें और हुकूमत सिर्फ
मुस्लिम और क्रिस्टी अवाम को ही परेशान कर रही हैं और उन्ही मुमालिकों पर दहशतगर्द
हमले कर रहीं हैं कियोंके अगरचे सबसे बड़ा हिन्दू राष्ट्र का कोई मुखालिफ होगा तो वोह
मुस्लिम और क्रिस्टी ही होंगे। मज़ीद आगे लिखा
था सिखों पर अभी तक हूकूमती दहशत नहीं देखने को मिली कियोंके सिखों का अभी तक कोई अलहदा
मुल्क नहीं है। अगर होता तो उनके मुल्क में
भी दहशतगर्द हमले हो चुके होते।
नाज़रीन दौरे हाजरा में भारत की मर्क़ज़ी ग़फ़लत और ग़लत पालिसी की वजह से कोई भी आलमी बरादरी उसका साथ नहीं दे रहा है। फिर भारत ने चारों जानिब केंद्र की ग़लत पालिसी की वजह से दुश्मन पाल रखे हैं। पाकिस्तान, नेपाल, चीन, बंगलादेश, मयंमार, श्रीलंका। रही सही कसर जो देश की वतन परास्त अवाम थी उसके साथ नाइंसाफी हक़तल्फ़ी कर के उसको भी दुश्मन बना लिया। मुस्लिम, क्रिस्टी, सिख, दलित, सेक्युलर हिन्दू।
नाज़रीन मोदी हुकूमत की पालिसी क्या सिर्फ इंतेखाब को देखते हुए ही ते होती हैं हमदर्दी और इन्साफ का कोई पैमाना नहीं हैं। जिस सिख अवाम को १९८४ में हुए क़त्ले आम के लिए इन्साफ दिलवाने के लिए बीजपी सदा ही बाल्टी भर भर आंसूं बहती थी आज वही सिख अवाम उस बीजपी को गद्दार नज़र आने लगे। बेशर्म रंग। यह तंज़ीम बीजेपी उसके नुमाइंदे गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। CAA, NRC, NPR के एहतेजाज के वक़्त इस सहाफ़ी ने यह बात भी मन्ज़रे आम की हैं आज इनको मुस्लिम अवाम दुश्मन लग रहें हैं कल यह लोग ख़ुद हिन्दू अवाम को मारेगें। उसके साथ वहीँ करेगें जो आज मुस्लिम अवाम के साथ कर रहें हैं। आगे बोला था ना सिर्फ हिन्दू अवाम बल्कि संघी, कट्टरपंथी हिन्दू बल्कि ख़ुद बीजपी वाले भी इनको दुश्मन लगने लगेगें जो इनकी पालिसी और तानाशाह रवैये की मुख़ालेफ़त करेगा। आज वही हो रहा हैं। कई निकाल दिए गए कई के ख़िलाफ़ तहक़ीक़ात का आग़ाज़ कर दिया। यह तो खुली तानाशाही हैं जम्हूरियत नहीं हैं।
भारत किसी भी ग़फ़लत में ना रहे की हमारे साथ भक्त हैं और हम कोई भी जंग जीत लेंगें। भारत अपनी दिफ़ा के लिए किसी भी हद तक जा सकता हैं। पुलवामा के बाद एक बार गया था भारत ने अपनी दिफ़ा के लिए किसी भी हद तक जाने की हिमाक़त की थी ख़ुद के दो जदीद फौजी तय्यारे तबाह करवा लिए। एक गिरा पाकिस्तान में दूसरा जम्मू में गिरा और एक पाइलट को मौत की आग़ोश में भेज दिया दूसरा पकिस्तान की क़ैद में हैं। मुठ्ठी भर भक्त कब तक और कहाँ तक साथ देंगें। सब मारे जायेगें। भारत अपने चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ को नहीं बचा सका और बातें बड़ी बड़ी।
आज
लंगूर लँगूरनियाँ तालिबान पाकिस्तान की दुश्मनी पर बड़ी बड़ी खबरे शाया कर रहें हैं। पाकिस्तान की बर्बादी पर खबरे चला रहें हैं आटा
पेट्रोल कंगाली मुफलिसी जैसी ख़बरों पर तबसिरे दे रहें हैं। मुझे इन लंगूर और लँगूरनियों की ज़हानत और कम इल्मी
पर हँसी आती हैं। यह तो खुद भारत में कहावत
मशहूर हैं हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और।
जैसा ख़बरनामों में दिखाया जा रहा हैं वैसा कुछ भी नहीं हैं। आज की तारिख में मोदी ने पाकिस्तान पाकिस्तान मुस्लिम
कश्मीर इस्लाम बोल बोल कर अपने मुल्क को बर्बाद कर दिया कियोंकि अब्दुल को टाइट रखा जा सके। लेकिन हुआ क्या मेहगाई और मुफलिसी के चलते गुजरात,
राजिस्थान, हरयाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार में कितने हिन्दू ताजिरों
ने खुदकशी कर ली। अब्दुल और उसका फ़रज़न्द तो
पहले भी खुश थे अभी भी खुश हैं। कियोके उनका
यक़ीन कामिल अपने रब पर हैं।
नाज़रीन
अब यह सहाफ़ी अपनी बात को बता कर मज़मून को ख़तम करेगा। २०१३ तक इस सहाफ़ी का पूरे महीने का ख़र्च १० से २०
हज़ार में पूरा हो जाता था वहीँ आज की तारीख़ में एक लाख के क़रीब जा पहुंचा हैं। और मज़े की बात आमदनी उतनी ही ही हैं जितनी पहले
थी। १२ हज़ार। लेकिन कहाँ से पूरा होता हैं कैसे पूरा होता हैं
कोई नहीं जानता। एक फ्लेट उसके बाद दूसरा फ्लेट। सब अल्लाह के तवक्कुल और आमाले सालेह से पूरा हो
जाता हैं। बरकत इतनी होती हैं के अगर मेरे
वॉलेट में महज़ १०० रूपये भी रहेंगे तो जेब में इतनी गर्मी रहती हैं जिसकी कोई हद नहीं।
दूसरी
बात लाइफ स्टाइल में कोई तबदीली नहीं आई वही आलीशान नवाबी स्टाइल हैं शादी पार्टी में
एक एक वक़्त २० से ३० हज़ार का खर्चा मामूली बात हैं। बताने का मक़सद वही हैं कहाँ से आ रहा हैं किसी को
नहीं मालूम पड़ता है। कियोंकि हलाल की कमाई
है तो बरकत इतनी हो जाती हैं। इमदाद वग़ैरा सब दे कर भी बच जाता हैं। कश्मीर मसले के लिए इमदाद दी जाती हैं अभी तुर्की के मुतासरीनों को इमदाद दी। बताने का मक़सद वही हैं जब अल्लाह काम बनाने पर आ जाए तो दुश्मन की कोई हैसियत नहीं रहती। भारत अब्दुल को टाइट रखने की हिमाक़त करता रहा और ख़ुद की माश को बर्बाद कर दिया।
में दुआ करता हूँ जिस तरह जुबेर आले जुबेर की तमाम हाजतें हलाल कमाई से पूरी हुई उसी तरह हर मोमीन हर मोमीना हर मुस्लिम हर मुस्लेमा को अल्लाह हलाल खाने और अल्लाह पर तवक्कुल करने हर मुश्किल में सबर करने वाला बना दे। आमीन
Zuber