Sunday, 28 August 2022

शैतान दरिंदे ज़ालिम राजा की तोते में जान।

 नज़रिने गिरामी,

आज की कहानी (कथा) जो है वोह एक ऐसे दरिंदे, क़ातिल, शैतनी उलूम के माहिर दहशतगर्द की है जिससे तमाम आलम का अवाम बेज़ार और आजिज़ आ चूका था। 

माज़ी के पाटलिपुत्र मगध और हसीनापुर की रियासतों को मोअज़्ज़िज़ बादशाहों ने यकम कर के एक अज़ीम मुल्क बनाया था।  उन बादशाहों ने कई सो सालों तक उस मुल्क पर अमन और भाईचारगी से हुकूमत की और कहीं से कोई नाज़ेबा खबर नहीं आती थी।  मुल्क के तमाम मज़ाहिब भाईचारगी और अमन से रहते थे।  इंसाफ़ की बालादस्ती थी।  अब उस मुल्क की ख़ुशहाली और अमन की ख़बरे बेरुन मुल्क तक जा पहुंची और तमाम आलम के ताजिर उस मुल्क से तिजारत करने आने लगे।  और उस मुल्क के अमनो अमान ख़ुशहाली का राज़ जानने के लिए यूनिवर्सिटीज से तहक़ीक़ात के लिए तालिबे इल्म आने लगे। 

उन बादशाहों की मक़बूलियत अवाम की उनसे मोहब्बत को देख कर कुछ शैतानी फितरत ज़हरीले, साज़िशी शर पसंद अनासिर पैदा हो गए।  जिनकी  फितरत दहशतगर्दाना और नियत ग़लीज़ थी। बादशाह अमन पसंद थे इसलिए ज़हरीले, साज़िशी लोग बादशाहों से नफरत, बुग्ज़ और कीना रखने लगे। और उसको बर्बाद कर के हाकिमियत अपने हाथों में लेने के मंसूबे बनाने लगे साजिश रचने लगे। 

बिलआख़िर कई सालों तक ज़हर की काश्त और साजिश से अवाम के दिलों दिमाग में बादशाहों के ख़िलाफ़ नफ़रत भर गई और जो दरिंदा सिफ़त शैतानी उलूम का माहिर क़त्ले आम करने वाला दहशतगर्द राजा था अवाम उसको ही अपना पालनहार समझने लगी।  और अपना सब कुछ उस ज़ालिम तरीन दरिंदे सिफ़त राजा पर वार कर दिया। 

वोह राजा झूठा फरेबी जादू से सब कुछ हासिल करने वाला ऐसा दरिंदा था जो अवाम के बीच रह कर भी ग़ायब रहता था।  उस दरिंदे ने कई सालों तक बर्फीली पहाडिओं में इंसानी शर्मगाह (लिंग) की गन्दा और गलीज़ इल्म सीखा था।  जिसको वोह ज़ालिम और उसके पैरोकार महादेव (एक ऐसा शैतान दरिंदा जिसमे बोहोत ताक़त और क़ुव्वत होती है) के नाम से जानते थे।  और उसकी शर्मगाह लिंग की पूजा करते थे।  

जब उस ज़ालिम दरिंदे राजा की तालीम पूरी हुई तो उसको उसके शैतान उस्ताद (महादेव) ने एक दुआ दी की उसकी रूह एक परिंदे तोते के जिस्म में क़ैद रहेगी।  और जब तक तोता ज़िंदा है उस राजा को कोई हलाक नहीं कर सकता।  वोह इंसानी बस्ती में आया और हुकूमत के ख़वाब देखने लगा।  उसको यह मौक़ा मिल भी गया।  

जैसे ही दरिंदा ज़ालिम फ़िरोनी सिफ़त राजा हाकिमियत के ओहदे पर क़ाबिज़ हुआ उसने ज़ुल्म और बर्बरियत की नई इबारत लिखने का आग़ाज़ कर दिया।  उसके कारिंदे कभी भी किसी भी नाबिलग या कमसिन लड़की की अस्मत रेज़ी या इज्तेमाई अस्मत रेज़ी करने लगे।  राजा अब अपने मुख़ालिफ़ों को अज़ीयत दर अज़ीयत देने लगा।  मासूम और बेगुनाहों को झूठे इलज़ाम में जेलों में क़ैद करने से ले कर उसके कारिंदे राजा के नाम पर किसी का भी आशियाना तोड़ डालते।  राजा के पैरोकारों और ज़हरीले कारिंदों का हुजूम एक अकेले बेगुनाह फ़र्द को पीट पीट के हलाक करने लगा।  लोगों से ज़बरदस्ती नाज़ेबा नारा लगवाया जाता जो नहीं लगाता उसको बेज़र्ब मारा पीटा जाता और हलाक कर दिया जाता था। ज़ालिम दरिंदा सिफ़त जल्लाद राजा बेइख़्तयार फ़ैसले लेने लगा।  जो असासे बादशाहों ने बनाये थे उनको फ़रोख़्त करने लगा या उनके ऊपर अपने पैरोकारों से डाकाज़नी करवा कर उनको गसप करने लगा।  दीगर मज़ाहिब की इबादतगाहों को राजा के हुकुम पर उसके पैरोकार डाका डाल कर हज़म करने लगे। 

राजा ने अपने जुर्म और क़त्ले आम से दहशत मचा रखी थी।  जो कोई भी उसके ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करता उसको क़ैद करवा देता, ख़रीद लेता या उसका क़त्ल करवा देता था। 

जब राजा के ज़ुल्म हद दर्जे से बढ़ गए और हर कोई उस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने से ख़ौफ़ज़दा होने लगा।  तब एक आलिम साहब ने मुरागबा किया और मालिके हक़ीक़ी से यह जानने की कोशिश की के उस राजा की दुखती हुई रग क्या है।  या उसको हलाक कैसे किया जा सकता है।         

मुरागबे में पता चला की राजा की रूह दरअसल उसके जिस्म में नहीं है बल्कि उसके दारुल ख़िलाफ़ात से कोसो दूर सफ़ेद बर्फीली पहाड़ों में पिंजरे में क़ैद एक तोते के जिस्म के अंदर सियाह फाम भवरे की जान ही राज की रूह है।  आलिम साहब को यह भी इल्म हुआ की उस तोते तक पहुंचना दुशवारकुन सफर इंसानी क़ुव्वत से नहीं पूरा हो सकता।  हाँ अगर कोई रूहानी या ग़ैबी ताक़त साथ होगी तो वोह सफर ना सिर्फ पूरा होगा, बल्कि ज़ालिम तरीन राजा शैतानी उलूम का माहिर हलाक भी होगा।  उस राजा को मेहफ़ूज़ करने के लिए शैतान अपने पूरे हर्बे खेलेगा और मुजाहिदों को उस तोते तक पहुंचने के लिए हर क़िस्म की रूकावट पैदा करेगा।  लेकिन जिसके पास रूहानी ताक़त होगी वोह उस तोते तक पहुंचेगा। 

अल ग़रज़ आलिमों ने अपने अपने हल्क़े में रियाज़ का आग़ाज़ किया और एक नौजवान उस ख़बीस को हलाक करने की नियत ले कर निकला।

उसके साथ तमाम रूहानी और ग़ैबी ताक़त मौजूद थी।  जहाँ उस जल्लाद, दरिंदे राजा की हिफाज़त शियातीन कर रहे थे, वहीँ नौजवान को फ़रिश्तें और ग़ैबी मख़लूक़ मदद फ़रहाम कर रहे थे।  नौजवान बावजूद तमाम तर तकलीफ़ों और अज़ीयतों के अपने अज़्म और हदफ़ से मुनहरिफ़ नहीं हुआ।  ख़बीसों ने नौजवान को  अपने हदफ़ तक ना पहुंचने देने के लिए हर मुमकिन कोशिश की और उसको हर क़िस्म की तकलीफ़ दी गई हर जगह उसको रोकने की हिकमत की गई।       

बिलआख़िर नौजवान बर्फीली पहाडिओं और तकलीफ़ों को चीरता हुआ हदफ़ के नज़दीक पहुंच गया।  अब आख़िर मरहला बचा था।  पिंजरे में क़ैद तोते तक पहुंचने के लिए एक सर्द झील से हो कर गुज़रना था।  उस झील का पानी इतना सर्द की रगो में दौड़ता हुआ लहू जमा दे।  नौजवान पानी में उतर गया और कुछ घंटों की मशक़्क़त के बाद दोबारा साहिल पर पहुंच गया।  अब उसको सफ़ेद बर्फनुमा पत्थर साफ़ दिखाई दे रहा था। 

नौजवान ने उसके नज़दीक जा कर तोते की तलाश शुरू कर दी।  काफ़ी दिनों की तलाश के बाद उसको वोह तोता वहीँ उस सफ़ेद बर्फ नुमा पत्थर के नज़दीक दिखाई दिया।  जैसे ही उस नौजवान ने उस पिंजरे को उठाना चाहा एक सियहा फाम नाग नमूदार हुआ।  वोह आहिस्ता आहिस्ता बड़ा होता चला जा रहा था और उसने एक क़वी अज़दह की शक्ल इख़्तेयार कर ली।  और उसने नौजवान को निगलने की कोशिश की।  

काफ़ी घंटों की मशक़्क़त और जंग के बाद नौजवान ने उस ज़िम्नी और मसनूई नाग पर भी काबू पा लिया।अब पूरा हल्क़ा उस नौजवान के ताबे था और शैतानियत, बुतपरस्ती, ज़ुल्म, बर्बरियत से आज़ाद था।  अब आख़िर मरहला और मंज़िल बाक़ी बची थी।  तमाम मुल्क को उस शैतान से आज़ाद करवाना और उस ख़बीस रावण का खात्मा करना।  अब नौजवान ने बेख़ौफ़ हो कर पिंजरे को हाथ में उठा लिया।  पिंजरा हाथ में उठाते ही शैतान, दरिंदा, ज़ालिम हाकिम राजा फ़ौरन नमूदार हो गया।  उसको अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से हीले बाज़ी से मुत्तासिर कर के पिंजरा लेना चाहा।  लेकिन नवजवान को भी ग़ैबी मदद मिल रही थी।  वोह उस ज़ालिम की बातों से ज़र्रा भर मुत्तासिर नहीं हुआ।  बिल आख़िर ज़ालिम, दरिंदा शैतानी राजा बोला ऐ जवान तुझे जो कुछ चाहिए में दूंगा बस तू यह पिंजरा मुझे दे दे। 

उस नौजवान ने पिंजरा खोला और तोते को अपने क़ब्ज़े में ले कर पिंजरा उसको दे दिया।  उस पर ज़ालिम राजा बोला पिजरा नहीं वोह तोता मुझे दे दे।  नौजवान ने तोते की गर्दन मरोड़ी और भवरे को अपने क़ब्ज़े में कर के तोता उसको दे दिया।  अब जंग में कुछ भी बाक़ी नहीं था।  ज़ालिम तरीन, दरिंदा सिफ़त शैतानी राजा की जान ही उस नौजवान के हाथ में थी।  अब राजा ने अपनी हार मान ली और बोला तू जैसा कहेगा में वैसा ही करूँगा बस इस भवरे को ज़िंदा रखना।  नौजवान ने एक ही झटके में उस भवरे को मसल डाला।  जैसे ही वोह भवरा मसला गया की राजा पाश पाश होने लगा और उसके दारुल ख़िलाफत की हर मंज़िल हर मसनूई जादूई दुनियां पाश पाश हो कर टुकड़े टुकड़े होने लगी। 

राजा के हलाक होते ही अवाम के दिलों दिमाग़ से आँखों से जादूई शैतानी पर्दा हट गया।  फिर से उस मुल्क के अच्छे दिन आ गए।  बादशाहत वापिस से आई और फिर से वही इंसानियत और भाईचारे की बातें फ़िज़ाओं में बुलंद होने लगी।

Zuber

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