अज़ीज़ नाज़रीन,
भारतीय
दहशतगर्द फ़ोर्स के बाद खाकी और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द दिफ़ाई फ़ौजिओं के हाशिये पर आ गए हैं और उनको हिसार में ले लिया
है। दिसम्बर २०१९ से ले कर फ़रवरी २०२० दिल्ली ख़ाकी और
ज़ाफ़रानी दहशतगर्द हमलों में जितने भी मुस्लिम अवाम को शहीद किया था उन तमाम ख़ाकी और
ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों और उनको माशी इमदाद करने वाले ज़ाफ़रानी ताजिरों को चुन चुन के मौत
की आगोश में भेजा जा रहा है। इन ज़ाफ़रानी ताजिरों
में गुप्ता, अग्रवाल, जैन, मिश्रा, मेहता, मोदी, शाह शामिल हैं।
इस
बार मौत की काली परछाई शहडोल के पुलिस सब इंस्पेक्टर का पीछा करते हुए उसको अपनी आगोश
में ले गयी। यहाँ पर एक सब इंस्पेक्टर हिरा
सिंह परस्ते ने पहले अपनी बीवी को देश के गद्दारों को गोली मारो बीवी को उस नारे को
सच्चा कर के गोली मार दी फिर खुदकश हमलावर बन के खुद को गोली मार ली। अब ना रहा गद्दार और ना रहा साला, एक ही झटके में
सब घोटाला हो गया काला। रीवा जहाँ पर मज़मून
निगार सहाफी जुबेर ने अपनी ज़िन्दगी के बेशक़ीमती २ साल गुज़ारे हैं। उस ज़िले से उनको इश्क़ की चेतना का एहसास हुआ। वोह ख़ाकी दहशतगर्द हिरा सिंह परस्ते भी रीवा ज़िले
के पनवार थाने का मुलाज़िम था। उसकी मौत के
वक़्त वोह रीवा से शहडोल आया हुआ था। दर हक़ीक़त
उसकी मौत उसकी काली परछाई बन कर उसको रीवा से शहडोल खेच कर ले गयी।
तेरी
परछाई देख में तेरे पीछे आया
ख़ाकी
दहशतगर्द शहडोल के पटेल नगर कॉलोनी में एक किराए के मकान में रह रहा था। बरोज़ हफ्ते सनीचर खाकी दहशतगर्द हिरा सिंह शहडोल
पंहुचा और एक कमरे में अपनी बेटी को ज़ोरदार आवाज़ में टीवी चालू कर के दुसरे कमरे में
जा कर पहले अपनी अहलिया को गोली मारो ग़द्दारो को इस नारे सच्चा कर दिया फिर खुद को
गोली मार के हलाक कर लिया। दोनों की मौक़े
पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने दोनों की लाशों को अपने क़ब्ज़े में ले कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है, मज़ीद आगे की तफ्तीश का आगाज़ किया है।
हरयाणा,
उत्तराखंड, शुमाल, दिल्ली, राजिस्थान और मध्य प्रदेश में दिफ़ाई फौजी पहले ही खाकी दहशत
के ऊपर क़ेहर बन कर टूट चुके हैं। और आये दिन
खाकी दहशत मौत की आगोश में भेजे जा चुके हैं।नाज़रीन गुजिश्ता महीने भोपाल में दो तीन खाकी दहशतगर्दों को फ़ासी दी जा चुकी हैं।
पिछले हफ्ते भारतीय फ़िज़ाई तय्यारे को भोपाल के नज़दीक दीफ़ाई फ़ौजिओं ने तबाह कर
दिया था।
नाज़रीन
भोपाल कुछ याद आया जी हाँ यह वही भोपाल है जहाँ पर आतंकवादी दरिंदे शिव राज ने बेगुनाह
५ मुसलमानों को सिमी का कारकून बोल कर खाकी आतंकवादिओं के हाथों शहीद करवा दिया था। बदला तो बदला होता है जैसे की सरपच ने झूठा बयान
दिया था की सभी के हाथों में लाठिया थी और वोह पत्थर उछाल रहे थे और आज़ादी आज़ादी के
नारे लगा रहे थे। उसके बाद रायसेन में सरपंच
का भी काम तमाम किया जा चूका है।