अज़ीज़ नाज़रीन, अस्सलामो अलयकुम,
हज़रात आज का मौजूं दो मुमालिक हिन्द और पाक,
दो तंज़ीम ऐ.आई.एम.आई.एम. और तहरीके इन्साफ की कारगरदेगी और उसके
मुवाफ़िक़ नाताईजों पर मुश्तमिल है। दोनों का
मक़सद इन्साफ की पैरवी करना, हक़ पर चलना और अपने अपने वतनों की फलहा और बक़ा के लिए जद्दो
जेहद करते रहना।
नाज़रीन इससे पेश्तर दो मजमून शाया कर चूका हूँ,
जिसमे से एक में शेर कहा है "झुकती है दुनियां झुकाने वाला
चाहिए…….. और दुसरे के उन्वान में ही “साजिशों का दौर हो रहा है
ख़लास।“ मतलब पोशीदा है। नाज़रीन अब दोनों मुमालिकों के मौजूदा हालात का जायज़ा
लेते हैं। हाल ही में गुरजात बल्दिया इंतेखाब
में असदुद्दीन की तंज़ीम मजलिस ने बेहतर कारगरदेगी करते हुए महज़ २० रोज़ के इन्तेख़ाबी
मरहले में हिस्सा ले कर २४ सीटों पर जीत दर्ज की है। इस जीत से
दहशत,
ख़ौफ़, शैतानी उलूम का मरकज़ गुजरात में भी आरताग़ुरूल ग़ाज़ी और उनके जंगजुओं तुर्गुत,
बंसी, दूवान और तबीब आर्तुक साहब ने दस्तक दे दी है। जिस गोधरा को हिन्दू दहशत का मरकज़ बना कर मुस्लिम
क़त्ले आम किया था वहां पर दुसरे नंबर पर फ़ाइज़ हो कर एहम मुख़ालिफ़ तंज़ीम बनी है।
नाज़रीन मक़सद मीम की कारगरदेगी बताना नहीं है,
बरक़्स इस जीत से जो मुस्लिम अवाम को हासिल हुआ है उसको दिखाना
है। २ मार्च २०२१ को गुजरात बल्दिया के आख़िर
मरहले के नताइज आये जिसमे मीम ने कुल २४ सीटों पर जीत दर्ज की थी और ४ मार्च २०२१ को
१२१ मुस्लिम नौजवानों को रिहा किया गया इनको २० साल क़ब्ल सिमी से ताल्लुक़ रखने के महज़
शक में हिरासत में लिया गया था।
अब इस कारगर्दी की वजह मीम की जीत हो या कमिश्नर साहब ऐ.टी.अस. का इस सहाफी से किया हुआ वादा की हम इन्साफ को ज़िंदा करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर
के हुकूमत से गुज़ारिश करेंगे। ख़ैर वजह चाहे
कुछ भी हो इन्साफ होगा तो दिखेगा और सहाफियों को पहले इल्म होगा यही बात इस सहाफी ने
कमिश्नर साहब से भी की थी। इन्साफ होगा तो
इस सहाफी के ज़ख़्मी अलफ़ाज़ पर मरहम लगेगा और ज़ख्म ठीक भी होंगे, और अलफ़ाज़ ज़हरीले होने के बजाये शीरी और मीठे होंगें ।
दूसरी बात उस पाक सरज़मीन की करतें हैं जो कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था लेकिन आज पाक है। पाकिस्तान में सीनेट इंतेख़ाब में वज़ीरे आज़म की तंज़ीम तहरीके इन्साफ का नुमाइंदे को शाकिस्त हुई और यह बात इमरान ख़ान ने इंतेखाब से एक डेढ़ साल क़ब्ल ही बोल दी थी की सीनेट इंतेख़ाब में ज़मीने जैसे फ़रोख़्त की जातीं हैं वैसे ही ख़रीद फ़रोख़्त के मामले ते होतें हैं।
नाज़रीन पकिस्तान के दुश्मन और मुल्क मुख़ालिफ़ तंज़ीमे अपने हदफ़
को क़ायम रखने के लिए हर मुमकिन चाल चलते हैं और साजिशें करतें हैं लेकिन अल्लाह के
जाल (वेब) में ऐसे फसतें हैं की तड़पने का मौक़ा भी नहीं मिलता है। फिर इस तरीक़े के मामलों से ग़द्दारों का भी बखूबी
इल्म हो जाता है क्योंकी अगर कोई नुमाइंदा खरीद फ़रोख़्त कर के खुद ही अपनी शाकिस्त का
ज़िम्मेदार होता है या उसका किरदार पाकिस्तान या तंज़ीम के मुख़ालेफ़त का होता है तो वोह
तमाम बातें इल्म में आ जातीं हैं।
नाज़रीन यहाँ पर यह बात वाज़े अलफ़ाज़ में बताना चाहूंगा की पाकिस्तान का दुश्मन अव्वल है भारत और दुश्मन सानी दहशतगर्द क़ाबिज़ इसराईल। जैसे ही इमरान ख़ान की तंज़ीम का नुमाइंदा हारा भारत के लंगूर-लँगूरनियों के खुशी से लबरेज़ मज़मून शाया होना शुरू हो गए। जिसमे ख़ास हैं ज़ी न्यूज़, यूं टी वी ९, जनसत्ता, इंडिया न्यूज़।
फिर जब इमरान ख़ान ने एतेमाद राये हासिल किया तब पाकिस्तान मुख़ालिफ़ ज़हरीले इमरान ख़ान के खिलाफ झूठी बातों पर मुश्तमिल मज़मून शाया किये गए। इस एतेमाद को भारत का ज़ाफ़रानी मीडिया जालसाज़ी और फरेब बता रहा था। फिर ज़ी न्यूज़ ने एक आज़ाद इस्लामिक रियासत के आला तरीन जमूरियाई ओहदे पर फ़ाइज़ शख्स वज़ीरे आज़म इमरान ख़ान के लिए अदना दर्जे की रिपोर्टिंग करना शुरू कर दी। घुटनो के बल गिर कर भारत से भीक मांगने पर मजबूर हुए इमरान वग़ैरा।
नाज़रीन इस तरह की ख़बरों और अंगार से ही ज़ाहिर हो जाता है की साजिश किस मुल्क की जानिब से रची हुई थी और किस की साजिश नाकाम हुई। पाकिस्तान, इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ साजिश रचने या उनको कमज़ोर करने का मामला हो, संघी दहशत, शिद्दत पसंद हिन्दू और ज़ाफ़रानी तंज़ीम के नुमाइंदे सरे फेहरिस्त होतें हैं। फिर अगर इनकी साजिश नाकाम हो जाती तब मीडिया के जारिए कैसे ज़हरीले बयानात और आग लगाने वाले मज़मूनों की आंधी और बाढ़ आ जाती है।
लेकिन इंशा अल्लाह अब से बातिल ताक़त का हर हरबा हर साजिश नाकाम होगी। ख़्वाह वोह मुसलमान, इस्लाम या पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ही किया जाए।