Wednesday, 20 January 2021

दीफाई फौजों को हाथ लगी ज़बरदस्त कामयाबी।

लखनऊ: 

अज़ीज़ नाज़रीन,

दीफाई फौजों को ज़बरदस्त कामयाबी हाथ लगी है, जब उन्होंने दहशत की फैक्टरी में पलने वाले बीज को मौत के घाट उतार दिया।   साधू के सूबे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मरकज़ी सेहत वाज़ारतखाने का सचिव लव अग्रवाल के भाई अंकुर अग्रवाल को गोली मार के हलाक कर दिया गया।  पिलखनी इलाके में उसकी लाश मिली है।  लाश के पास से उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर भी बरामद हुई है.  मामला मशकूक है और नज़रिये अव्वल से अंकुर ने खुदकशी की होगी ऐसा नतीजा अख़ज़ किया जा रहा है।  अंकुर अग्रवाल की लाश को जिला अस्पताल ले जाया गया है. जिले के तमाम सियासी तंज़ीमों के लोग जिला अस्पताल पहुंच गए हैं.

पुलिस अधीक्षक (देहात) अतुल शर्मा ने बताया कि आईएएस अधिकारी लव अग्रवाल के भाई अंकुर अग्रवाल की थाना सरसावा के ज़ेरे निगरानी पिलखनी सनअती इलाक़े (इंडस्ट्रियल एरिया) में एक फैक्टरी है. रोज़ाना की तरह अंकुर अग्रवाल अपनी फैक्टरी गया था।  बरोज़ पीर देर शाम फैक्टरी के पास ही एक खेत से अंकुर अग्रवाल की लाश मिली।  लाश के पास से उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर भी बरामद हुई है. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.

उन्होंने बताया कि ‘‘मरकज़ी सेक्रेटरी (सेहत) लव अग्रवाल सहारनपुर का रहने वाला हैपुलिस लव अग्रवाल के भाई अंकुर अग्रवाल की मौत के मामले में सारे पहलुओं की जांच कर रही है.''

सहाफी जुबेर का जवाब

क्यों बे धोती योग चूर्ण अर्थात भगवा साधू केसा लग रहा है, एक एक को चुन चुन के मारेंगेजो भी तुम्हारे साथ गया या साथ दिया समझो हो गया जहन्नुम वासिल।   मौलाना जोहर अली यूनिवर्सिटी की ज़मीन क़ब्ज़ा कर के तू समझता है बोहोत बड़ा तीर मार लिया।  ना ही जंग अभी ख़तम हुई है और ना ही हमने हथियार डाले हैं।   करो लव जिहाद।   

अभी तो ऐसे ना जाने कितने लव और कुश मारे जायेगें तुम अपनी सोचो।  यह चीज़ तो पहेली ही हमारे हल्क़े में ते हो चुकी है २०१४ से २०१९ का बदला अभी पूरा नहीं हुआ फिर जो कुछ भी २०२० से आगे होगा उसका बदला भयानक डरावना तूफानी होगा।   करो ना इंसाफ़ी और तैयार रहो तुम्हारी बारी आने की, जब हम तुम पर वार करेगें और अपने मुस्लिम भाइयों और बेहनों का क़िसास लेंगें। 

एक एक ज़ुल्म, सितम नाइंसाफी क़त्लो ग़ारत हमारी डायरी में दर्ज हो चूका है और हर ज़ालिम का बोहोत ही भयानक अंजाम होगा।   कल ही हिन्दू दहशत के गड सूरत में १५ जहन्नुम रसीद हो गए।   एक दिन क़ब्ल भुज में राम मंदिर के नाम पर बजरंग दल ने बवाल किया था और मुस्लिम अवाम को निशाना बनाया गया था, नतीजा अगले ही दिन दे दिया।   हमारे यहाँ इस हाथ दे उस हाथ ले।  

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...