हालिया दिनों में जिस तरह से अमेरिका, चाइना, नेपाल, अफ़ग़ानिस्तान, मालदीव से हुकूमते हिन्द को किनारा कश करने के शदीद झटके लगे थे उसी बेन अक़वामी राह पे अब श्री लंका भी चल पड़ा है. जिसने हुकूमते हिन्द और उसके शिद्दत पसंद असल दहशतगर्द को उनके यहाँ होने वाली हिन्दू दहशतगर्दों की पैदावार और ज़ाफ़रानी आलूद की काश्तकारी की वजह से अलहदा कर दिया, और अमन पसंद पाकिस्तान से दहशतगर्दों के खिलाफ इस जंग में मदद मांगी है.
श्री लंका के वज़ीरे आज़म जनाब रानी विकर्म सिंघे ने सहाफिओं से खिताब करते हुए कहा "उनकी हुकूमत, अगर ज़रुरत पड़ी तो, पाकिस्तान से दहशगर्दों को तलाशने में जो ईस्टर इतवार के
धमाकों में मुलव्विस थे मदद मांगेगी और उनके खात्मे की अपील करेगी.
उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स के सहाफी से खुसूसी मुज़केरात में मज़ीद कहा पाकिस्तान ने श्री लंका के साथ दहशतगर्दी की इस जंग में इससे क़ब्ल भी खुले दिल से ताऊन किया है.
उन्होंने इशारों में भारत का नाम लिए बग़ैर बेरुन मुल्क के इस हमले में हाथ होने के इमकान को नज़र अंदाज़ नहीं किया. आगे उन्होंने कहा श्री लंका तफ्तीश और तहक़ीक़ाति इदारे बाहरी मुल्क की शमूलियत और उससे जुड़े हुए तारों की जांच कर रही हैं. आगे उन्होंने कहा अगर ज़रुरत पड़ी तो हम दहशतगर्दों को तलाशने में पाकिस्तानी हुक्काम की मदद लेंगे ताके हम उनका ख़ात्मा कर सकें.
जिससे आफ़ते सानेहा के वक़्त में उनके मुल्क के ताऊन से हमारे दरमियान एतेमाद पुख्ता होगा.
हिंदी मिडिया इस हमले को इस्लामिक स्टेट के दहशतगर्दों से जोड़ के देख रही है. इस सहाफी को उन सभी लंगूर हनुमान ज़ेहनियत पे तरस आता है, जो इस हमले को आई.अस. से जोड़ के देख रहे हैं.
ये हमला किसी भी सूरत से आई.अस., अल क़ायदा जैसी तंज़ीमे नहीं कर सकती उसकी बोहोत सी वजूहात ये सहाफी बताना चाहता है.
१. आई.अस. का वजूद इराक़ से भी उखड चूका है और अल-क़ायदा का अफ़ग़ानिस्तान से. दोनों ही तंज़ीमे ख़त्म हो चुकी हैं. फिर जिन तंज़ीमों की बुनयाद और जड़ें अपने खुद के घर से उखड गई हों वो कैसे किसी तीसरी जगह जा कर हमला करने की सोच भी सकतें हैं.
२. किसी भी हमले को करने के लिए इक़्तेसादी हालात साज़गार होना चाहिए. फिर जो तंज़ीमे ख़त्म हो चुकी है उनको रुपए पैसे की फ़राहम कौन कर रहा है.
फिर धमाका खैज़ मवाद या असलाह खरीद फरोख्त करने के लिए आमदनी के ज़राये क्या हैं.
३. इस तरह के मंसूबा बंद किसी भी हमले को अंजाम देने के लिए ज़हीन सिपे सालार की ज़रुरत होती है और उसकी सरपरस्ती में ऐसे हमले अमली जामा पहनाये जातें हैं.
जब आई.अस. के अबू बकर बगदादी अंधेरों में ग़र्क़ाब हो चुके हैं और अल-क़ायदा के हज़रते हुसामा बिन लादेन रेहमतुल्लाह अलैहे जामे शहादत नौश कर चुके हैं तो इन हमलो की क़यादत कौन कर रहा है. और किस की ज़ेरे क़यादत ये हमले अंजाम दिए गए.
४. जिन तंज़ीमों का ज़िक्र भारतीय मीडिया कर रहा है वो खुद ही जंग की अज़ीयत बर्दास्त कर हार चुकी हैं और अपनी ज़िन्दगी के बचे हुए दिन गिन रही हैं. अब कुछ हलाक शुदा तंज़ीमे जो खुद अपनी जान बचाने में मशग़ूल हैं वो कैसे किसी के ऊपर हलवार हो सकती हैं. ये काम तो उस तंज़ीम का हो सकता है जो अभी तक आलमी बरादरी की नज़रों से पोशीदा है और उसके अंदर अभी खूब उसत, कूव्वत और जो माली एतेबार से क़वी है.
भारतीय मीडिया को आई.अस. या अल क़ायदा पे हमले की इलज़ाम तराशी करने से क़ब्ल अपनी तारिख देखना चाहिए उस लंगूर हनुमान को याद करना चाहिए जो अपनी वालेदा और अपने आक़ा की एहलिया को महफूज़ करने के लिए तमाम श्री लंका को आतिशे नार कर देता है. श्री लंका से भारतीओं का तारीख़ी और क़दीमी झगड़ा है.
२०१८ में भारत में इंतेखाबात से क़ब्ल जब ज़ाफ़रानी पार्टी बीजेपी अपनी ज़मीन तमिल नाडु में तलाश रही थी तब ज़ाफ़रानी हिन्दू दहशतगर्द तंज़ीम के एरिया कमेंडेन्ट अमित शाह ने एक अखबारी इजलास में कहा था अगर ज़ाफ़रानी हुकूमत २०१९ क़यादत में आई तो हम श्री लंका में तामील पनाहगाहों के हक़ की लड़ाई लड़ेगें.
और हुकूमते श्री लंका पे दबाव बनायेगें की तमिल पनाह करता अवाम को जाफना में मुस्तक़िल मुक़ीम किया जाए.
मज़ीद उसने कहा हम जाफना को तामील अवाम के लिए अलहदा मुल्क़ की तहरीक चलाएंगे. ये बात भी किसी से पोशीदा नहीं है; आज से नहीं बल्कि ख़ाना जंगी के मरहले से भारत जाफना को श्री लंका का कामिल हिस्सा तस्सव्वुर नहीं करता है. राजीव गाँधी की हलाकत भी उस दौर में श्री लंका की ख़ाना जंगी की एक एहम वजह है.
हाल ही के श्री लंका में हुए हमले और अमित शाह की बातें इस बात की और पुर ज़ोर तवज्जो दिलाने के लिए काफी हैं की श्री लंका फिर से एक बार ख़ाना जंगी की अज़ीयत को बर्दाश्त करने के लिए तैयार रहे.
और इस बार भी उनका दुश्मन कोई और नहीं बल्कि उनका अपना क़दीमी और तारीख़ी दुश्मन है.
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