अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प का इजरायल की राजधानी के रूप में यरूशलेम
को मान्यता देना के निर्णय पे संयुक्त राष्ट्र में समूचे विश्व के देशो का जनमत संग्रह
हुआ और इसमें अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश आतंकवाद के समर्थन में अलग थलग खड़ा दिखा. लेखक ने अपने १० दिसंबर २०१७ के लेख “आतंकवादी के समर्थन में अकेले खड़ा रह गया” में अमेरिका के यहूद आतंकवाद पे एकदम सही और सटीक
आकलन किया है.
भारत सरकार ने मज़लूमो के पक्ष में और आतंकवाद तथा ज़ालिम देश के खिलाफ वोट दिया. ये वोट भारत सरकार का था न के हिन्दू स्टेट का. हलाके हिन्दू स्टेट की जनता को भारत के इस फैसले
से बहोत आघात पंहुचा है. हिन्दू स्टेट की भगवा सभा (संसद) का एक सरफिरा प्रदूषित ज़ेहनियत
का बंदा सरकार के इस निर्णय से तिलमिला गया और अपनी ओछी, नीच और ज़हरीली मानसिकता का
मुज़ाहेरा करने लगा. ज़ालिम और मज़लूम के मुद्दे को भी वो सरफिरा आतंकी, मुस्लिम बनाम
हिन्दू की नज़र से देखने लगा. आगे उसने कहा
तमाम मुस्लिम देश और फलस्तीन कश्मीर पे भारत से भिन्न राय रखते है तो हमको भी आतंक,
ज़ुल्म और बर्बरता को सपोर्ट करना चाहिए था न के मज़लूमो को. अगर हिन्दू स्टेट के आतंकी ज़ुल्म बर्बरता करेंगे
और चाहेंगे के कश्मीर पे तमाम अमन पसंद देशो की राय हिन्दू स्टेट के पक्ष में हो तो
ये उनकी भूल ही कहा जाएगा. श्रीमान स्वामी
आपका ये कहना बेमानी है के मुस्लिम देश और फलस्तीन कश्मीर पे भारत से मुख्तलिफ राय
रखते है सिर्फ मुस्लिम देश ही नहीं बल्कि विश्व के तमाम देश जिस तरह अमेरिका से इजराइल
पे मुख्तलिफ राय रखते है, कश्मीर पे भी भारत से मुख्तलिफ राय रखते है अगर यकीन नहीं
आता तो यूं.एन. में कश्मीर मुद्दे पे भी जनमत संग्रह करवा लीजिये और अपने आपका विश्लेषण
कर लीजिये. जिस तरह विश्व के १२८ देश फलस्तीन
मुद्दे पे आपसे मुख्तलिफ राय रखते है उसी तरह विश्व के देश भारत से कश्मीर पे भी मुख्तलिफ
राय रखेंगे. यहाँ सवाल इजराइल फलस्तीन या भारत कश्मीर का हे ही नहीं यहाँ सवाल है ज़ालिम
बनाम मज़लूम का और विश्व के ९०% देश मज़लूम का साथ देंगे आप जैसी कट्टरपांति सोच या आतंक
मचाने वाले देश इजराइल का नहीं. यही वजह है इस पत्रकार ने भारत के यूं.एन. में स्थाई
सदस्यता का विरोध किया था क्योके विश्व की संसद को आतंकवादीओ का अड्डा और ज़ात पात की
राजनीति से दूर रखना था जिसका ज़िक्र इस पत्रकार ने अपने लेख यूं.एन.
स्थाई सीट पे
पाकिस्तान की नकारात्मक
मुद्रा...
आगे आतंकी
कहता है इस निर्णय से भारत की साख ख़राब होगी और इसके दूरगामी परिणाम भयावह होंगे. ये आतंकी या तो अज्ञानी है या फिर इसको राजनितिक
कूटनीति नहीं मालूम है. कोई भी बे सर पैर का
बयान देने से पहले और हर मुद्दे को कश्मीर और इस्राएल से जोड़ने से पहले इस आतंकी को
इतना तो ज्ञान होना ही चाहिए के विश्व समुदाय का वोट किस दिशा में जा रहा है. विश्व के १२८ देशो ने फलस्तीन के पक्ष में और आतंकवाद
के खिलाफ वोट किया है तो क्या वो समूचे देश दूरगामी परिणाम से वाकिफ नहीं होंगे. या
सिर्फ एक स्वामी साहब जैसे राजनेता ही अकल्मन्द
है और समूचे विश्व के देशो के प्रतिनिधि बेवकूफ.
जबकि सिर्फ ९ देशो ने आतंकवाद की हिमायत की है जिसमे से दो देश तो वही है जो
आतंकवाद के जननकर्ता है. फिर एक है ग्वाटेमाला ये वही देश है जहां कैदिओ को ज़बरदस्त
प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है और यहाँ गंभीर मानवीय हक़ का उल्लंघन होता है.
भारत सरकार
का निर्णय भले ही आतंकवादीओ और उनके हामिओ को पसंद नहीं आ रहा होगा लेकिन इससे ये बात
सिद्ध हो गई के फलस्तीन के ऊपर सरकार का निर्णय अभी भी नहीं बदला है सोच भले है आतंकवाद
की हो लेकिन कार्य प्रणाली अभी भी अमन चेन वाली है. भारत सरकार के फलस्तीन के पक्ष में वोट देने से
भारत की साख विश्व की संसद में बढ़ेगी न के कम होगी. विश्व की संसद में भारत को एक अमन पसंद देश की हैसियत
से देखा जाएगा. हां भारत का निर्णय सिर्फ उन
लोगो को बूरा लग रहा होगा जो खून खराबे की भाषा को ही अमन की भाषा बोलते है. जो आतंक को अपना धर्म समझते है और हिन्दू धर्म खतरे में है कह के किसी भी बेगुनाह,
निहत्ते, मज़दूर या कमज़ोर की बर्बर हत्या करने को ही बहादुरी समझते है.
इजराइल और
फलस्तीन मुद्दे पे हमेशा से ही विश्व समुदाय का पक्ष ज़ालिम इजराइल के खिलाफ और मज़लूम फलस्तीन के हक़ में रहा है. अब इस आतंकी के पास भारत के फलस्तीन के पक्ष में
वोट देने के ऊपर सिर्फ ज़ात पात के आलावा और कश्मीर जैसे कमज़ोर मुद्दे के आलावा अपने
पक्ष को ठोस बनाने के लिए और कोई वजह हे तो बताये. फिर कश्मीर पे भी अगर विश्व की संसद
में जनमत संग्रह होता है तो वो भी कश्मीरीओ के हक़ में होगा. क्योके हर देश हिन्दू स्टेट की तरह और उस ज़ालिम
सोच का हामी नहीं होता जो आतंक की सोच इजराइल की है. हर देश की सोच भारत जैसे देश की
सोच होती है. जो एक इंसान को जीने का हक़ देती है न के उससे उसका जीने का हक़ छीनती है.
हाँ आतंकवादीओ के लिए ये सोच हो सकती है लेकिन एक इंसानी हक़ पे यकीन रखने वाले देश
की हरगिज़ नहीं हो सकती. श्रीमान सुब्रमणियम स्वामी उसी आतंकी सोच के हामी है जो राजिस्थान
में मज़लूमो की हत्या को सही ठहराते है. जो एक अधमरे इंसान को ज़िंदा जलने की कार्यवाही
को दुरूस्त कहते है. उसके ऊपर उनका एक दम निहायत कमज़ोर और जाहिलाना पक्ष होता है के
कश्मीरी पंडितो के साथ भी ऐसा ही हुआ था. हमारे पूर्वजो के साथ भी ऐसा ही हुआ था. स्वामी
साहब से कहना चाहता हूँ कश्मीरी पंडितो का मसला भी आप जैसे नपुंसक राजनेताओ ने बड़ा
चढ़ा के अपने राजनैतिक फायदे के लिए और पेचीदा कर दिया है. उच्चतम न्यायलय ने अगस्त
२०१७ में एक सर फिरे की पेटिशन को उठा के फेक दिया गया जिसमे उसने प्ली की थी के २५०
से ५०० कश्मीरी पंडितो के साथ अमानवीय कृत किया गया इसलिए उनकी ऑफ.आई.आर. दर्ज करके
मामले की जांच की जाए. न्यायलय ने कहा १९८० के केस में ५०० लोगो के ऊपर ज़ुल्म हुआ और
अभी तक ऑफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुई मतलब ये केस फ़र्ज़ी है. कश्मीरी पंडितो पे कोई ज़ुल्म
नहीं हुआ. अगर ज़ुल्म और क्रूरता हुई थी तो काहेको किसी ने एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं
करवाई. और अभी तक आप कहा थे क्या कर रहे थे क्या आप अपनी सरकार के आने का रास्ता देख
रहे थे. दूसरी बात अगर आपके पूर्वजो पे किसी
भी तरह का ज़ुल्म मुस्लिम बादशाहो ने किया था तो आपकी सरकार आने के बाद ही ये सारी बाते
काहेको उठ के आ गई. १९४७ से २०१४ तक क्या कर रहे थे.
मज़लूम फलस्तीन के साथ विश्व संसद में जो देश खड़े
थे
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A
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Afghanistan,
Albania, Algeria, Andorra, Angola, Armenia, Austria, Azerbaijan
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|
B
|
Bahrain,
Bangladesh, Barbados, Belarus, Belgium, Belize, Bolivia, Botswana, Brazil,
Brunei, Bulgaria, Burkina Faso, Burundi
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|
C
|
Cabo
Verde, Cambodia, Chad, Chile, China, Comoros, Congo, Costa Rica, Cote
d'Ivoire, Cuba, Cyprus
|
|
D
|
Democratic People's Republic of
Korea (North Korea), Denmark, Djibouti, Dominica
|
|
E
|
Ecuador, Egypt, Eritrea,
Estonia, Ethiopia, Finland, France
|
|
G
|
Gabon, Gambia, Germany, Ghana, Greece, Grenada, Guinea, Guyana
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I
|
Iceland, India, Indonesia, Iran, Iraq, Ireland, Italy,
Japan, Jordan
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K
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Kazakhstan, Kuwait, Kyrgyzstan
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|
L
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Laos, Lebanon, Liberia, Libya, Liechtenstein, Lithuania, Luxembourg
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M
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Madagascar, Malaysia, Maldives,
Mali, Malta, Mauritania, Mauritius, Monaco, Montenegro, Morocco, Mozambique
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N
|
Namibia,
Nepal, Netherlands, New Zealand, Nicaragua, Niger, Nigeria, Norway,
Oman
|
|
P
|
Pakistan, Papua New
Guinea, Peru, Portugal, Qatar
|
|
R
|
Republic of Korea (South
Korea), Russia
|
|
S
|
Saint Vincent and the
Grenadines, Saudi Arabia, Senegal, Serbia, Seychelles,
Singapore, Slovakia, Slovenia, Somalia, South Africa, Spain, Sri
Lanka, Sudan, Suriname, Sweden, Switzerland, Syria
|
|
T
|
Tajikistan, Thailand, The
Former Yugoslav Republic of Macedonia, Tunisia, Turkey
|
|
U
|
United Arab Emirates, United
Kingdom, United Republic of Tanzania, Uruguay, Uzbekistan
|
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V
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Venezuela, Vietnam
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Y
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Yemen
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Z
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Zimbabwe
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अमेरिका के साथ ज़ालिम देश इजराइल और आतंकवाद के साथ विश्व संसद में जो देश खड़े थे
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G
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Guatemala
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H
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Honduras
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I
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Israel
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M
|
Marshall Islands, Micronesia
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N
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Nauru
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P
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Palau
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T
|
Togo
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|
U
|
United States
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जो देश इस मुद्दे पे खामोश रहे
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A
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Antigua-Barbuda, Argentina,
Australia
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B
|
Bahamas, Benin,
Bhutan, Bosnia-Herzegovina
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|
C
|
Cameroon, Canada, Colombia,
Croatia, Czech Republic
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|
D
|
Dominican Republic
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|
E
|
Equatorial Guinea
|
|
F
|
Fiji
|
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H
|
Haiti, Hungary
|
|
J
|
Jamaica
|
|
K
|
Kiribati
|
|
L
|
Latvia, Lesotho
|
|
M
|
Malawi, Mexico
|
|
P
|
Panama, Paraguay, Philippines, Poland
|
|
R
|
Romania, Rwanda
|
|
S
|
Solomon Islands, South Sudan
|
|
T
|
Trinidad-Tobago, Tuvalu
|
|
U
|
Uganda
|
|
V
|
Vanuatu
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