Tuesday, 2 April 2024

चीन का अरुणाचल पर दावा, बदले ३० नाम। हिन्दू दहशत और भारत को लगे तगड़े झटके पर झटके।

अज़ीज़ नाज़रीन, 

भारत का ज़ालिम, दरिंदा, क़साई, दहशतगर्द सरग़ना, पनौती, वसूली भाई भलें ही बड़े बड़े दावे कर ले की ना कोई घुसा है ना घुसेगा।  लेकिन हक़ीक़त तो यह है की पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव, बंगलादेश के बाद चीन के झटके माता को भारी पढ़ रहें हैं।    

नालायक़ औलाद है की माता की फ़िक्र करने के बजाये अपने माल और हुकूमत की फ़िक्र में लगी हुई है।  जब दीमचौक पर चीन के जांबाज़ लड़ाके भारत में मज़ीद ३००० किलोमीटर अंदर तक घूस आये थे और असदुद्दीन ओवेसी जो की एक वतन परस्त सियासतदां हैं उन्होंने हुकूमत से सवाल किये उसको घेरा तो तमाम मीडिया के दरिंदे लंगूर कुत्ते बन गए।  उन्होंने भोंकना शुरू कर दिया यहाँ तक की भारतीय फ़ौज़ के आला अफसर जो मौजूदा मुलाज़मत में हैं और किनाराकश असदुद्दीन पर तख़्त तनक़ीद करने लगे।  एक अफसर ने जनाब असदुद्दीन को कुत्ते से शबाहत दे डाली थी। 

टीवी ९ का यह ज़हरीला कुत्ता जो असदुद्दीन की बसारत और ख़दशा को हक़ीर समझ कर ठिठोली कर रहा था हालात वही हो गए जिसका ज़िक्र असदुद्दीन जी ने किया था।  चीन ने उनके एक सूबे अरुणाचल पर अपना दावा ठोंक दिया है, और तमाम शुमाल-मशरिक़ (नार्थ ईस्ट) में एल.ए.सी. के साथ ३० मुख़्तलिफ़ हल्क़ों के नए नामों की चौथी फ़ेहरिस्त जारी की है।  अभी तक भारत चीन के इन इलाक़ों पर अपना दावा बताता रहा था।   वैसे भी ज़ाफ़रानी ज़ालिमों, दरिंदों, फ़िरक़ापरस्तों, दहशतगर्दों को मुस्लिम असासे लूटने और मुस्लिम नामों को तब्दील करने का बोहोत शौक़ था।  अब वही सब माता जी को सहना पड़ रहा है।  तब भी कैसी ख़मोशी है, सन्नाटा छाया हुआ है।  इस डर से कहीं राजा फ़रेब वादी झुठेन्द्र भोगी नाराज़ ना हो जाए। 

जो भारतीय फ़ौज़ के मुलाज़िम अफ़सर असदुद्दीन जी की दूरंदेशी को मामूली समझ कर हुकूमत का साथ दे रहे थे और मौजूदा राजा का बचाओ कर रहे थे दरअसल वोह फ़ौज़ के नहीं बल्कि संघ के लिए काम करते रहे होंगे।  फ़िर ऐसे फ़ौजिओं को जो मुलाज़मत में होते हुए भारत की सालमियत के बजाये हुकूमत को बचाने की हिकमत करें वोह बात बोले जो हुकूमत को मुफ़ीद लगती हो तो उसको फ़ौजी नहीं बल्कि आतंकवादी बोला जाएगा।   

जब लंगूर लँगूरनियों, भारत के अवाम और फ़ौज़ के अफसरों की असदुद्दीन साहब की जानिब मुत्तसिब ज़ेहनियत देखी और मोदी हुकूमत को बचाने की कवायत तब ही एक अवामी ख़त हिंदी में इसी ब्लॉग पर और अंग्रेज़ी में असदुद्दीन साहब को ख़िताब किया था।  उन से गुज़ारिश की थी मरने दो भारत के फ़ौजिओं को लूटने दो भारत की ज़मीन जब अवाम ख़ुद ही लूटने को तैयार है तो आप काहे को बोल कर ज़लील हो रहें हैं।  अब से भारत के ऊपर कोई भी हमला हो आप भारत के मुवाफ़ेक़त में नहीं बोलेगें।  हाँ लेकिन मुस्लिम मिल्लत पर कोई बात आये तो बोलिये पूरी शिद्दत से बोलिये अगर उसमे ज़िल्लत भी हो तो कोई फ़िक्र नहीं। 

चीन ने अपने सूबे अरुणाचल में 'मय्यारी जिगर अफयाई नामों की एक फ़ेहरिस्त जारी की. चीन ने जिन ३० इलाक़ों का नाम तब्दील किया है उनमें १२ पहाड़, चार नदियां, एक ख़लीज, एक पहाड़ी दर्रा, ११ रिहायशी इलाक़े और जमीन का एक टुकड़ा शामिल है. चीन ने इन नामों को चीनी अलफ़ाज़ में लिखा है.

२०१७ में, बीजिंग ने सूबे अरुणाचल में छह इलाक़ों के लिए स्टैंडर्डाइज्ड नामों की इब्तेदाई फ़ेहरिस्त जारी की थी।  इसके बाद २०२१ में १५ इलाक़ों वाली दूसरी फ़ेहरिस्त जारी की गई, जिसमें २०२३ में ११ ज़्यादा इलाक़ों के नाम वाली एक और फ़ेहरसित जारी की गई।  इस बीच, भारत चीनी सूबे अरुणाचल पर अपना दावा करता रहा है।  भारत ने चीन के इलाक़े को नामंज़ूर  करते हुए ज़ोर देकर कहा है कि अरुणाचल देश का अभिन्न अंग है और नाम तब्दील करने से इसकी हक़ीक़त में कोई बदलाव नहीं आता है। 

इस बीच भारत का वज़ीर ए ख़ारजा जयशंकर निहायत ही कमोज़र मिंतक़ देता है।  मेरे घर पर आप अपना नाम लिख दोगे तो थोड़ी आपके पास मालिकाना हक़ आ जाएगा।  इन ज़ालिमों, दरिंदों, नस्ल कूशी के मुजरिमों ने जैसा मुस्लिम अवाम के साथ किया मालिक उनके साथ भी वैसा ही कर रहा है। 

बाबरी मस्जिद पर कौन सा तुम्हारा हक़ था, ज्ञानवापी, मौला अली जामी मस्जिद, मथुरा जामी मस्जिद और दीगर मस्जिदों पर कौन सा तुम्हारा मालिकाना हक़ था लेकिन डाका डाल कर अदलिया के ज़ोर पर बाबरी मस्जिद हड़प  की अब माता जी की इज़्ज़त हड़प की जा रही है।  उसकी ज़मीन पर बर्छे चल रहें हैं।  माता जी का हिन्दू नाम तब्दील हो रहा है।  हम पर बिलडोज़र चलाये थे फ़ौज़ पुलिस की गोलियां हमारे लिए ही वक़्फ़ थी अब करो मुक़बाला।  नहीं तो तुम लोग बहादुरों की नहीं बल्कि हिजड़ों की फ़ौज़ हो।  जो सिर्फ़ निहत्ते, मासूम अवाम और बुर्क़ा पोश ख़ातूनों को अपनी गोली का शिकार बनाते हो।  ताके तुम्हारा दहशत का आक़ा ख़ुश रहे। 

फ़ौज़, पुलिस, अदलिया, इन्तेज़ामियाँ में रह कर जो फ़िरक़ावाराना ज़ेहनियत रखता है इन्साफ़ का क़तल करता है अपने आक़ा को खुश करने के लिए दुश्मन से जंग नहीं करता बल्कि हुकूमत की चापलूसी और बचाओ करता है वोह तो सिर्फ़ और सिर्फ़ दहशतगर्द कहलाने का हक़दार है ना की बहादुर फ़ौजी। 

इन १० सालों में दहशतगर्दों ने मुस्लिम नामों को इतना तब्दील नहीं किया होगा जितना चीन ने एक ही झटके में ३० नाम कर दिए।  मै हमेशा यही कहता आया हूँ क़दम बा क़दम स्टेप बाय स्टेप पानी है जैसा करोगे वैसा पाओगे।

। थाली मारना, अभी नहीं ।   " अब थाली मारो "।   

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...