अज़ीज़ नाज़रीन,
आज
जो चरण चुम्बक लंगूर लँगूरनियों की जमात EVM के काम को क़ाबिल ए एतेमाद बोल कर एतेबार
कर रही है और उसको खरा बता कर ऐसा ज़ाहिर कर रहें हैं की भारत की EVM कभी हैक हो ही
नहीं सकती। सूरज अपनी सिम्त तब्दील कर सकता
है लेकिन भारत के गुजरात में बनी EVM कभी हैक नहीं हो सकती है। ऐसे जाहिलों को में कहना चाहूंगा की जब अमेरिका
की पेंटागॉन की वेब साइट हैक हो जाती है, भारत के वज़ीर दाख़िला, वज़ीर ए आज़म के दफ्तर
की वेब साइट हैक हो जाती हैं, भारतीय फ़ौज की वेब साइट हैक हो जाती हैं तो EVM किस खेत
की मूली है।
इजराइल
तो भारत की दहशत का दादा अब्बा है उस इजराइल के आयरन डोम जो की आलम में सबसे ज़्यादा
मेहफ़ूज़ माना जाता था। मोसाद जो की तमाम आलम
में ज़हानत की एक मिसाल समझी जाती थी।उस इजराइल
की आयरन डोम की टेक्नोलॉजी को फलस्तीन के मुजाहिद अबू ओबेदा ने १२ साल की उम्र में
हैक कर लिया था फिर ७ अक्टूबर २०२३ को दहशत के दादा अब्बू को तोड़ फोड़ डाला चिंदे चिंदे
कर दिया।
इतना ही नहीं फ़लस्तीन के मुजाहिदों की ज़हानत के आगे मोसाद की इंटेलिजेन्स का फुग्गा ऐसे फूटा की किसी को कानो कान ख़बर नहीं हुई। अब जो फोबिया आलम की नज़रों में इजराइल की निस्बत से था सबसे ज़्यादा ज़हीन इंटेलिजेन्स सिस्टम उसकी हवा निकाल दी।
तो जब पेंटागॉन, आयरन डोम, मोसाद, भारत के वज़ीर दाखला, वज़ीर आज़म दफ़्तर की जानकारी हैक कर अपनी मालूमात फीड की जा सकती है तो EVM की क़ियों नहीं की जा सकती।
क्या लंगूर लँगूरनियाँ यह कहना चाहा रहें हैं की EVM भारत के वज़ीर ए आज़म, वज़ीर दाखाला, अमेरिका के पेंटागन, इजराइल के आयरन डोम और मोसाद से ज़्यादा मेहफ़ूज़ है जो हैक हो ही नहीं सकती या यह कहना चाहा रहें हैं की यह सभी इदारे नाकारा निक्कम्मे हैं।
अगर EVM इतनी ही मेहफ़ूज़ और क़ाबिल ए एतेमाद है और इजराइल की मोसाद और दिगर तहक़ीक़ाती इदारे भी उसके सामने फ़ैल हैं तो भारत सरकार तहफूज़ज मामलों में इजराइल से काहे को सौदा करती है। इजराइल भारत के गुजरात में बनाई गई EVM कियों नहीं अपनाता है। वहां तो बेलोट पेपर पर इन्तेख़ाब होतें हैं।
एक
थिएटर "तिरंगा" आया था, उसमे इंडिया
के वफ़ादार टेक्नोलॉजी के सइंसदाँ मिसाइल बनातें हैं। भारत के दहशतगर्द और उसका सरगना प्रलयनाथ उर्फ़ गेंडा
स्वामी उस फॉर्मूले को उन सइंसदानों को अगवाह कर हासिल कर लेते हैं। और इंडिया के ग़द्दार भारत के आतंकवादी अपनी खुद
की मिसाइल बना लेते हैं। इंडिया के उस ग़द्दार
भारत के आतंकवादी प्रलयनाथ की पूरी फ़ौज तैयार हो जाती है दरअसल वोह एक मोहरा होता है
विलायत में बैठे उसके आक़ा के हुकुम पर इंडिया में तबाही और क़त्ल ए आम मचाना चाहता है। वोह विलायती इंडिया को फिर से ग़ुलाम बनाना चाहता
था।
प्रलयनाथ
मिसाइल बना कर उसको १५ अगस्त को फायर करने वाला था उलटी गिनती भी शुरू हो गई लेकिन
सही वक़्त पर इंडिया की वफ़ादार फ़ौज के ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह आ कर मिसाइल के तमाम
कनेक्शन काट डालतें हैं और जिस जगह इंडिया के वफ़ादार सियसतदाँ तिरंगे की परचम कुशाई
करने वाले थे और लाखों की तादाद में अवाम आज़ादी के जश्न को देखने आया था उस जगह मिसाइल
फायर ही नहीं हो पाती है।
दरअसल
यह तमाम खेल इंडिया का दुशमन ग़द्दार दहशतगर्द प्रलयनाथ करवा रहा था जो की विलायत में
बैठे इंडिया के दुश्मन का मोहरा था। वोह इंडिया
में तबाही मचाना चाहता था।
कूल मिला कर मुद्दे का निचोड़ और नतीजा यह निकल कर आता है की जब फ़ौज, पेंटागन मोसाद आयरन डोम वज़ीर ए आज़म वज़ीर दाख़िला की पोशीदा जानकारी हैक हो सकती हैं तो EVM कियों नहीं हो सकती बिलकुल हो सकती है। इस जदीद तकनीक में कोई भी इंसान दावा नहीं कर सकता की उसकी बनाई हुए चीज़ १००% मेहफ़ूज़ है। ख़ास कर जिस चीज़ में माइक्रो चिप या इंटीग्रेटेड सर्किट लगा होता है जो कंप्यूटर से ऑपरेट होता है वोह तो बड़ी आसानी से हैक हो जाती हैं।
आज
के दौर में टेक्नोलॉजी इतनी जदीद हो गई है की केल्क्युलेटर, मोबाइल, कंप्यूटर तमाम बर्क़ी शे (इलेक्ट्रिक आइटम) हैक हो जातें हैं
तो EVM क्या चीज़ है। बिलकुल हैक हो सकती है।
सहाफ़ी
ज़ुबेर की पेशकश