Monday, 4 December 2023

मेहफ़ूज़ रहा ला इलाहा इल्लाह का क़िला।

अज़ीज़ नाज़रीन,

सबसे पहले तो पुराने हैदराबाद की अवाम को तहे दिल से शुक्रिया अदा करूंगा की उन्होंने मुजाहिदों के साथ शाना बा शाना हक़ और बातिल की इस जंग में हिस्सा लिया और मजलिस के मुजाहिदों को फतहयाब करवाया।  यह है ईमान का आला दर्जा।  काफ़िर, शैतान, दहशत, ज़ाफ़रान और हैवान लाख ईमान वाले मुजाहिद को ख़तम करना चाहें जब तक उस मुजाहिद के चिराग़ को अल्लाह ईमान के ईंधन से सरफ़रोज़ करता रहेगा दुनियां का कितना ही बड़ा दरिंदा, ज़ालिम, फ़िरों, हिटलर या नोयान आ जाए मुजाहिदों का ज़र्रा भर भी नुकसान नहीं कर सकता। 

लंगूर और लँगूरनियों की जमात ने तो पूरी जश्न की तैयारी कर ली थी की इस बार मजलिस को शाकिस्त हो कर रहेगी।  ख़ास इन ज़ालिम दरिंदों चिड़ियाघर के खूंखार जानवरों की दुश्मनी सिर्फ़ और सिर्फ़ अकबर नाम से है।  तभी अज़ान से इन लंगूरों ज़ालिमों शिद्दत पसंदों को इतनी ईज़ा पहुँचती है।  कियोंके अल्लाह के नाम के साथ अकबर जुड़ा हुआ है।   यह लंगूर फटाके भी ले आये थे की इधर मजलिस की शाकिस्त होगी हम ज़हरीले मज़मून शाया करना शुरू कर देंगें।  जिसमे होगी भगवा फ़ौजिओं की हौसला अफ़ज़ाई और ओवेसी ब्रदर्स की रूसवाई।  लेकिन अब अपनी उधड़ी (विधूड़ी) हुए पिछवाड़े को पेवंद लगाते बैठे हैं। 

एक बात तो है कांग्रेस की इस तरह की हालात के लिए वोह ख़ुद ही ज़िम्मेदार है।  ओवेसी और मजलिस पर ग़ैर ज़रूरी तनक़ीद झूठे इलज़ाम वर्ना सभी एग्जिट पोल में कांग्रेस की बेहतर पोजीशन दिखाई गई थी।छत्तीसगढ़ और राजिस्थान में तो हुकूमत बनाने की बात हो रही थी।  लेकिन इन कॉंग्रेसिओं ने इन्तेख़ाब में बजाये ज़ाफ़रानी दरिंदों के ख़ूब असदुद्दीन और मजलिस को कोसा था।  लंगूर लँगूरनियाँ हैं की एक ही बात हर बार पूछतें हैं आप बीजेपी की “बी” टीम हैं।  अब बोलो राहुल गाँधी छत्तीसगढ़ में तो मजलिस ने एक भी नुमाइंदा खड़ा नहीं किया था और १० सीट राजिस्थान में ४ मध्य प्रदेश में फिर भगवा तंज़ीम कैसे इतनी बड़ी जीत हासिल कर गई। 

नाज़रीन मजलिस या असदुद्दीन नहीं बल्कि दो चीज़ें हैं जो भारत में इन्तेख़ाब को मुत्तासिर कर ज़ाफ़रानी तंज़ीम के लिए जीत का परचम लहरा रही है। 

या तो अक्सरियत (हिन्दू) अवाम के ज़ेहन पर भगवा ज़हर के वाइरस ने शदीद हमला कर के उनको ज़हरीला और बीमार बना दिया है या फिर EVM में जैसा चाहती है बीजेपी नतीजे फीड अप कर देती है।  ताज़ा नतीजे सबूत हैं ज़हर या भगवा वाइरस हिन्दू अवाम के ज़ेहन पर कैसे असर कर गया। 

शुरूवाती रूझानों में जब तक पोस्टल बेलोट की काउंटिंग हो रही थी तब तक हर ख़ित्ते में कांग्रेस आगे थी।   जैसे ही मशीनें खुली के कांग्रेस का जनाज़ा निकलना शुरू हो गया।  अगर तिलिंगाना में कांग्रेस जीती है तो उसका पूरा क्रेडिट मजलिस असदुद्दीन और के.सी.आर. की माज़ी की हुकूमत को देना होगा।  जिनका उसूल है आज़ाद और मुंसिफ़ाना इन्तेख़ाब।  भगवा वाइरस और ज़हर जुनूब में भी घुसने की ख़ूब कोशिश कर रहा है और अपनी मर्ज़ी के दहशतगर्द ज़ेहनियत चड्डी धारी आला ओहदेदारों को क़ाबिज़ करना चाहता है लेकिन अभी तक उसको कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है। 

जो लंगूर लँगूरनियाँ  भगवा ज़हर की जीत में कोई भी धांधली नहीं हुई उसका बचाओ करते हुए कर्नाटक में कांग्रेस की जीत को बता रहें हैं।  कर्नाटक कांटे में छोटी मछली को फंसा कर बड़ी मछली पकड़ने की हिकमत थी।  अगर भगवा ज़हर कर्नाटक जीत जाते फिर यह तीनों सूबे तो हर कोई सवाल करता और होती फजीती, इसलिए कर्नाटक जाने दिया उस एक सूबे को दे कर तीन सूबे ले लिए।    

कियोंके तमाम सूबों में सख़्त ज़ाफ़रानी वायरस मुखालिफ हवा थी।   जिस मध्य प्रदेश में १६२ सीटें आई उसी जगह से शिवराज के १२ वज़ीर हार कैसे जातें हैं।  यहाँ तक की सूबे का ख़ास वज़ीर ए दाखला नरोत्तम मिश्रा दतिया से हार गया।  सब कुछ गोल माल है।  अगर इतना ही मक़बूल था ज़ाफ़रानी ज़हर तो उसके १२ वज़ीर कैसे हार गए। 

तिलिंगाना में मुखालिफ हवा थी तो वज़ीर ए आला हारे तो कांग्रेस आई फिर वही फॉर्मूला मध्य प्रदेश में कियों नहीं चला यहाँ १२ वज़ीर हारे वज़ीर ए दाखला हारा लेकिन तंज़ीम ज़ाफ़रानी जीत कर आई। 

ख़ैर जो कुछ भी हो भारत में अगर मुस्लिम अवाम को इस ज़ाफ़रानी ज़हर और वाइरस के हमले से बचना है तो मोदी इन्तेज़ामियाँ से एक वफंद मिले और उनसे कश्मीर के जैसे ३७० की तर्ज़ पर ख़ुदमुख़्तार मुस्लिम सूबे के बारे में बात करे।   कियोंके आहिस्ता आहिस्ता भगवा वाइरस हिन्दू अवाम को उस हद तक मुत्तासिर कर रहा है की मुस्लिम नुमाइंदगी अब किसी हिन्दू को क़ुबूल नहीं है। 

तिलिंगाना में सिवाए मजलिस के ७ नुमाइंदों के जीत के अलावा एक भी नहीं जीत पाया।  फिर मध्य प्रदेश में सिर्फ़ दो राजिस्थान में चार छत्तीसगढ़ में एक भी नहीं।  इससे पहले की मुस्लिम पूरी तरह से एक तरफ कर दिए जाएँ उनको अपने हुक़ूक़ के बारे में मरकज़ में इन्तेख़ाब से क़ब्ल मोदी से बात करनी होगी।  और शर्तों पर प्री पोल अलायंस करना होगा।   उस वफंद में ज़मीर फ़रोश बीजेपी के एजेंट और मीडिया के सामने आ कर अपने चहरे को दिखाने वाले हरगिज़ ना हों।  बल्कि जो मिल्लत का दर्द समझता है और आगे के हालात से वाक़िफ़ है काम करने पर यक़ीन रखता है ऐसे शख़्स की क़ियादत में मिला जाए।  उसके बाद कोई मीडिया ब्रीफिंग ना दी जाए।  जब काम हो जाएगा तब सब को पता चल जाएगा। 

मालदीव एक छोटा सा जज़ीरा है लेकिन वहां इन्तेख़ाब से क़ब्ल जो मोहम्मद माइज़्ज़ो ने जीत ही उसी मुद्दे पर हासिल की थी अगर वोह जीत कर आये तो भारत की फौज को वतन से बहार निकालेगें।   अब मोदी ने उनकी बात मान कर उस पर अमल करने का फेलसा लिया है और भारत की फौज मालदीव से वापिस होगी। 

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...