अज़ीज़ नाज़रीन,
भारत
और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्तों में खटास आना शुरू तब से हुई थी जब तालिबान के इस्लामिक
जंगजूओं ने अफगानिस्तान की ज़मीन से अमेरिका, भारत की दहशत को उखाड़ फेंकने के बाद इस्लामिक
शरिया क़ानून नाफ़िज़ कर दिया था। ताहम, भारत
और अफगानिस्तान सरकार के दरमियान मज़ीद रिश्ते कशीदा हो गए जब ज़ाफ़रानी हुकूमत के तहत
भारत ने अफगानिस्तान के इस्लामिक जमुहरिया की हुकूमत के सिफ़ारत-ख़ाने को ताऊन नहीं किया।
इसलिए तालिबान ने भारत से ख़ारजा तालुक़्क़ात ख़तम करने का एलान कर दिया और नई दिल्ली में
अफगानिस्तान सिफ़ारत-ख़ाने में काम करने वाले तमाम सफ़ीरों को वापस बुला लिया।
अगस्त २०२१ में तालिबान हुकूमत बनने के बाद भारत ने पहले ही काबुल से अपने सिफ़ारत-ख़ाने के सभी मुलाज़िमों को वापस बुला लिया था। हालाँकि, सफ़ीर फरीद मामुदजे लगातार नई दिल्ली में काम करते रहे जिनको साबिक़ सदर अशरफ गनी ने मुक़र्रर किया था। जो भारत में वीज़ा जारी करने और कारोबारी मामलों के फ़राइज़ को अंजाम दे रहे थे। अब तालिबान हुकूमत ने भारत में अफगानिस्तान मिशन को बंद करने का ऐलान किया है. क्या यह तालिबान की ओर से कश्मीर मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ एलान ए जंग का इशारा है।
नाज़रीन
वाज़े रहे की फ़रवरी २०२३ के अपने बजेट में भारत ने तालिबान को २०० करोड़ की मदद फ़राहम
की थी। जब रिश्तों में इतनी खटास थी और भारत
का सिफ़ारत-ख़ाना कबूल में बंद हो चूका था तो इतनी बड़ी रक़म भारत ने किस तंज़ीम को दी थी
और उसका मक़सद किया था। क्या भारत अपने पड़ोस
में दहशत की पनाहगाह को क़ायम रखना चाहता था।
क्या भारत ने वोह रक़म तालिबान के नाम पर दहशतगर्द तंज़ीमों को या भारत के अपने
मफ़ात को क़ायम रखने के लिए दी गई थी। पाकिस्तान
की सरज़मीन पर ख़ून की होली खेलने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत भारत की रॉ पर इलज़ाम लगा
रही है। २०० करोड़ की इमदादी रक़म की हक़ीक़त क्या
है। वोह पैसा किधर गया जब्कि भारत अपने ही अवाम अक़लियती वज़ारत ख़ाने का बजट ४० फीसद कम कर चूका
है। ऐसी कौन सी हंगामी सूरत ए हाल थी जिसकी
वजह से २०० करोड़ की इतनी बड़ी रक़म का एहतेमाम भारत की जानिब से किया गया।
हाल ही में भारत के दो मुस्लिम वालिद और बेटा पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान सरहद से दरअंदाज़ी करते हुए पकडे गए हैं। पकडे जाने के बाद उन दोनों मुनाफ़िक़ों ने भारत की आबरू रेज़ी करना शुरू कर दी। और अदना दर्जे की ज़लालत पर उतर आये। भले ही हमें जेल भेज दो लेकिन हम भारत में नहीं जायेगें, उन दोनों वालिद और फ़रज़न्द ने भारत में बिलडोज़र इंसाफ़, मुस्लिम अवाम का क़त्ल ए आम, नाइंसाफ़ी, वग़ैरा को पाकिस्तान में रहने के लिए अपने बचाओ में कहा । उन दोनों के ऊपर शक की सूई मज़ीद गहराती जा रही है कियोंके अगर उनके साथ भारत में ज़ुल्म हो रहा था तो क़ानूनी दस्तावेज़ ले कर आना चाहिए था। अफ़ग़ानिस्तान सरहद से घुसपैठ करने की कोई वजह समझ में नहीं आती। क्या वोह भारत के जासूस और रॉ के एजेंट हैं।
नाज़रीन
कुलभूषण जादव याद है उसने अपना नाम सलमान बताया था और एक ताजिर की हैसियत से पाकिस्तान
में घुसा था। उसके पास भी कोई दस्तावेज़ मौजूद
नहीं थे। उसकी गिरफ्तारी के बाद मज़ीद तीन भारत
सरकार के एजेंट गिरफ्तार हुए जो मुस्लिम नाम से पाकिस्तान में रह रहे थे।
१
अक्टूबर से अफगानिस्तान ने भारत के साथ अपने मिशन और तमाम कामकाज बंद करने का एलान
किया है। सफ़ीर का कहना है कि भारत सरकार से ताऊन की कमी की वजह से अफगानिस्तान के हित
बुरी तरह मुत्तासिर हुए हैं, इसलिए हमने नई दिल्ली में सफ़रातख़ाना बंद कर दिया है। आगे
कहा गया है कि सफ़ीर को मेजबान भारत से मदद नहीं मिल रही है, इसलिए हमें काम करने में
अड़चन आ रही है।
ऐसी
ही तवक़्क़ो थी, भारत के रिश्ते आलमी बरादरी पर खराब हो जायेंगे क्योंकि मोदी सरकार ज़ाफ़रानी
भारत पर काम कर रही है. (हिन्दू राष्ट्र) मोदी सरकार के आने बाद ना सिर्फ हमसायों बल्कि
आलमी बरादरी से भी रिश्ते सबसे खराब हो गए हैं। मौजूदा सूरत ए हाल भारत में हिंदू तालिबान
की तरह है। दूसरे, भारत की ख़ारजा हिकमत ए अमली को आलमी बरादरी की हिमायत हासिल नहीं
है। ज़ाफ़रानी तालिबान के भारत की हुकूमत पर
क़ब्ज़ा करने के बाद कनाडा, अमेरिका, रूस, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, अफगानिस्तान, सऊदी
अरब, तुर्की, मलेशिया, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के रिश्तों में खटास आई
है और सबसे निचली पायदान पर पहुंच गए हैं। चूंकि भारत इसे हिंदू राष्ट्र घोषित करने
के लिए ज़ाफ़रानी शिद्दतपसनदी पर अमल पेरा है।
ख़ैर
भारत की हिंदू तालिबान की मोदी सरकार के लिए कुछ और कड़वी गोलियों की तवक़्क़ो है। अब
अरब मुमालिक भारत को लाल आंखें दिखाएगा। पिछले हफ्ते सऊदी अरब में भारत और दिगर मुमालिकों
में मुसलमानों की बदतरीन हालात को लेकर सभी मुस्लिम मुमालकों का एक इजलास मुनक़्क़िद
किया गया था। जिसमे भारत समेत इस्लाम, मुसलमानों के दुश्मन उन तमाम मुमालिकों को सऊदी
अरब ने सख़्त वार्निंग दी है जो मुसलमानों पर ज़ुल्म और तशद्दुत करतें हैं। सऊदी अरब ने मुसलमानों और इस्लाम के दुश्मनों को
वाज़े अलफ़ाज़ में कहा है अगर हमारी इंतेबाह को अनदेखा किया गया तो हमारी जानिब से एलान
ए जंग है।
सहाफ़ी ज़ुबेर की पेशकश