अज़ीज़ हमवतन साथियों और मुस्लिम अवाम,
जिस हिसाब से ज़ाफ़रानी ताजिर और ग़द्दार ए वतन बीजेपी, संघी और शिद्दत की जमात बीजेपी २०२४ से क़ब्ल गाहे बगाहे पाकिस्तान, जिन्ना, मुग़ल, हिन्दू-मुस्लिम, बाबरी, कश्मीर ३७० जैसे मुद्दे हर इन्तेख़ाब से क़ब्ल करती रहती थी। इस इन्तेख़ाब में भी हर मुख़ालिफ़ जो ज़ाफ़रानी तंज़ीम से १० सालों का हिसाब मागेगा उसको पाकिस्तान, जिन्ना, मुग़ल और हिन्दू मुस्लिम में उलझा कर रखा जाएगा। मुख़ालिफ़ तंज़ीमे भाड़े के टट्टू लंगूर और लँगूरनियों से ख़ौफ़ ज़दा हो कर ज़ाफ़रानी तंज़ीम के उस ब्रह्मास्त्र का दिफ़ा अपने आपको भारत का वफ़ादार पाकिस्तान का दुश्मन बोल कर लंगूर और लँगूरनियों के सामने सजदा रेज़ होते नज़र आयेगें।
इस गहमा गहमी में सबसे क़ब्ल तो मुस्लिम नुमाइंदे ख़ास मजलिस के रकून लंगूर और लँगूरनियों के हाशिये पर होंगे। जिस तंज़ीम ने इन १० सालों में ज़ाफ़रानी ताजिरों पर जितने तीखे हमले किये थे उतने ही बदले लंगूर लँगूरनियाँ उस तंज़ीम के नुमाइंदों से लेंगी।
१९४७ के बाद मुसलमानों को पाकिस्तानी और जिन्ना के वारिस जैसे अलफ़ाज़ से बोहोत रंजीदा किया गया। हर ख़ित्ते हर महाज़ में उनको नाइंसाफी ही हाथ लगी। नाइंसाफी अवाम के ज़ेहन में अलहदा पसंदी पैदा करती है और मुतावातिर अलहदा पसंदी तक़सीम को पैदा करती है। १४ अगस्त १९४७ भारत को आज़ादी नसीब हुई जो मुसलमान पाकिस्तानी मुवाफ़िक़ थे वो पाकिस्तान चले गए लेकिन जो सच्चे भारतीय थे उनको भारत के अंदर रहने में ही अपनी फलाह और कामयाबी नज़र आई, वोह भारत में ही रहे। लेकिन उन बचे कूचे मुसलमानों को हर ख़ित्ते हर हल्क़े में पाकिस्तानी बोल कर नज़र अंदाज़ी के ज़हर का प्याला पीना पड़ा और पाकिस्तानी लक़ब से मुख़ातिब कर ज़ाफ़रानी और शिद्दत पसंद हिन्दू अवाम के सांप के डंस को बर्दाश्त करना पड़ा।
फिर आज तक अकसरियत अवाम ने मुसलमानों को भारतीय तस्लीम ही किधर किया है। हर मुसलमान के अंदर उनको पाकिस्तानी नज़र आता है। जहाँ कोई भी दाढ़ी वाला या नक़ाब पोश ख़ातून दिखी के अकसरियत अवाम के अंदर के वतन परस्ती का कीड़ा कुलबुलाने लगता है। तो जब तुमने हमको पाकिस्तानी ही बना डाला तो हम भी तस्लीम करतें हैं हम पाकिस्तानी हैं।
लेकिन एक बोहोत ही एहम बात २०१४ के ग़ुलाम भारत में देखने
में आई है वोह यह है की अब ना सिर्फ मुसलमान बल्कि हर वोह तंज़ीम पाकिस्तानी है जो अंग्रेज़ों
के ग़ुलामों से सवाल करती है हर वोह शख़्स जिन्ना का पैरोकार हो जाता है जो मोदी को हाशिये
पर लेता है। हर वोह शख़्स दहशतगर्द हो जाता
है जो बोहोत ही आतिशी सवाल हुकूमत से करता है हर वोह शख़्स ग़द्दार हो जाता है जो धरना
वग़ैरा और बिस्तर ए मर्ग पर आख़िर साँसे लेती हुई जमहूरियत को तक़वियत फ़राहम करने की कोशिश
करता है।
इन १० सालों की ग़ुलामी में भारत के हर अवाम ने ज़ुल्म अज़ीयत और तकलीफ बर्दाश्त कर ली है। ना सिर्फ़ मुस्लिम अवाम बल्कि हिन्दू भी इस ग़ुलामी से आजिज़ आ चुके हैं। बल्कि अब तो बोहोत से ज़ाफ़रानी तंज़ीम और संघ के नुमाइंदे भी इस ग़ुलामी के खिलाफ दबे अलफ़ाज़ में बोलने लगें हैं।
तमाम अवाम को इस बात का इल्म हो चूका है इन १० सालों में हुकूमत ने कुछ भी फ़लाही काम नहीं किये हैं। और हर इन्तेख़ाब से क़ब्ल लंगूर लँगूरनियों की मदद से ख़ूब हिन्दू मुस्लिम हिदुस्तान पाकिस्तान के नाम पर ज़हर भरा है। नतीजा यह हुआ की भारत तक़सीम के बाब पर आ गया है।
में गुज़ारिश करूंगा हर सियासी तंज़ीम के नुमाइंदों से अगर लंगूर और लँगूरनियाँ या ज़ाफ़रानी तंज़ीम के ज़ालिम किसी भी मुबाहसे में पाकिस्तान जिन्ना का नाम ले कर मुख़ालिफ़ों के ऊपर हमला करें तो डंके की चोट पर कहना चाहिए हाँ में पाकिस्तानी हूँ। करो क्या करते मेरा।
ख़ास मजलिस के नुमाइंदों और असद साहब से गुज़ारिश करूंगा
जिनको और उनकी क़ौम के हर अवाम को अपनी वफादारी का सबूत १९४७ से आज तक देना पड़ रहा है। अगर कोई भी बीजेपी का नुमाइंदा जिन्ना होने का या
पाकिस्तानी मुवाफ़िक़ होने का इलज़ाम लगाता है तो बजाये दिफ़ा करने के की हमने तो जिन्ना
के पैग़ाम को ठुकराया, हम बाय चांस नही बल्कि बाय चॉइस भारतीय हैं। ऐसे फ़लसफ़े उन सरकारी और सियासी नुमाइंदों को मुफीद लगेगें जो हक़ पसंद होंगे। ज़ाफ़रानी दहशतगर्दों को ऐसे फ़लसफ़े बेहूदा और हंसी
में उड़ाने वाले लगेगें।
असद साहब अब खुल कर कहिये हाँ में पाकिस्तानी हूँ क्या
करते मेरा। जिन अवाम को आपकी हिंदुस्तान से
वफ़ादारी पर यक़ीन हैं वोह आपको और आपकी तंज़ीम को ही वोट देंगें। जिनको यक़ीन नहीं है आप जलते हुए अंगारों पर चल कर
आतिशी इम्तेहान (अग्नि परीक्षा) दे कर भी आ जाओ और बोलो की में भारतीय हूँ में सती
सावित्री हूँ मेने कोई गुनाह नहीं किया तब भी आपके ऊपर यक़ीन नहीं किया जाएगा और आपको
पाकिस्तान भेजने की बातें की जायेगीं।
इन लंगूर लँगूरनियों से हरगिज़ ख़ौफ़ज़दा होने की ज़रुरत नहीं
है। इनकी औक़ात चंद टकों में बिकने वाली तवाइफ़ों
जैसी है। इंसान ईमानदार हक़पसन्द इंसान से ख़ौफ़ज़दा
होता है। ख़्वाह वोह सरकारी हो या ग़ैर सरकारी
मुलाज़िम। कियोंके इंसान जानता है जो ईमानदार
है हक़ पसंद है उसके किरदार का सौदा दुनियां की बड़ी से बड़ी सल्तनत नहीं कर सकती फिर
वोह हक़ पर मब्नी फैसले ही करेगा। और जो बदकिरदार
है बदचलन बेईमान है वोह तो टके पर अपना ईमान फरोख्त कर देगा।
बीजेपी इन्तेख़ाब को मुत्तासिर करने के लिए हर क़िस्म के दंड फंद उधम बाज़ी करेगी बिल आख़िर जंग में पाकिस्तान मुसलमान मुग़ल कश्मीर मज़हब राम बाबर सब आयेगें हर हाल में आयेगें। बीजेपी के पास मुद्दों पर इन्तेख़ाब जीतने की एक भी वजह नहीं है। सिर्फ़ ज़हन को ज़हरीला कर के जीत सकतें हैं। हिन्दू अक़लियत हो जाएगा मुस्लिम ग़ालिब हो जायेगें। पाकिस्तान भारत को ग़ुलाम बना लेगा। तो हिकमत यह है ऐसे बेहूदा बातों पर बजाये दिफ़ा कर अपना बचाओ करने के बोलना होगा अब जो होना है वोह तो हो कर रहेगा। १० सालों में आपने कौन सा रोक लिया चाइना क़ब्ज़ा कर के बैठा है। मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड अपनी अलहदा पहचान मानते हैं और आप हैं की पाकिस्तान पाकिस्तान खेल रहे हो।
आपके अपने जो वोट हैं वोह कहीं नहीं जाते जो फ्लोटिंग वोट हैं वोह बीजेपी से बर्गश्ता हैं। आगे आपकी मर्ज़ी
सहाफ़ी ज़ुबेर