अज़ीज़ नाज़रीन,
जैसे जैसे इंतेख़ाब नज़दीक आ रहें हैं क़ौम के ग़द्दार अमजद अली जैसे जुम्मन कीड़े तेज़ी से बहार निकल रहें हैं और मौजूदा अर्तागुल ग़ाज़ी के किरदार कूशी में आगे हुए हैं। यही जुम्मन दरअसल मौजूदा सलेबियों (बीजेपी, संघी दहशत) के पालतू जानवर हैं। हर मुद्दे पर अपनी ही क़ौम के मुजाहिद को ग़लत बात पर घेरना। एक बार भी इन जुम्मानों को बीजेपी मोदी अमित शाह, संघ दहशत, या कट्टरपंथी काफ़िरों के खिलाफ बोलते हुए नहीं सुना गया। जब मुँह खोलेगा तो मजलिस के ख़िलाफ़ ज़हर अंगेशी करता हुआ पाया जायेगा। मर्कज़ में किस की हुकूमत है, उत्तर परदेश में किस की हुकूमत है। मध्य प्रदेश में किस की हुकूमत है फिर मजलिस और असदुद्दीन किसी भी सरकारी गफलत के लिए कैसे ज़िम्मेदार हो जातें हैं।
नाज़रीन जैसा की सुलेमान शाह की
सल्तनत के अंदर मिल्लत का एक ग़द्दार छुपा हुआ था वोह दिखाता तो ऐसे था की मिल्लत का
बोहोत ही वफ़ादार है दरअसल वोह सलेबियों का पालतू था। सुलेमान शाह और अर्तागुल ग़ाज़ी
की सलतनत को कमज़ोर कर के ख़ुद क़ाबिज़ होना चाहता था। बल्कि उसने अपनी साजिशों से मिल्लत का बोहोत नुकसान
किया और भाई तुर्गुत को ज़हर का इंजेक्शन देता रहता था ताके वोह मुकम्मल शिफ़ायाब ना
हो पाएं और अर्तागुल ग़ाज़ी की फौज कमज़ोर होती जाए।
फिर उसने साजिश कर के सुलेमान शाह के मसनद पर क़ाबिज़ हो ही गया लेकिन उसकी यह
खुशी ज़्यादा दिन तक की नहीं थी और अल्लाह को कुछ और ही मंज़ूर था। उसको बीच चौराहे पर मिल्लत और क़बीले के साथ ग़द्दारी
का जिरगे में जुर्म साबित होने पर अर्तागुल ग़ाज़ी ने ज़िबाह कर दिया।
मौजूदा दौर में सलेबियों की जगह ले ली है ज़ाफ़रानी ज़ालिमों ने और कुर्तुगुलू की जगह ले ली है MBT का अमजद अली जैसे गद्दारों ने जो एक नहीं मिल्लत में भरे पड़े हैं।
इन जैसे तमाम ग़द्दार ऐ क़ौम, मुनाफ़िक़ों को जल्द ही सज़ा मिलेगी। नाज़रीन हरगिज़ हरगिज़ इस अमजद अली जैसे गद्दारों की बातों और साजिश का शिकार ना हों। यह लोग दरअसल मौजूदा सलेबियों (बीजेपी, संघ, कट्टरपंथी काफिरों) के एजेंट हैं। यह लोग नहीं चाहते के असदुद्दीन और मजलिस जैसे जुझारू तंज़ीम ऐवांन में पहुंच पाए ताके मुस्लिम हक़ की आवाज़ कोई उठाने वाला ही ना हो।
दिल खोल कर इस बार मजलिस को वोट दें। जिस हिसाब से मुस्लिम अवाम के दिलों दिमाग़ में झूटी और फरेबी बातों पर इंतेख़ाब से क़ब्ल जुम्मन शक और शुकूक डालतें हैं सवाल असदुद्दीन से करतें हैं मजलिस को कोसते हैं उतने शिद्दत से बीजेपी और मोदी से सवाल करने में इनको किस बात का ख़ौफ़ लगता है। ज़रा हुकूमत से उसकी गफलत पर भी सवाल कर लो। नहीं करेगें कियोंके यह लोग पालतू हैं और इनका पेट ही बीजपी संघ के पैसे पर भरता है। तंज़ीम MBT और दीगर वोट कटुआ क़ौम के गद्दारों से होशियार रहें।
नाज़रीन एक बात वाज़े है की इंतेख़ाब के वक़्त जितनी भी MBT जैसी अदना तंज़ीमें मजलिस की मुख़ालिफ़ बन कर आती हैं वोह सब गीदड़ की मानिंद हैं जो ख़ुद तो शिकार करता नहीं बल्कि शेर से बचे हुए शिकार और सड़े गले गोश्त पर ज़िंदा रहता हैं। खुद एक भी सीट नहीं जीत सकती मगर मजलिस की मुख़ालिफ़ बन कर उसके वोट ज़रूर काटेंगे। ऐसी तंज़ीमें और ऐसे ज़मीर फरोश जुम्मन पैसे दे कर खड़े किये जातें हैं। अगर इतनी ही क़ौम और मिल्लत की हमदर्दी है तो बोलो मोदी के ख़िलाफ़ बोलो हिन्दू दहशत के ख़िलाफ़ बोलो बीजेपी के ख़िलाफ़। तुम उस ही के ख़िलाफ़ बोलोगे जो मिल्लत का दर्द अपनाता है जो ऐवांन में हर मुस्लिम मसले पर हुकूमत को घेरता है।
जुम्मन क़ौम और मिल्लत के दुश्मन मोदी भक्त २०२४ को देखते हुए मोदी भक्ति और हुकूमत की चाटुकारिता में लग गए हैं। बीजेपी और मोदी ना जाने किन किस दाढ़ी वालों को मुस्लिम अक्सरियत वाले सूबों जैसे वेस्ट बंगाल, केरला, बिहार, शूमल में बुला कर मुस्लिम नौजवानों के दिलों दिमाग़ में मोदी की हमदर्दी डालने की कोशिश कर रहें हैं। फिर सरकारी नौकरी देने की लोलीपोप मोदी भक्ति के ऐसे वीडियो तमाम उम्मत में शेयर किये जातें है। मिल्लत के नवजवानों को फौज में भर्ती होने की सीख देना, दुख्तराने मिल्लत को हिजाब के अंदर फौज में अलहदा महकमे की जानकारी देना जिसमे बच्चिओं को तालीम सिर्फ़ ख़ातून ही देंगी। काहे को मुस्लिम काफिरों की ज़मीन के लिए अपने आपको शहीद करवाए। उनको क्या मिलेगा। मुस्लिम नवजवानों और बच्चिओं को अपने हक़ के लिए इस्लामिक ममलेकत क़ायम करने के लिए शहीद होने का जज़्बा होना चाहिए। फिर १९४७ के बाद पाकिस्तान से जंग करते हुए जो भी मुस्लिम शहीद हुए उनकी नस्लों के साथ आज क्या हो रहा है।
१.
उनको झूठे इलाज़म में हूजुमी दहशत और एनकाउटर में क़त्ल किया जा रहा है।
२.
उनकी मस्जिदे गसप की जा रही हैं, उनके मज़हबी अक़ीदे पर हमले हो रहे हैं।
३.
उनको हर जगह तीसरे और चौथे दर्जे पर फ़ाइज़ किया जा रहा है।
४.
उनकी हक़तल्फ़ी की जा रही है,
५.
उनके साथ नाइंसाफी हो रही है,
सहाफ़ी ज़ुबेर