Monday, 3 April 2023

ज़हानत, फ़ज़ीलत किसी की ग़ुलाम नहीं होती।

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Wisdom and excellence is not slave of anyone. 

https://autojourna.wordpress.com/2023/04/03/wisdom-and-excellence-is-not-slave-of-anyone/ 

अज़ीज़ क़ौम के बच्चे और बच्चियों,  पंचर पुत्रों ने किया कमाल।

आज कल मआशरे में अब्दुल के फ़रज़न्दों को बदनाम किया जाता है की वोह पंचर पुत्र हैं लेकिन गुफ़ा, पेशाब पख़ाना पुत्रों को मालिक ऐ कायनात हर ख़ित्ते हर महाज़ में बदनाम और रूसवा कर रहा है वहीँ अब्दुल के बच्चों पंचर पुत्रों को शोहरत इज़्ज़त और इल्म की रौशनी से सरफ़राज़ कर रहा है। 

नाज़रीन अब सिलसिलेवार जिन अब्दुल फरज़ादों ने इल्म, ज़हानत, फ़लसफ़े (क़ानून), खेल में बेहतर कारगरदेगी की है उनको पेश करता हूँ। 

१.          मोहम्मद तल्हा ख़ान: नाज़रीन तल्हा बिज़नेस मैनेजमेंट में मास्टर्स कर रहें हैं।  और उनको इल्म के शोबे में बेहतर कारगरदेगी की वजह से इनाम मिला है। 

२.         मोहम्मद समी काज़ी: नाज़रीन मुहम्मद समी १२ साल के तालिबे इल्म हैं वोह ८ जमात में सेंट थॉमस बेथानी कान्वेंट स्कूल में पड़ रहें हैं। उनको एबेकस मैथमेटिक्स सवालात हल करने पर २०२३ में नेशनल लेवल पर १०० में से १०० मार्क्स मिले हैं। उनसे आगे कोई भी गुफ़ा पुत्र नहीं जा सका।  मुहम्मद समी क़ाज़ी बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में होशियार हैं।  २०१९ में ६वी जमात में उनको क़ौमी तराने पर बेहतरीन कारगरदेगी करने पर तमाम स्कूल में सफ़े अव्वल नंबर पर आये थे।   २०२३ को साइंस क्विज़ कॉम्पिटिशन में वोह दूसरा नम्बर ले कर आये।    



३.         मोहम्मद फसीह : फसी फादर एंगल ला कॉलेज से क़ानून की पढ़ाई कर रहें हैं।   उनकी कारगर्दगी फ़लसफ़े और हाज़री जवाबी से क़ानून के माहरीन भी काफी मुतास्सिर हैं।  उन्होंने कॉलेज के मूट कोर्ट में फ़ज़ीलत हासिल की और उनको तमग़ा ऐ एजाज़ से नवाज़ा गया।  


४.          मोहम्मद फ़ैज़ान:  फ़ैज़ान ने १०स्वी जामात का इम्तेहान दिया है। उन्होंने अपनी टीम को वाली बॉल में लीड किया और डॉन बोस्को हाई स्कूल को शाकिस्त दे कर  अपने स्कूल केपीसी इंग्लिश के लिए  ट्रॉपी जीती और बेहतरीन खिलाड़ी के तमग़े ऐ एजाज़ नवाज़े गए।   ६वी जमात में मोहम्मद फ़ैज़ान ने साइंस मुक़ाबले में हिस्सा लिया उन्होंने मस्नूई नमूने के ज़रिये तम्बाकूनोशी (स्मोकिंग) के लंग्स पर मुज़िर असरात को समझाया और क्लास में अव्वल नंबर रहे।  


५.      _________

अब्दुल के फ़र्ज़न्द अंसार शैख़ ने  हिन्दुस्तान की तारिख तब्दील कर दी और २१ साल की सबसे कम उमर वाले पहले आई ऐ अस बने।  उन्होंने हिंदुस्तान की सबसे ज़्यादा दुश्वारकून कठिन इम्तेहान को पहली ही कोशिश में आला नम्बरों से फतह हासिल करने में कामयाब हुए।

तालीम किसी की जागीर नहीं होती है।  कुछ तालीम साज़ों की उस्ताज़ हो कर ज़ेहनियत नियाहत ही ज़हरीली और मुतस्सिब होती है।  एक शख्स है जो अपने आपको उस्ताज़ कहता है और तालीम पर दर्स देता है लेकिन अपने तालिबे इल्मों को तालीम क्या दे रहा है वही मुतस्सिब और ज़हरीली।  अब्दुल के फ़र्ज़न्द के ख़िलाफ़ ज़हर भर रहा है।  अब्दुल को मुखातिब हो कर वोह कहता है बकरा काटोगे या पंचर लगाओगे।  मज़ीद आगे बोलता है ख़ास नाम ले कर फलां बिन फलां ने जहाज़ उड़ाया तो आप समझ सकतें हैं की उसने फ्लाय किया, वहीँ अब्दुल के फ़र्ज़न्द ने जहाज़ उड़ाया मतलब उसको सफ़े हस्ती से उड़ा दिया।  इस नामाक़ूल मुतस्सिब ज़ेहनियत के शख़्स का अपने तालिबे इल्मों को दर्स देते वक़्त हाथों के इशारे मायने रखते हैं।  जिससे अवाम के दिलों दिमाग में अब्दुल और उसके फ़र्ज़न्द के लिए मनफ़ी अक्स तैयार होता है।

उस्ताद को कभी भी किसी भी मासूम तालिबे इल्म की ज़हानत और हुनर की अनदेखी नहीं करना चाहिए। हर ख़ित्ते हर शोबे में बच्चे को आगे बढ़ने के पूरे मौक़े फ़राहम करना चाहिए।  अब जिसकी जैसी ज़हानत वैसा उसको मिलेगा रिजल्ट।  अब्दुल के फ़रज़न्दों में हुनर और ज़हानत की कोई कमी नहीं होती है।  उनके अंदर एहसास कमतरी पेवस्त करने के लिए उनको अदना दर्जे के नामों से मुख़ातिब किया जाता है। "पंचर पुत्र" कियोंके यह तो अब अक्सरियत अवाम पर वाज़े हो चूका है अगर अब्दुल के फ़रज़न्दों को मौक़े फ़राहम किये गए तो वोह पूरे हिन्दुस्तान पर फतह का परचम लहरा देंगें।  कियोंके अक्सरियत अवाम के बच्चे स्कूल कॉलेज सिर्फ और सिर्फ वही ग़लीज़ ज़ेहनियत ले कर जातें हैं।  स्कूल लेवल तक सिर्फ "गुफा पुत्र" कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बैक बेंचर्स, गुटका बाज़ बजाये ज़्यादा से ज़्यादा इल्म हासिल करने के उनका ज़ेहन ख़ुराफ़ात में ज़्यादा तवज्जो देता है।  कौन सी हिन्दू लड़की अब्दुल के फ़र्ज़न्द के साथ जा रही है या कौन सी जगह नमाज़ अदा की गई है या यूनिवर्सिटी कॉलेज की किस जगह ज़ाफ़रानी पत्थर नसब किया जाए।

गुफ़ा पुत्रों ने लाख कोशिश की के अब्दुल की नस्लों को पंचर पुत्र बोल कर और कोई ग़लीज़ गन्दी तोहमत लगा कर एहसास ऐ कमतरी में मुब्तेला कर दिया जाए।  लेकिन क्या बात है की अब्दुल की नस्लें एहसास ऐ कमतरी का शिकार तो दूर पहले से और ज़्यादा इल्म हासिल करने में कामयाब रही।  अगर गुफ़ा पुत्रों को कोई हर महाज़ पर कड़ी टक्कर दे रहा है तो वोह है अब्दुल की नस्लें।  "पंचर पुत्र"।   दूसरी बात तारीख लिखने में यह पंचर पुत्र माहिर हो गए हैं, हर वोह काम कर डालतें हैं जो पहले कभी नहीं हुआ और जिसकी तारिख लिखी जाती है।  अब्दुल कलाम ने जो भारत को मिसाइल दी उससे क़ब्ल किसी गुफ़ा पुत्र ने वोह कारनामा सरंजाम नहीं दिया।  

अब तुम बोलते रहो की जुनूब के सुब्रमणियम मिसाइल मेन थे उनकी कारगरदेगी काम आई अब्दुल कलाम दुसरे नम्बर पर थे और सुब्रमणियम की तहक़ीक़ात और अमल पर अब्दुल कलाम ने काम किया था।  लेकिन जो तारिख हो गई उसको कैसे फरामोश करोगे।  वैसे गुफ़ा पुत्रों की एक आम सक़ाफ़त है दूसरों की कारगरदेगी पर डाका डालते रहतें हैं।  खुद कुछ नहीं करते।  

नाज़रीन दुख्तराने मिल्लत के ऊपर रज़िया सुलतान से ले कर अदालत-ए-उज़्मा की पहली मुस्लिम ख़ातून जस्टिस हर लेडीशिप फ़ातेमा बीवी और तमाम आलम में मुस्लिम ख़ातूनों ने जो बेहतर कारगरदेगी की है उसके ऊपर २०१२ में एक तवील इंलिश में मज़मून लिखा है।  उसमे पाकिस्तान की बेनज़ीर भुट्टो और बंगलादेश की ख़ालिदा ज़िया का भी ज़िक्र है।  मज़मून उन संघियों, बीजेपी वालो और शिद्दत पसंदों के मुँह पर तमाचा जो बोलते हैं इस्लाम में मुस्लिम खातूनों को दबा कर रखा जाता है और वोह महज़ बच्चे पैदा करने की मशीन हैं।  बुलशिट

सहाफ़ी ज़ुबेर

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...