अज़ीज़ नाज़रीन,
गुजिश्ता एक हफ्ते से किसी भी इन्तहा पसंद हिन्दू के मुँह से "हिन्दू राष्ट्र" की बात नहीं सुनाई दे रही है। योगी, मोदी, अमित, इन्तेहापसन्द हिन्दू अवाम और लंगूर-लँगूरनियों को किस बात का ख़ौफ़ सताये जा रहा है। क्या इन लोगों को अपनी मौत दिखाई देने लगी है या वोह बर्बादी तबाई का छटा एहसास जाग गया है, जिसकी वजह से इन लोगों ने हिन्दू राष्ट्र का झुनझुना बजाना बंद कर दिया है। अभी तो इन्तेख़ाब बोहोत दूर है फिर कियों हिन्दू राष्ट्र की बातें डिबेट, क़िस्से, कहानियां बंद कर दी गई। या इनको हिन्दू राष्ट्र में भारत की एक और तक़सीम वाज़े दिखाइ दे रही है।
नाज़रीन एक बात है लंगूर-लँगूरनियों इन्तेहापसन्द हिन्दू, दहशतगर्दों और शिद्दत के वाल्दैन बीजेपी लाख कुछ भी कर ले होगा वही जो भारत के मुस्तक़बिल में मालिके कायनात ने लिख दिया होगा। दूसरी बात जो इस सहाफ़ी ने २०१९ के बाद से अपने तमाम अंग्रेज़ी और हिंदी मज़मूनों में लिखी है जो हिन्दू राष्ट्र की बात करतें हैं मतलब साफ़ इशारा एक और तक़सीम का दे रहें हैं। ज़ाहिर सी बात है भारत में अभी भी कई ऐसे हिन्दू हैं जो गंगा जमुना तहज़ीब पर यक़ीन रखते हैं, जो तमाम मज़हब के अवाम के फ़लाही कामों को करने और सबको साथ ले कर चलने की बात करतें हैं। जो बाबा साहब के दस्तूर पर यक़ीन रखतें हैं। तो ऐसा अवाम किधर जाएगा।
फिर भारत के २० करोड़ मुस्लिम अवाम १० करोड़ के क़रीब क्रिस्टी और ७ करोड़ के क़रीब सिख अवाम किधर जाएगा। आज जो टीवी मुबाहिसे और गुफ़्तगू पर बैठ कर शिद्दत पसंद हिन्दू और संघ के मुहाफ़िज़ बड़ी बड़ी बातें कर रहें हैं हिन्दू राष्ट्र में सभी को एक से मौक़े फ़राहम होंगे किसी को दुसरे और तीसरे दर्जे पर नहीं रखा जाएगा। बेवक़ूफ़ बना रहें हैं। अगर हिन्दू राष्ट्र में यही सब करना है जो दस्तूर में बाबा साहब ने तहरीर कर दिया फिर अलहदा नाम हिन्दू राष्ट्र देने की क्या ज़रुरत है।
फिर आज की तारीख़ में दस्तूर होते हुए मुस्लिम, सिख, क्रिस्टी, दलित और ग़ैर भाजपाई अवाम के साथ नाइंसाफ़ी की कोई हद नहीं है हर काम ग़ैर क़ानूनी, ख़िलाफ़े दस्तूर हो रहा है फिर एक बार भारत को हिन्दू राष्ट्र ऐसा तहरीर हो गया तो इस बात की क्या ज़ामिन है सबको इन्साफ मिलेगा, किसी की हक़तल्फ़ी नहीं होगी।
फिर हिन्दू राष्ट्र में मुसलमानों, क्रिस्टी, सिख, पारसी इनकी अक़लियती हैसियत क्या होगी क्या उनका अक़लियती स्टेटस छीन लिया जाएगा। अक़लियती अवाम को अपने मज़हब की मश्क़ करने का हक़ होगा या नहीं। इनके तालीमी इदारों का क्या बनेगा। आज मदरसों को आसाम, तमाम शुमाल, मध्य प्रदेश और कर्नाटक से दस्तूर मौजूद होते हुए तबाह कर दिया। फिर हिन्दू राष्ट्र में इन तालीमी इदारों का क्या बनेगा। अगर इनको जैसे थे उस हैसियत पर क़ायम रखा जाएगा तो हिन्दू राष्ट्र बनाने की हाजत किया है।
वोह बागेश्वर का शैतान किधर पोशीदा हो गया। उसके आश्रम में आये हुए अक़ीदतमंदों की मौतें होना शुरू हुई के शैतान फ़ौरन ख़ामोश हो गया। अब ना ही उसके आश्रम की बातें होती हैं और ना ही उसके अक़ीदतमंदों को दिखाया जाता है।
नाज़रीन आज के भारत की जो हालत है उसके लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ हुकूमत की नाहेली ग़फ़लत नाइंसाफ़ी की वजह से है। आज भारत में जो बेपनाह अमवातें हो रहीं हैं जिसका तब्सिरा अब ऐवान में होने लगा है। अगर हुकूमत नाइन्साफ़, हक़तलफ़, ज़ालिम ना होती तो उन सभी ५ क़िस्म की मौतों से अवाम ना मरता।
१.
कुदरती आफ़त
२.
सड़क हादसे
३.
ख़ुदकशी
४.
हार्ट अटैक
५.
बीमारी (कैंसर, कोविद और कोई)
आज दस्तूर के होते हुए अगर किसी भी मुस्लिम, क्रिस्टी को कोई मौक़ा फ़रहम किया जाता है या कोई भी सहूलियत मुस्लिम, क्रिस्टी अवाम को दी जाती है, जिसका दस्तूर में ज़िक्र है और दफा मौजूद है तब भी सबसे पहले यही संघी दहशत और शिद्दतपसन्द हिन्दू जो बोल रहें हैं हिन्दू राष्ट्र में सबको बराबर के मौक़े फ़राहम होंगे उच्चक के आतें हैं।
तक़दीर का लिखा कोई नहीं बदल सकता जो कायनात के मालिके मुख़्तार ने अर्श मोअल्ला पर तहरीर कर दिया अब वोह हो कर रहेगा। दूसरी बात अगर भारत की तक़दीर में बर्बादी तबाही तक़सीम का एक और डंस नहीं लिखा होता था तो मोदी जैसे ज़ालिम तरीन हाकिम और बीजेपी जैसी दहशतगर्द तंज़ीम को भारत को २०१४ में ग़ुलाम बनाने ही नहीं दिया होता।
सहाफ़ी ज़ुबेर