Friday, 1 July 2022

दरिया की मौज हूँ, फिर लौट के आऊंगा…….

नाज़रीन,

जब माफ़ी तंज़ीम के पहले दर्जे के अफ़राद को घर (सदन) से धक्के दे कर बेघर किया गया था, तब सदन के पटल पर तब उसने बड़े से बोला "मी सागर ची लाट आहे, मी पुन्हा येइन, मी पुन्हा येइन………” 

लेकिन सूबे महाराष्ट्र का वोह पहले नंबर का अफ़राद (तब का वज़ीरे आला) यह बताना भूल गया की वोह लौट के तो आएगा लेकिन दुसरे दर्जे का अफ़राद बन कर, अस्सिटेंट बन कर आएगा।  अपनी कूव्वत और ताक़त खो कर आएगा।  अमूमन जब दरिया की मौज वापिस जाती है तो दो गुनी ताक़त और क़ुव्वत के साथ लौटती है।  महाशय दुसरे दर्जे के अफ़राद लौटे तो सही लेकिन अपनी ताक़त, क़ुव्वत और ओहदा खो कर पहले नंबर से दुसरे दर्जे के नागरिक बन कर लोटे।  अब ऐसे बेअसर, बगैर क़ुव्वत वाले बकरे को क्या कहतें  "बदिया बकरा"

नाज़रीन क्या आपको मालूम है बदिया बकरा किस को कहते हैं।  ऐसा बकरा जिसके पास अपनी नस्ल बढ़ाने की क़ुव्वत और ताक़त नहीं होती है।  होता क्या है जो हाकिम होतें हैं, बकरों की तिजारत करने वाले, वोह ऐसे बकरे के अंड कोष को निकाल फेकतें हैं, जो बकरा बोहोत ही ख़बीस क़िस्म का होता है। उसको हर बकरी को देख कर शहवत तारी हो जाती है, और वोह उसके पिछवाड़े सर घुसेड़ी करना शुरू कर देता है। बे बे बे।   ऐसे बकरों को बदिया बना दिया जाता है।  अब वोह किसी काम के नहीं रहतें हैं।  बस उसके गोश्त में खूब चर्बी जमा हो जाती है।   जो हज़रात उम्दा क़िस्म का गोश्त फ़रोख़्त करतें हैं या जो ताजिर चाहतें हैं उनको बकरे की आला क़ीमत मिले उसको बदिया कर दिया जाता है। 

नाज़रीन दी गई मिसाल से मक़सद समझाना है।  माफ़ी तंज़ीम के सियासी आक़ाओं ने घर में (इन हाउस) पहले दर्जे के अफ़राद को दुसरे दर्जे का नुमाइंदा बना दिया।  तिजारत हो या सियासत ताजिर अपना नफ़ा पहले देखता है।  बकरा हो या तंज़ीम का नुमाइंदा उसका कितना नुकसान हो रहा है यह मायने नहीं रखता है।  बरक़्स तंज़ीम को या सियासी आक़ाओं को अपने ही किसी नुमाइंदे को दुसरे या तीसरे दर्जे में रखने में उनको कितना फायदा हो रहा है यह एहम है।  

सियासत में सब कुछ जाइज़ है, इसीलिए माफ़ी ज़ाफ़रानी तंज़ीम के आक़ा, शिद्दत पसंद काफिर, संघी दहशत से गुज़ारिश है के माज़ी के १००० साल क़ब्ल किसी वली सिफ़त बादशाह के ऊपर झूट फरेब बाँध कर उनके किरदार के ऊपर ऊँगली उठाने से क़ब्ल अपने किरदार पर नज़र रखो की तुमने अपनों के साथ क्या किया किस किस के सर क़लम किये और किस की हक़तल्फ़ी की है। 

Zuber

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