नाज़रीन,
आज के मज़मून की शुरूवात
उर्दू के एक मशहूर शेर से करता हूँ,
दिल से जो आह निकलती है असर रखती है।।
पर तो नहीं ताक़ते परवाज़ मगर रखती है।।
नाज़रीन हालाते हाजरा में हर वोह मुमालिक रब्बे कायनात के जाल (वेब) में सख़्त तरीन फंस गया है और महज़ मौत की आगोश में जाने के अलावा उसके पास दूसरा कोई और रास्ता नहीं है, जो सख़्त तरीन ज़ालिम, क़ातिल और मासूमों को बेदर्दी से क़त्ल कर देते थे। जिन मग़रिबी मुमालिकों और अमेरिका ने इराक, लीबिया, सीरिया, अफ़ग़ानिस्तान, यमन पर हमले पर हमले किये और बेगुनाह अवाम को मौत की आगोश में भेजा अब वही मुमालिक अपने अवाम को तिल तिल मरते हुए देखने पर मजबूर हैं। नाज़रीन अगर इस कुदरती क़िसास (बदले) पर यहूद दहशतगर्द इज़राईल, बुद्धिस्ट दहशतगर्द म्यांमार और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द भारत का नाम नहीं लिया तो मज़मून अधूरा सा रह जाएगा। उसकी वजह है तमाम मग़रिबी मुमालिकों, अमेरिका के साथ साथ इज़राईल और म्यांमार की तर्ज़ पर भारत में भी कुछ कम इंसानी हुक़ूक़ की, अक़लियतों के हुक़ूक़ की खिलाफवर्जी नहीं हुई है। उसकी सज़ा बदला या क़िसास तो मालिके मुतलक़ लेगा और ज़रूर लेगा।
ताज़ा सूरते हाल यह है की म्यांमार के यांगून में हिफ़ाज़ती फौजों ने ग़द्दारों और देहशती ख़ातून आईं सू की के वफादारों पर अंधाधुन गोलियों की बौछार कर दी, एक ही झटके में १८ दहशतगर्दों और ग़द्दारों को फौज ने भून कर जहन्नुम रसीद कर दिया। नाज़रीन यह ऊपर वाले का बदला और क़िसास है।जिस देहशती ख़ातून सू की (जदीद क्लीपेट्रा) ने जो जो ज़ुल्म क़त्ले आम रोहिंगिया मुसलमानों के साथ किये थे हू बहू वही हालात बुद्धिस्ट दहशतगर्दों के साथ फौज कर रही है। सू की को जेल में डाल कर उसके साथ इस ज़ाईफी की हालात में क्या क्या हो रहा होगा कौन जाने। जवानी में गर्मी सेहेन नहीं हुई सो मुस्लिम अवाम पर अपने जिस्म की दर्जे हरारत ख़ारिज की तो ऊपर वाले ने बुढ़ापा बर्बाद कर दिया और जो काम उसने जवानी में कभी सोचे भी नहीं होंगे वोह उसके जिस्म को बुढ़ापे में करना पड़ रहें हैं। एक एक रात १०-१०, १२-१२ फौजी कमांडर अगवाड़ा और पिछवाड़ा लाल कर रहे होंगे। और ज़ालिमों की यही सज़ा है। जैसा की मुस्लिम ख़ातूनों और बच्चिओं के साथ ज़िना बिल जब्र किया था इन बुध्दिस्ट दहशतगर्दों ने, अब उसका ज़वाल इनको अपनी बेहेन बेटिओं से देना पढ़ रहा है। कई मुस्लिम बच्चिओं और ख़ातूनों पर ज़िना कर के उनकी शर्मगाहों में तेज़ाब डाल कर उनको हलाक कर दिया कई को बदफैली करने के बाद आतिशे नार कर दिया। ऐसे तमाम हालात और हादसे एक सहाफी होने के नाते नाम बनाम इस खाकसार के पास आ चुके हैं। यह है ऊपर वाले की लाठी और जब चलती है तो शिद्दत पसंद, ज़ालिम, दहशतगर्द, क़साई, दरिंदा, जल्लाद, शैतान जगह पर ही ढेर हो जाता है पानी तक नहीं मांग पाता।
जैसा की भारत में ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर और लँगूरनियाँ हर
मसले पर हिन्दू मुस्लिम करते फिरते थे वैसा ही म्यांमार में सू की के ग़ुलाम लंगूर लँगूरनियाँ
मुस्लिम अवाम के खिलाफ ज़हर अंगेशी करते थे। अब हालात ऐसे हो गए की तमाम लंगूर और लँगूरनियों
को जेल की हवा खाना पड़ रही है। मुनसलिक सहाफी
के एहतेजाजियों पर कवरेज करते हुए एक लंगूर को बरोज़ सनीचर अल सुब पुलिस ने गिरफ्तार
कर लिया है। गिरफ्तार किया गया लंगूर थीन जाव
पुलिस हिरासत में रखा गया है। अभी तक १९ लाशों
की तस्दीक़ बर्मा की जम्हूरी आवाज़ ख़बरनामे ने तस्दीक़ की है। माज़दीद १० लाशें लावारिस है जिनकी कोई शिनाख़्त नहीं
हो पाई है।
नाज़रीन जैसा की हाल मग़रिबी तहज़ीब का हो रहा है जैसा की अमेरिका का हो रहा है जैसा की संघी दहशत के वाल्दैन इजराइल का हो रहा है जैसा की म्यांमार का हो रहा है उससे भी सख़्त भारत का होगा। यह आह भी है और बद्दुआ भी है। फ़रवरी का उत्तराखंड और करोना तो टाइटल है असली पिक्चर आना अभी बाक़ी है। अभी तो २०१४ से २०१९ तक का बदला, क़िसास पूरा नहीं हुआ, फिर मुसलमानों पर दिल्ली हिन्दू दहशतगर्द हमला, जामियां तुलबा पर हिन्दू, खाकी दहशतगर्दों का हमला, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में खाकी दहशतगर्दों का हमला, शाहीन एहतेजाज पर (हिन्दू, मुस्लिम, सिख, दलित) मस्तूरातों पर खिबतियाँ और फ़िक़रे कसना, सब चीज़ों का क़िसास बोहोत ही भयानक होगा। दिल्ली हिन्दू दहशतगर्दों हमले की भी पूरी जानकारी हमले के वीडियो उसके बाद मज़लूमों की ज़ुबानी के वीडियो इस सहफ़ी के पास मौजूद हैं। जिनको पाकिस्तान की हुकूमत और वज़ीरे अज़ाम इमरान खान साहब को भेजे जा चुके हैं। वोह तमाम भयानक हमले की वीडियो और तमाम तहक़ीक़ाती जानकारी जो इस सहाफी ने अपने बूते पर हासिल की थी एक हलफनामे के साथ अक़वामे मुत्तहिदा को भेजी जा चुकी है।
ऐसा सब करने की हिकमते अमली यही थी की अब मज़ीद भारत की ख़ाकी दहशतगर्द (पुलिस), काफिर दहशतगर्द फ़ोर्स (फौज), काफ़िर इन्तेज़ामियाँ (हुकूमत), काफ़िर रखैल कचेरी (सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट) पर बिलकुल यक़ीन नहीं रहा की इस मनहूस मुर्दों के देश में एक मुस्लिम को इन्साफ मिलेगा। तमाम अवाम मुर्दा हो गया है, महज़ जिस्म में जान होना ही काफी नहीं होता है, ज़िंदा रहने के लिए एहसासात, जज़बात और उसका इज़हार करने की क़ुव्वत और हिम्मत होनी चाहिए।
तमाम मुस्लिम अवाम से गुज़ारिश है महज़ नाम मुस्लिम रख लेने से कुछ नहीं होता है अगर तुमको उस दर्द और तकलीफ का एहसास नहीं है जो दुसरे मुस्लिम को किसी शिद्दत पसंद काफिर, संघी दहशतगर्द से पहुँचती है, तो तुम मुस्लिम ही नहीं हो। अगर तुम्हारे पास इल्म है तो क़लम से जिहाद करो उठाओ क़लम और हर मुद्दे को आलमी सतह पर भेजो। अगर क़लम की ताक़त नहीं है और लाइल्म हो तो हथियार उठा कर जिहाद के रस्ते पर निकल जाओ। काफिर शिद्दत पसंदों का, संघी दहशतगर्दों का, नाइंसाफ खाकी दहशतगर्दों (पुलिस) वालों का, फौज का और इन्तेज़ामियाँ में बैठे ना इन्साफ हाकिमों का खून तुम पर हलाल है। रौज़ए महशर में तुम से कोई पूछ ना होंगी। क्योंकि जिन लोगों ने तुम्हारे अपने बेगुनाहों को शहीद किया है वोह तमाम हक़तलफ़ हैं ना इन्साफ हैं, इन्तेज़ामियाँ से ले कर अदलिया सब का खून तुम पर हलाल है।
इतना सब होने के बाद भी हम तो यही चाहेगें की २०२३ में फिर से ज़ाफ़रानी तंज़ीम और हिन्दू दहशतगर्दों की सरकार बने क्योंकि इन ज़ालिमों से जंग करने और इनके अपनों को मौत की आगोश में भेजने में बोहोत ही सुकून मिलता है।