महाराष्ट्र और मरकज़ी इन्तेज़ामियाँ,
मरकज़ी और सूबे महाराष्ट्र की इन्तेज़ामियाँ ज़रा तवज्जो दें, आज कमो
बेश ९ महीने बाद फिर से आहिस्ता आहिस्ता बॉम्बे लोकल में वही हुड़दंग और गुंडा गर्दी
शुरू हो रही है। जबकी मरकज़ी और सूबे की जानिब
से वक़्ते मुक़्क़र्रा पर ही लोकल में आम अवाम को आने जाने की इजाज़त है। बाक़िया वक़्त ज़रूरी ख़िदमात को अंजाम देने वाले मुलाज़िमों
के लिए मेहफ़ूज़ है। अभी तक हुकूमत की जानिब
से ऐसा कोई सर्कुलर या हुकुमनामा नहीं आया है, की ज़रूरी ख़िदमात वाले वक़्त में ग़ैर ज़रूरी
अनासिर भी घूस सकतें हैं। फिर हो वही रहा है जो वक़्त आम अवाम के लिए मुक़र्रर नहीं है उसमे ग़ैर ज़रूरी अनासिर घूस जातें हैं, और वही हुड़दंग बाज़ी
ज़ोर ज़ोर से अपने साथियों को आवाज़ देना, सीट को अपना बेग रख कर मेहफ़ूज़ कर लेना,
और उसके ऊपर दुसरे किसी अफ़राद को नहीं बैठने देना। ज़ोर ज़ोर से हसी मज़ाक करना। हुड़दंग बाज़ी करना।
ऐसे नामुनासिब अफ़राद ज़रूरी ख़िदमात देने वाले हुकूमती नुमाइंदे नहीं होतें हैं, बल्कि ज़रूरी ख़िदमात वाले इदारों से फ्राड, जालसाज़ और झूठे शिनाख़त कार्ड बनवा कर ग़ैर मुताइना वक़्त पर सफर करतें हैं जो वक़्त इन अनासिरों के लिए मुक़्क़र्र नहीं होता है।
मेरा एतेराज़ हुकूमत और इन्तेज़ामियाँ से वही है जब एक हुकुम नाफ़िज़ कर दिया एक क़ानून बना दिया तो उसकी अमलबाजवानी करने की ज़िम्मेदारी भी हुकूमत की ही होती है। अगर क़ानून की खिलाफवर्जी हो रही है मरकज़ी या सूबे के आला हैसियत का हुकुम कोई ग़ैर ज़रूरी अनासिर नहीं मान रहे हैं तो उनके ऊपर सख़्त हिकमते अमली होना चाहिए।
मर्ज़ बड़े उससे बेहतर है पहले ही एहतियाती तदबीर इख़्तियार की
जाए।
हुकूमत और इन्तेज़ामियाँ से गुज़ारिश है।
१. १. ज़रूरी ख़िदमात वाले वक़्त पर पुलिस, की गश्त बढ़ाना चाहिए, और हर ख़ासो आम से उसके शिनाख़्त कार्ड की तस्दीक़ करना चाहिए।
२. शिनाख़्त कार्ड वाले अफ़राद से उसके ओहदेदार और इदारे का नंबर
पूछना चाहिए ताके उस अफ़राद की शिनाख़्त की तस्दीक हो सके।
३. वक़्तन फा वक़्तन उस इदारे में जा कर उस जालसाज़ और झूठे की तस्दीक़ करना चाहिए।
४. जालसाज़ी और झूठे शिनाख़्त कार्ड बनवाने वालों के ऊपर पुलिस को सख़्त इक़दाम करना चाहिए।
५. और कोई भी ज़रूरी इक़दाम जो कुछ भी हुकूमत को मुनासिब लगे।