बंबई
मेहफ़ूज़ हाथों में.
आज
एक बार फिर हाजी अली और मक़दूम शाह माहिमी की रूहानी करामात ने बेहेरे अरब से उठे ज़बरदस्त
तूफ़ान को पलट दिया और मुंबई के अवाम की जान माल के नुकसान को होने से मेहफ़ूज़ कर लिया.
नाज़रीन
जिस हिसाब से बेहेरे अरब से उठे ज़बरदस्त तूफ़ान
ने जारिहाना शक्ल इख्तियार कर ली थी, लेकिन अल्लाह के वालियों ने बा हुक्मे इलाही उस
तूफ़ान को पलट दिया और शैतन की पनाह गाहा और दहशतगर्दी का मरकज़ गुजरात की जानिब मोड़
दिया.
गश्ती तूफान निसर्ग सूबे महाराष्ट्र के साहिली इलाकों अलीबाग और बंबई
से टकराया तो ज़रूर लेकिन मुंबई में खासा नुकसान और ईज़ा पहुंचाने से क़ासिर रहा. तूफान का बंबई के लिए खतरा तक़रीबन ख़लास हो चुका
है. फिर भी बंबई के ज्यादातर इलाकों में बारिश
जारी रहने के इमकानात अभी ख़त्म नहीं हुए हैं.
हाँ अलबत्ता तूफ़ान का खतरा सो फी सद फौत हो चूका है.
जिस हिसाब से तूफ़ान की आमद हुई थी और इप्तदाई मरहले में ही जो उसकी शिद्दत
थी उससे ऐसा महसूस हो रहा था बे पनाह जानी और माली नुकसान कर के यह तूफ़ान जाने वाला है. अलबत्ता फिर भी
महाराष्ट्र में तेज हवाओं और बारिश की वजह से कई जगहों पर खड़े पेड़ उखड गए और
टूटकर गिर गए. तूफ़ान में जो हवाओं की रफ़्तार
और शिद्दत थी वोह १२० से १५० किलो मीटर फी घंटा थी. तूफान के मद्देनजर हूकूमते महाराष्ट्र
ने तमाम एहतियाती इक़दाम कर रखे थे. बांद्रा-वर्ली
सी लिंक पर ट्रैफिक की आवाजाही रोक दी गई थी. महाराष्ट्र हुकूमत ने क़ब्ल अज़ वक़्त एन.डी.आर.एफ.
की टीमों की मौजूदगी करवा ली थी. मुंबई, ठाणे,
रायगढ़, रत्नागिरी में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई. हूकूमते महाराष्ट्र के वज़ीरे आला जनाब उद्धव ठाकरे
ने दौरान तूफ़ान अवाम को घरों से बाहर ना निकलने की हिदायत दी थी. वही अपनी सूझ बूझ
का सबूत देते हुए बम्बई एयरपोर्ट पर भी शाम सात बजे तक आवाजाही को रोक दी गई थी.
नाज़रीन आप तमाम हज़रात को इल्म होना चाहिए की अभी महज़ एक हफ्ता क़ब्ल अम्फान
तूफ़ान ने मग़रिबी बंगाल और ओडिशा में शिद्दत से तबाही मचाई थी. बरक्स बंबई और महाराष्ट्र तक़रीबन ऐसे ही तूफ़ान की
ज़द में आया तो ज़रूर अलबत्ता मेहफ़ूज़ रहा.
दौरान तूफ़ान निसर्ग १२० से १५० किलोमीटर फी घंटे की रफ्तार से तेज़ आंधी
और बारिश हुई. महकमा ये मौसूमियात के मुताबिक महाराष्ट्र के साहिली इलाकों से तूफान
की ज़द करीब १२० से १५० किलोमीटर फी घंटे की रफ्तार से टकराया. जिसके बाद बंबई के ज्यादातर
हलकों में तेज हवाओं के साथ बारिश देखी गई.
सहाफी जुबेर का हालाते
हाजरा पर नुक़्ता ऐ नज़र
शहंशाहे
बेहेरे अरब हाजी अली और मखदूम शाह महीमी की करामात. एक बार फिर बंबई के अवाम को कुदरती आफत से मेहफ़ूज़
किया. नाज़रीन आपको इल्म होना चाहिए की हिन्दुस्तान
के तक़रीबन हर साहिली इलाक़ों ने सख़्त तूफ़ान की ज़द को महसूस किया है. २००४ में तमिल नाडु में सूनामी में कमो बेश १०,०००
से १२,००० अफ़रादों ने अपनी जान गवाई थी तो करोड़ों की जायदाद का नुकसान हुआ था. उसी हिसाब से ओर्रिसा के साहिल पर १९९९ में सूनामी और तूफ़ान ने सख़्त तबाही मचाई थी. जिसमे कम
से कम १०,००० अफ़रादों ने अपनी जान गवाई थी.
और कम से कम ५ से ७ अरब की जायदाद का नुकसान हुआ था. २०१३ में उत्तराखंड की तबाही शायद ही कोई भी भूल
पाया होगा. उस कुदरती आफत से सरकारी अदद शुमारी
के हिसाब से कम से कम ६००० लोगों की हलाकत की खबर थी. लेकिन ग़ैर सरकारी अदद शुमारी ४०००० से ५०००० है. इस हादसे में कम से कम ३ लाख लोग फस गए थे.
नाज़रीन
साहिली कर्णाटक, आंध्रा, मग़रिबी बंगाल में गाहे बा गाहे तूफ़ान और सूनामी आते रहे हैं. लेकिन बंबई में आज तक ऐसा तूफ़ान या सूनामी दरिया
अरब से कभी भी नहीं आया. उसकी वजह है दरिया
ऐ अरब पर हाजी अली की बादशाहत. तमाम बम्बई
को अल्लाह के दो वालिओं ने दरिया के केहर से मेहफ़ूज़ कर रखा है. एक हाजी अली और मखदूम शाह माहिमी.
हाजी
अली के कश्फ़ और करामात का ज़िक्र इस सहाफी ने अपने इन दो मज़्मूनों में किया है. "अल्लाह के बरगोज़ीदा बन्दे." और “अल्लाह के बरगोज़ीदा बन्दे.” जिसमे साफ़ अलफ़ाज़ में यही बताने
की कोशिश की है के तमाम साहिली शहरों में सदा तूफ़ान और टूनामि का खतरा बना रहता है
लेकिन यह तो करामात है इन वालियों की जिन्होंने बंबई को संभाले रखा है. माज़ी में तमाम साहिली इलाक़ों ने मद्रास, ओर्रिसा,
आंध्रा, साहिली कर्नाटक और वेस्ट बंगाल ने टूनामि की तकलीफ को सहा है, और मुस्तक़बिल
में ऐसी कोई ज़ामिन नहीं है के ये साहिली इलाक़े मेहफ़ूज़ हैं लेकिन बंबई तो अल्लाह के
करम से और इन वालिओं की बुज़ुर्गी की वजह से मेहफ़ूज़ है.