Saturday, 2 May 2020

WHO के तबीब कोरोना को क़ुदरत का क़ेहर मानने पर मजबूर कहा कुदरती तोर पर पैदा हुआ है.

वॉशिंगटन

आलमी सेहत तंज़ीम में हगामी हालात के सरबराह डॉक्टर माइकल रायन ने कहा है कि WHO को भरोसा है कि कोरोना वायरस कुदरती तोर से पैदा (कोरोना वायरस नेचुरल ओरिजिन) हुआ है। उन्होंने ये बात अमेरिकी सदर जनाब डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद कही, जिसमें ट्रंप  ने कहा था कि उनके पास बात की बहुत सारी जानकारी है जो ये दिखाती है कि कोरोना वायरस चीन के वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट से पैदा हुआ है।

रायन ने कहा कि WHO की टीम ने बार-बार बहुत सारे सइंसदानों से इस पर बेहेस मुबाहिसा किया है, जिन्होंने वायरस के जीन सीक्वेंस को देखा है और हमें इस बात का पूरा यक़ीन कामिल है कि ये वायरस क़ुदरती तोर से पैदा हुआ है। उन्होंने ये भी कहा कि कोरोना वायरस से क़ुदरति मेज़बान का पता लगाना ज़रूरी है, ताकि इसके बारे में मज़ीद मालूमात मिल सके और मुस्तक़बिल में ऐसे खतरे से बचा जा सके। 
बता दें कि बरोज़ जुमेरात को अमेरिकी सदर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें पूरा यक़ीन है कि कोरोना वायरस चीन के वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट से ही पैदा हुआ है। ट्रंप बार-बार चीन पर हमला करते रहे हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि वह चीन पर लगने वाला टैरिफ भी बढ़ाएंगे, क्योंकि चीन की वजह से ही आज अमेरिका इतनी बुरी हालत में है।
ज़्यादातर सइंसदान मानते हैं कि वायरस चीन के शहर में मुक़ीम एक जानवरों के बाज़ार से पैदा हुआ है। हालांकि, अब तक इस बात की तस्दीक़ नहीं हो सकी है कि किस जानवर के ज़रिये कोरोना वायरस फैला है।
कोरोना वायरस से तमाम आलम में अब तक ३३ लाख से भी ज़ाइद अवाम मुत्तासिर हो चुके हैं और २.४० लाख के क़रीब अवाम जाहांबाक हो गए हैं।  सबसे बुरा हाल अमेरिका का है, जहां अब तक तक़रीबन ६५ हजार लोग फ़ौत हो चुके हैं और ११ लाख से भी ज़्यादा लोग कोरोना वायरस से मुत्तासिर हैं।
सहाफी ज़ुबेर का हलाते हाजरा पर नुक़्ता ऐ नज़र 
हक़ीक़त से रू बरू होना ही पड़ेगा हर वक़्त बली का बकरा तलाश करोगे तो हमेशां ख़सारे में रहोगेआलमी बरादरी को इस बात को तस्लीम करना ही होगा की यह क़ुदरती क़ेहर हमारी बदबख़्ती, ज़ुल्म, शिद्दत, जब्र और गुनाहों का नतीजा है। फिर जिस अंदाज़ में मुल्के हिन्द में जमातियों, तब्लीग़ियों का नाम ले कर झूट फरेब फैलाया जा रहा है उससे हिन्द में मज़ीद सख़्त पे सख़्त दिन आने वाले हैं अभी तो ज़ालिम घुटनो के बल रेगेगें इसमें एक नहीं हर वो शख़्स होगा जो ज़ुल्म करता होगा या ज़ुल्म पर ख़ामोशी इख़्तियार की होगी या ज़ुल्म करने की तरग़ीब करता होगा.  झूट, फरेब, जालसाज़ी के बल पर तुम अवाम को झुका सकते हो ख़ालिक़े क़ायनात को नहीं 
इतना ही नहीं जब जामातिओं का फलसफा फेल हो गया तो मुल्के हिन्द में दूसरी अक़लियत सिक्खों के ऊपर इलज़ाम तराशी करना शुरू कर दी हुज़ूर साहेब नादेड से आये हुए ज़ायरीन करोना वाइरस ले कर आये और उनकी वजह से करोना बड़ा इतना ही नहीं ख़ालिस्तान (पंजाब) खुद सिख समाज के वतने अज़ीज़ में उनके लिए ज़मीन तंग की जा रही है और यह सब संघ की दहशत और मोदी की ज़ाफ़रानी हुकूम शाही की वजह से हो रहा है क्योंकि सिख सामाज हमेशा इंसानियत के साथ रहते हैंऔर उनको मालूम हो गया है की मुसलमानों के साथ हिन्द में ना इंसाफ़ी हो रही है उनकी पोशीदा नस्ल कूशी की जा रही है इसलिए वोह उनसे हुसने सुलूक का माद्दा रखतें हैं बस इसी बात का बदला सिख क़ौम से लिया जा रहा है  इतनी  हिन्दू तंज़ीमे हैं जो खुले आम मंदिरों में हुजूम जमा करतें हैं एक बार भी उनके ऊपर काहे को इलज़ाम तराशी नहीं की गई उसकी वजह सिर्फ यह ही है की हर हिन्दू शिद्दत पसंद ज़ेहनियत रखता है अब जो सेक्युलर हैं वोह तो १०० में से एक ही बचे होंगे और उस एक की आवाज़ इतनी बुलंद कहाँ रहती है जो ९९ की रहती है.  और ९९ वे तो मुखालिफ हैं लेकिन सिख समाज में तमाम बरादरी ही हक़ और इन्साफ के साथ ज़ुलम और ज़ालिम के ख़िलाफ़ खड़ी है   
लेकिन कितना भी उछल कूद कर ले हिन्द का बादशाह उसको भी हक़ीकत को मानना ही पड़ेगा.  यह करोना तुम्हारे ज़ुल्म का बदला है.  इसके बाद तो मुल्के हिन्द के लिए मज़ीद सख़्त दिन हैं.

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...