अज़ीज़ नाज़रीन,
आसमानी कूव्वत और ताक़त से आज तक कोई भी शैतानी अमलियात का मर्कज़ जीत नहीं सका. वह जंग तो करता है लेकिन उसकी तक़दीर और हिस्से में रूसवाई, बेइज़्ज़ती, ज़लालत और हार ही आती है. कोई भी फिरोन, हिटलर या ज़ालिम बादशाह आज तक क़ादिरे मुतलक़ के बनाये हुए क़ानूनों की ख़िलाफ़वर्ज़ी कर के सरसब्ज़ और शादाब नहीं हो सका और ना ही उसको सुकून फ़राहम किया गया. उसकी रातों की नींद छीन ली जाती है और दिल का क़रार. हमेशां उसको एक बैचेनी और मायूसी ही लगी रहती है.
मोदी, बीजेपी, संघी दहशतगर्द और शिद्दत पसंदों की रूसवाई और ज़लालत पर ये सहाफी २०१५ से लिख रहा था की तुम रूसवा होंगे. फिर इनका रूसवाई की सिलसिला शुरू हुआ. जसको बोहोत से मज़मूनों में शाया कर मन्ज़रे आम पर ये सहाफी ला चूका है. इस ज़िम्न में मज़ीद रूसवाई देख रहा हूँ जो बीजेपी, ज़ाफ़रानी शैतानों, संघी दहशतगर्दों और शिद्दत पसंदों की किस्मत में आने वाली है.
कश्मीर के चीख़ बाज़ों की "आज़ादी" के नक़्क़ारों पर ये शिद्दत पसंद खूब ख़फ़ा होते थे.
लंगूर और लँगूरनियाँ ज़हर अंगेशी करती थी.
वहां आज़ादी के नारे लगे, यहाँ आज़ादी के नारे लगे.
अब तो हर गली हर कूचे में आज़ादी के नारे लग रहे हैं. संघियों क्या करते अब. इन शिद्दत पसंदों ने अपने मासूमों के ज़ेहनों में ज़हर भरा और उनके हाथों में तलवार, चाकू, त्रिशूल और बंदूक दी वहीँ ये सब कुछ देख कर अमन पसंद बच्चों ने क़लम उठाई और चीख़ बाज़ों के रस्ते हो लिए.
हर
उस मुद्दे पर ये शिद्दत पसंद, संघी और बीजेपी के नुमाईंदे और हुकूमत ज़लील और रूसवा
हुए हैं जिस भी मुद्दे को इन्होने मुस्लिम अवाम से जोड़ कर वक़ार का मुद्दा बनाया और मुस्लिम अवाम को अज़ीयत देनी चाही थी.
योगी ने गाये के नाम पर खूब सियासत की थी.
ऐसा कहतें हैं जानवर को ऊपर वाले ने आला किस्म की ज़हानत फ़राहम की है.
वो इंसान और शैतान कसाई (खटीक) में फ़र्क़ बा खूबी कर सकता है.
फिर जानवर मालिके कायनात की वो पोशीदा मख्लूक़ देख लेता है जो इंसान नहीं देख सकता.
अब इस भगवा कसाई (शैतान) को देख कर गाये के बच्चे भी कैसे ख़ौफ़ ज़दा हो रहे हैं.
क्योंकि इनको एहसास हो गया होगा की इनके पास एक शैतान के भेस में कसाई आया है जो इनका क़त्ल करने के लिए हाथ फेर रहा है और खाना दे रहा है.
फिर उन गाये के बछड़ों ने भी इस साधू के भेस में कसाई और शैतान के हाथ से खाना नहीं खाया और हाथ फेरने पर मुँह मोड़ कर चले गए.
हिन्दू मज़हब में तो ऐसा कहतें हैं की गाये को रोटी खिलाना या खाना खिलाना बोहोत ही सवाब का काम है. अगर गाये उस हिन्दू और ख़ास साधू या आला तरीन ओहदेदार शख्स के हाथ से ना खाये या उसको देख कर भाग जाए, ख़ौफ़ ज़दा हो तो ऐसे हिन्दू शख़्स के लिए हिन्दू मज़हब की किताबों और फलसफों में क्या हूकूम है.
क्या उसको उस ज़मीन को छोड़ के जिला बदर करने का हुकुम है या गर्दन क़लम करने का.
फिर अगर वो शख़्स सूबे का सबसे बड़ा शख़्स वज़ीर आला
या वतन का वज़ीरे अज़ाम है और उसके हाथ से गाये खाना ना खाये या ख़ौफ़ ज़दा हो तो क्या पैशानगोई
निकल कर आती है, क्या उस वतन या सूबे में सख़्त आफ़ात और बला, तबाही आने वाली है. हिन्दू दानिशमंद, और साधू संत बताएं.
अगर ऐसी कोई बात वेद पुराणों से साबित होती है तो धर्म संसद में उसको ले कर भगवा शैतान योगी को सूबे और हिन्दू मज़हब से बहार किया जाए.
इस शख़्स की ज़ेहनियत हर दम ख़ून ख़राबा करने की रहती है और हर वक़त ये शख़्स मार काट गोली बारी ऐसी बातें करता है.
इस जैसे भागवा कसाइयों और साधुओं ने हिन्दू मज़हब की बोहोत ही बदनामी की है.
जो इंसान आला तरीन इन्तेज़ामियाँ के ओहदे पर फ़ाइज़ है और मस्तूरातों के लिए अदना ज़ेहनियत फिर गुंडों, दहशतगर्दों और अंडर वर्ल्ड की तरह बातें करना उसके ना सिर्फ हिन्दू किरदार बल्कि उसकी तालीम पर भी शक पैदा करतें हैं.
इन जैसे लोगों को कौन है जो हिन्दू कहेगा.
असल में ये इनकी गलती नहीं है, इन लोगों को हिन्दू मठ और संघ की शाळा से ऐसी ही तरग़ीब और तरबियत मिलती है.
इस भगवा कसाई का पाला अभी तक इंदिरा गाँधी के मुहाफिजों जैसे किसी इंसान से नहीं पड़ा है.
नहीं तो अभी तक इसकी गर्दन क़लम हो गई होती.
या
जो नारा इस सहाफी ने दिया है " इन ज़ालिम संघी मरीज़ों को गोली मारो इनको जहाँ देखो" वो सच्चाई में तब्दील हो गया होता.
नाज़रीन, हर उस मुद्दे पर ये शिद्दत पसंद और संघी दहशतगर्द, बीजेपी के लोग रूसवा हुए है जिसपे ये लोग दोहरा रव्वैया अपनाते थे.
ट्रिपल तलाक़ हो, बाबरी मस्जिद, बाल विवाह, कसरते अज़वाज, फरेब दोगला पन, गौ मास, गौ हत्या से ले
कर तो दहशतगर्दी तक. वतन परस्ती से ले कर तो
पाकिस्तान परस्ती तक, गद्दारी से ले कर तो भारत की एहम मालूमात पाकिस्तान को फ़राहम
करने तक. पाकिस्तान के लिए जासूसी करने से
ले कर तो आई.एस.आई. एजेंट होने तक तमाम मुद्दों पर जिस तरीक़ेकार हिकमत इख़्तियार कर
के मुस्लिम अवाम को संघी, बीजेपी और हुकूमत की जानिब से बदनाम किया जाता था उन तमाम
मुद्दों पर सिर्फ और सिर्फ हिन्दू ही पकडे गए और रूसवा, बदनाम ज़लील हो रहे हैं.
ट्रिपल तलाक़ पर रूसवाई, ज़लालत के बाद अब कसरते अज़वाज पर रूसवाई और बेइज़्ज़त का सिलसिला शुरू होगा. इस मुद्दे पर ये सहाफी एक हिंदी मज़मून
बहुविवाह की भी निकालो जानकारी और अंग्रेजी में Let’s us have data on bigamy too.
पहले ही शाया कर चूका है. संघी,
बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू और दुर्गा वाहिनी की तमाम मस्तूरातों के इस सवाल पर की इस्लाम में ख़ातूनों को आज़ादी नहीं है और उनके हिसाब से मुस्लिम ख़्वातीनों को सबसे बड़ा मुद्दा महज़ ट्रिपल तलाक़ ही है. फिर जब तक़ीक़ात की गई और मालूमात निकाली गई से तो पता चला ज़्यादा तो हिन्दू मज़हब में अपनी शरीके हयात को छोड़ देने की रविश है.
संघी, बीजेपी वाले और शिद्दत पसंद हिन्दू कुछ कुत्ते यासेर जीलानी, नक़वी, शाहनवाज़,
रिज़वी
जेसो को पाल के रखतें हैं. ये यासेर जीलानी जैसे लोग सिर्फ नाम के ही मुसलमान होतें हैं. असल में ये लोग वो कुत्तें हैं, जिनको संघी, बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू गौ मास की बरियानी खाने के बाद हड्डिया खा कर अपनी फैलाई हुई गंदगी को बदकारी को दूर करने के लिए रखते है. तभी तो ये योगी, भोगी, मोदी, चौदी और RSS को हिफाज़त करतें हैं और उनके मुवाफ़ेक़त में बयान देतें रहतें हैं. रिज़वी, नक़वी, शाहनवाज़ जैसे लोग शाहीन बाघ की मस्तूरातों पर ऊँगली उठाते रहतें हैं. निशांत शर्मा जी इस यासेर जीलानी को उसके एक बयान पर धो डाला अरे तुम तो रज़ाई में घुसे हुए हो यहाँ क्या कर रहे हो अपनी बेगम को भेजो. फिर दूसरा हमला किया तुम अपनी बेहेन और बेटी को ५०० रूपये में बिठाते हो क्या. उसपे ये कुत्ता भड़क गया शर्मा जी बोले ये में नहीं बोल रहा हूँ ऐसा योगी बोलता है और तुम उसकी मुवाफ़ेक़त कर रहे हो. तुम भी तो मुसलमान हो.
नाज़रीन ये बात वाज़े रहे जब भारत का बटवारा होगा तब इन जैसे तमाम ज़मीर फरोश कुत्तों को उस सेक्युलर भारत में नहीं रहने दिया जाएगा. रहो हिन्दू राष्ट्र में तुम्हारे लिए यहाँ कोई जगह नहीं है. आप क्रोनोलॉजी समझ लीजिये पहले भारत का बटवारा होगा फिर भाइयों और बहनों आप ज़रा ध्यान से सुनिए, फिर एक एक कुत्ते को चुन चुन के भारत से निकाला जाएगा.
बीजेपी का वेस्ट बंगाल का एक दहशतगर्द बोलता है हमने उत्तर प्रदेश और आसाम में इन लोगों को कुत्तों की तरह मारा. रोड पे हमारी पुलिस ने ख़ास कुत्तों को मारा. हम इन सब को ऐसे ही मारेंगे. आसाम और उत्तर प्रदेश में सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम ही मारे गए थे. मेरा सवाल इस ज़मीर फरोश बीजेपी के मुस्लिम नुमाइंदों से है क्या वो सभी कुत्तें हैं. या तो ये लोग कहें की वो मुस्लिम नहीं हैं या अपने आपको कुत्ता तस्लीम करें, या नहीं तो संघ, बीजेपी की चाटुकारिता और नुमाइंदगी छोड़े तीन रस्ते हैं. में तमाम सियासी पार्टियों से और उनके हिन्दू, सिख, बोध, जैन, खिच्चन, पारसी कार्यकर्ताओं से गुज़ारिश करूँगा की कोई भी बीजेपी या संघी मुस्लिम नुमाइंदा बेहेस में आये तो उसको धो डालो और इनके जो हिन्दू नुमाइंदे मुस्लिम अवाम के लिए गन्दी गलीज़ बातें करतें है उसी से उनकी पिटाई कर दो.
रुबिका लियाक़त काफी दिनों से दिख नहीं रही है शायद अपने शोहर की रज़ाई में फैलाई हुई गंदगी धोने में लगी होगी तभी तो समय ही नहीं मिल रहा की टी वी डिबेट वग़ैरा शाया करे.
आपका अपना
गद्दार, घुसपैठिया, देश द्रोही
जुबेर अहमद खान
पत्रकार