आधी
अधूरी मानसिकता वाले हाफ प्याली चाय संघी हर उस काम को करने में आधे है जिसको के पूरी
क्षमता से करना चाहिए. इन लोगो की मानस्किता
ही पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाई है इसलिए ये लोग हाफ माइंड है या क्रेक. विवाह का नाम आते ही इनको बुखार आने लगता है लेकिन
पराई नारी इनको बोहोत ही पसंद है. और जो विवाह
करते है वो पत्नी की इच्छा को अधूरी छोड़ के भाग जाते है.
संघ
का एक पसंदीदा गाना आज कल खूब चर्चा का विषय बना हुआ है, और संघ को इस गाने से खासी
चिढ़ और परेशानी हो रही है. उक्त गाने में संघी
और उसके आका को पूरी तरह से नग्न कर डाला है.
जनाब
मोदी जी ठहरे आखिर संघी और लगे एक मूर्ती के ऊपर कसीदे पड़ने उनको लगा था २०१९ से पहले
पटेल की मूर्ती बनवा के उसको समूचे भारत में लोकप्रियता और यूनिटी की मिसाल पेश करूंगा
और इस मूर्ती की बैसाखी लेकर मोदी जी अपने २०१९ के फिर से प्रधान मंत्री बनने की इच्छा
को दबाये चल दिए गुजरात की ज़मीन पे. लेकिन ये क्या गुजरात अब पहले जैसा कदापि नहीं
लग रहा था और मोदी जी को ज़लील होना पड़ा. फिर
जिस तरह से मीडिया का कवरेज करना था वो भी फ्लॉप शो ही रहा क्योंकि जनता नदारद थी. जिसके ऊपर इस पत्रकार ने टवीट कर के चुटकी ली है. २ टवीट
बीजेपी को किये है और २ प्रधान मंत्री ऑफिस को किये है.
Replying to @BJP4India
बेवकूफों कितनी जनता साथ थी, अकेले मोदी जा के मूर्ती राष्ट्र को समर्पित कर दी. जो कुछ थोड़ी बोहोत बीड थी वो मोदी के सुरक्षा कर्मी और संघी आतंकी ही थे. भक्त भी कम नज़र आये. जिस तरह से प्रायोजित किया था ऐसा प्रतीत हो रहा था समूचा विश्व उमड़ आएगा. उस हिसाब से टोटल फ्लॉब शो रहा.
जहा तक इस पत्रकार की जानकारी है किसानो और जनता ने मोदी तुम्हारा सुवागत नहीं है के बोर्ड लगाए थे.
Replying to @PMOIndia
Mr.
Modi how many people have attended your inaugural function of a statue. Those
who attended were your security people and Sanghi Terrorists to safeguard you
from possible attack.
Replying to @PMOIndia
In a
way you projected the inaugural function it was expected the international
people will attend the event but it is a flop show even local people have not
come in your function. Reports are coming of play card Modi you are not welcome
here by the people.
आखिर
कार मोदी जी ने पटेल की मूर्ति राष्ट्र को नहीं अपितु लंगूर पत्रकारों और संघी जनता
को ही समर्पित करनी पड़ी. और जिस मूर्ति का नाम स्टेचू ऑफ़ यूनिटी रखा गया था उसमे ना
तो हिन्दू शामिल था और न मुस्लिम ना सिख शामिल था और ना ईसाई. फिर अगर मोदी जी भारत की यूनिटी की बात कर रहे है
तो इस यूनिटी में कश्मीर कहा आया जो हिस्सा चीन ने दबा के रखा है वो किधर आया.