Saturday, 1 September 2018

मोब लीचिंग पे योगी सरकार सख्त; दिखावा या हकीकत।

सुप्रीम कोर्ट के मोब लीचिंग पे राज्य तथा केंद्र सरकार को सख्ती से निपटने के दिशा निर्देश  के बाद योगी सरकार ने मॉब लिंचिंग रोकने को लेकर एक फ्रेमवर्क जारी किया है। गृह विभाग के एक टॉप अफसर ने बताया, 'हमने यह पॉलिसी बनाने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का ध्यान रखा है।

गाइडलाइन्स के तहत प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के एसपी/एसएसपी से ऐसे लोगों की एक लिस्ट तैयार करने को कहा है जो संभावित तौर पर नफरत भरे भाषण दे सकते हैं या ऐसी फेक न्यूज़ फैला सकते हैं जिससे समाज में नफरत फैले। सभी जिलों से ऐसी जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक नोडल अफसर तैनात किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल में मॉब लिंचिंग की करीब १६८ वारदातें सामने आई थीं।

गाइडलाइन्स के मुताबिक, ऐसे अफसरों पर भी कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने अपने स्तर से ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास नहीं किया या घटना के बाद सख्त कदम नहीं उठाए। इसके अलावा सरकार मॉब लिंचिंग के शिकार व्यक्ति के परिवार की पूरी मदद करेगी और उन्हें जॉब या मुआवजा भी दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन से ऐसे गांवों की पहचान करने को कहा है जहां पिछले पांच सालों में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हिंसा) की वारदातें सामने आई हैं। साथ ही ऐसे लोग जो सोशल मीडिया पर घृणा फैलाते हैं उनके खिलाफ आईपीसी की धारा १५३  ए (दो समुदायों के बीच नफरत फैलाना) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हलाते हाजरा पे पत्रकार जुबेर की नुक्ताये नज़र

योगी प्रशासन का सराहनिया कदम लेकिन ये लोग जो घ्रणा फ़ेलाते है वो कोई ओर नही बल्कि हिन्दू समाज से ओर बीजपी के राजनेता, मंत्री संत्री, विधायक ही हैक्योंके मॉब लिचिंग सिर्फ मुस्लिम यूवाओं की हो रही है. उत्तर प्रदेश मे ईदुल अज़हा के दिन से लेकर रोज़ के बाद तक मॉब लिचिंग हूई जिसमे एक १४  साल का मासूम ज़ुबेर ओर दूबाई  से अपने परिवार के साथ ईद मानाने आये  २२ साला शाहरुख भी शामिल हैआपने ही तो ईद से पेहले जानवारो की कूर्बानी पे फरमान  जारी किया था. उस फरमान पे आपके मंत्रिमंडल के एक ज़मीर फरोश मंत्री मीडिया के सामने बजाये गलती की सूधार करने के आपके फरमान का बचाव कर रहे थे और मुस्लिम समाज के खिलाफ इश्तेआल अंगेज़ीअब जिस देश ओर प्रदेश के मंत्रिमंडल मे एसे पाखंडी लोग बेठे होंगे तो वो मोब लीचिंग का भी बचाव करेंगे और लीचिंग के पीछे की वजह क्या है उसको तलाशने की कोशिश करेंगेअगर आप सही में उच्चतम न्यायलय के निर्देशों का पालन कर के मोब लीचिंग बंद करने के इच्छुक है तो सबसे पहले अपने मंत्री मंडल से पाखंडी और ज़हरीली मानसिकता वाले मंत्री, विधायकों की छुट्टी कीजियेकियोंके मोब तभी आक्रोशित होती है जब उनके पीछे किसी बड़े बिग बूम का हाथ होता हैरही बात घृणा फैलाने वालों की पहचान करना उस गांव पे नज़र रखना, व्हाट्स एप की निगरानी रखना ये सभी बातें उच्चतम न्यायलय को गुमराह करने वाली है के हम निगरानी रखे हुए है.

ईदुल अज़हा के बाद मोब लीचिंग के कुल ७ केसेस सामने आये. एक हरयाणा में ताहिर नामक २२ साल के युवक का ईद के रोज़ मोब लीचिंग, ४ उत्तर प्रदेश से जिनमे २ का ज़िक्र ऊपर किया जा चूका है. १ बिहार के पटना से जहाँ पे ५० साल के एक मुस्लिम युवक अबू साद की मोब लीचिंग की गई और एक तमिल नाडु से जहाँ एक मौलाना की मोब लीचिंग की गई. 

कोई भी गांव या साधारण मनुष्य ज़हरीला नहीं बन जाता जब तक उसके ज़ेहन में कोई कद्दावर नेता ज़हर की खेती के बीज नहीं डालताअगर आपको मोब लीचिंग पे अंकुश लगाना है तो सबसे पहले उस ज़हरीली मानस्किता को ख़त्म करना होगा जो बीजेपी के नेताओ के जुबां से अलफ़ाज़ के रूप में निकलती है जिसको समाज और जनता पूरा करना अपना धर्म समझ लेती है और फिर होती है मुस्लिम युवाओ की मोब लीचिंग.       

फिर भी जिस अंदाज़ में योगी प्रशासन मोब लीचिंग के मुजरिमो और लीचिंग के खिलाफ लचर रवैया रखने वाले सफ़ेद पॉश सरकारी अफसरों पे सख्त दिख रहा है और लीचिंग से पीड़ित परिवार वालों को जिस तरह से मदद की बात कही गई है उससे परिवार वालों में उम्मीद की किरण जाग उठी है के अब उनको प्रशासन की तरफ से इन्साफ मिलेगा और जो हादसा हमारे साथ हो गया उसके ऊपर सरकारी नौकरी के रूप में मुआवज़ा. लेकिन देखने वाली बात फिर वही है कही ये सभी वादे सिर्फ उत्तर प्रदेश में चुनाव और २०१९ को देख के तो नहीं किये जा रहे है.  वजह चाहे कुछ भी हो, आते समय में मोब लीचिंग पे राजनीति गरमाने के आसार अभी से दिख रहे है.    

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...