Sunday, 1 April 2018

फिर शुरू हुआ मौत का तांडव


मौत और प्राकर्तिक आपदा या दुर्घटना से कोई भी शख्स बच नहीं सकता. इस्लाम मज़हब और कुरान का खुला कौल है अगर तुमने एक बेगुनाह का क़त्ल किया मतलब समूची इंसानियत का क़त्ल किया.  ऐसी एक नहीं हज़ारो बल्कि अब तो लाखो मिसाल मजूद है के बेगुनाहो का खून जाया नहीं जाता.  अभी हाल ही में रामनवमी के रोज़ जो पाखंडी रामभक्तो ने वेस्ट बंगाल और बिहार में दंगा फसाद किया और बेगुनाहो का क़त्ल किया उसका बदल अब उपरवाले की ज़िम्मेदारी थी.

अभी परसो ही आंध्र प्रदेश में एक मंदिर में पूजा के समय भगदड़ में कुछ ६ लोगो के मारे जाने की खबर पूरी तरह से धूमिल भी नहीं हुई थी के इंदौर में एक हादसे में कुछ १० लोगो के मारे जाने की खबर से केंद्रीय प्रशासन सकते में है और ज़रूर अब वो अपने पालतू आतंकवादीओ के ऊपर नकेल कसने के बारे में सोच रहा होगा.

मिली जानकारी के अनुसार इंदौर के सरवटे बस स्टैंड इलाके में स्थित चार मंजिला एक होटल शनिवार रात को अचानक भरभराकर ढह गया. इस हादसे में दो महिलाओं समेत कम से कम १० लोगों की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए. मृतकों में होटल के मैनेजर हरीश भी शामिल हैं. वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है. घायलों का इलाज चल रहा है. इस हादसे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है. राहत एवं बचाव कार्य तेजी से जारी है.   हादसे में जान गंवाने वालों में होटल मैनेजर हरीश पुत्र गणेश सोनी के अलावा ६० वर्षीय सत्यनारायण पुत्र रमेश, ३५ वर्षीय राजू पुत्र रतन लाल के रूप में हुई है. इसके अलावा मृतकों में चार अज्ञात पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं. इसके अलावा घायलों में ३० वर्षीय धर्मेंद्र पुत्र देवराम, ४२ वर्षीय महेश पुत्र राम लाल शामिल हैं, जिसमें महेश की हालत नाजुक बताई जा रही है.

इस पत्रकार का तो ठाम यकीन है और वो मोदी प्रशासन तथा हिन्दू आतंकिओ के हर बार चूनौती देता रहा है जब जब तुम बेगुनाह मुसलमानो को मारोगे तुम अपनों को कंधो पे ले जावोगे. जब से ये पत्रकार लेखन के छेत्र में आया है उसने कई चीज़े जो अभी तक भगवा आतंकिओ से बेखबर थी उसको उनके धयान में लाया है.

बाबरी मस्जिद की शहादत को किल्लारी ने झेला बेगुनाह अफ़ज़ल गुरु की शहादत और बेगुनाह खालिद मुजाहिद की उत्तर प्रदेश जेल में निर्मम हत्या को उत्तराखंड ने झेला. इस मुद्दे पे ये पत्रकार कई लेख लिख चूका है और सिलसिलेवार प्राकर्तिक आपदाओं का विश्लेषण कर चूका है इधर हिन्दू आतंकिओ ने बेगुनाहो का खून किया उधर तुरंत आई प्राकर्तिक आपदा.  


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Again started horror of death
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/04/01/aga

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...