हिन्दू स्टेट का आतंकी सरगना, शैतान, कातिल, बलात्कारी हर जगह ज़लील और खूवार हो रहा है फिर भी उसको सद्बुद्धि नहीं आ रही है. हिन्दू स्टेट के आतंकिओ का पाखंड, झूट, फरेब, डाकाज़नी, नकबज़नी की वजह से वो हर जगह ज़लील और रूसवा हो रहे है. हिन्दू स्टेट के आतंकिओ ने हेरा फेरी, प्रजातंत्र की हत्या, ई.वि.ऍम. में घपला, ज़ात पात की राजनीति कर के भारत के एक बड़े हिस्से को जीत तो लिया लेकिन जनता का दिल जीतने में नाकाम रहे. और ये आतंकिओ के लिए सबसे बड़ी हार है. यहाँ तक के जिन मुद्दों पे आतंकवादी कानून बनाना चाहते है भले ही वो मुद्दे जनता के हक़ को दिखा रहे होंगे लेकिन उसके समर्थन के लिए भी भाड़े के टट्टू और ज़र खरीद गुलामो को पैसा या कोई पोस्ट का लालच दे कर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन करवाया जाता है और आतंकिओ के मास्टर माइंड और उसकी पार्टी के समर्थन में नारे लगवाए जाते है. लेकिन जिस तरह विज्ञापन की हुई वस्तु हमेशा कम दर्जे वाली होती है उसी तरह आतंकिओ और उसके मास्टर माइंड का झूट, फरेब, पाखंड दोवारा किया हुआ काम हर जगह उसको ज़लील करता है. इस पत्रकार ने आतंकी सरगना की कार्य प्रणाली पे १७ जून २०१७ को Modi fail ho gaya शीर्षक के साथ एक लेख लिखा है
नोट बंदी, जी.अस.टी. के बाद हाल ही में "मुस्लिम महिला आतंकवाद और शरीयत का सफाया एक्ट" में आतंकवादीओ की ज़बरदस्त किरकिरी हुई है. क्योके उस बिल के पीछे भी मंशा मुस्लिम महिलाओ को इन्साफ दिलवाना नहीं था बल्कि आतंकवादीओ की मंशा राजनैतिक लाभ लेने की थी.
और हिन्दू स्टेट के आतंकवादीओ, उसके सरगना
का पाखंड यहाँ पर भी खुल के सामने आ गया और उसको ज़लील और रूसवा होना पड़ा. अगर उसको मुस्लिम महिलाओ की चिंता होती और वो किसी भी राजनैतिक फायदे के बगैर मुस्लिम महिलाओ के सरक्षण का बिल लाना चाहता था तो ट्रिपल तलाक़ पे ही क्यों काहे को जो मुस्लिम महिलाये गौ आतंकिओ, हिन्दू आतंकिओ के हमलो में बेवा हो गई ऐसी तमाम महिलाओ के लिए बिल नहीं लाता. फिर जिन मुस्लिम बच्चीओ और महिलाओ पे हिन्दू आतंकवादीओ ने रेप और गेंग रेप किया और उनको प्रताड़ित किया ये कह के हम तुम्हारे ऊपर रेप कर रहे है क्योके तुम मुस्लिम हो और गाय का मॉस खाते हो ऐसी महिलाओ के फेवर में बिल काहे को पास नहीं करता. क्योके वो जानता है अगर ट्रिपल तलाक़ पे लिए बिल पेश किया तो हिन्दू स्टेट की जनता का वोट मिलेगा और आतंकवादी हमलो
के खिलाफ बिल बिल पास किया तो जूता मिलेगा.
हरयाणा की जनता का सिस्टम और सरकार के खिलाफ आक्रोश
इसी कड़ी में खूखार आतंकी संघटन बीजेपी ने एक २७ साल पुराना भोंडा, भद्दा राग अपाला और कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस के ऊपर मुस्लिम तुष्टिगुण का इलज़ाम लगा दिया. सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने खूखार आतंकी बीजेपी के मुस्लिम तुष्टीकरण की नीतियों के कारण सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में आरोपियों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दंगों में हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिमों की गिरफ्तारी हुई है। राज्य के गृहमंत्री आर रामलिंगा रेड्डी ने कहा, 'जब बात सांप्रदायिक हिंसा की आती है तो हम कोई भेदभाव नहीं करते हैं और ना ही किसी को सपॉर्ट करते हैं। 3 साल में दंगों में कुल 1254 लोगों को अरेस्ट किया गया। 2013 से 2017 के बीच हुए दंगों में कुल 670 मुस्लिमों की गिरफ्तारी हुई, जबकि हिंदुओं की संख्या 578 है। वहीं 6 ईसाईयों की भी गिरफ्तारी हुई। इन मुद्दों पे आतंकी सरगना को ज़लालत का सामना करना पड़ा है
इसी कड़ी में खूखार आतंकी संघटन बीजेपी ने एक २७ साल पुराना भोंडा, भद्दा राग अपाला और कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस के ऊपर मुस्लिम तुष्टिगुण का इलज़ाम लगा दिया. सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने खूखार आतंकी बीजेपी के मुस्लिम तुष्टीकरण की नीतियों के कारण सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में आरोपियों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दंगों में हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिमों की गिरफ्तारी हुई है। राज्य के गृहमंत्री आर रामलिंगा रेड्डी ने कहा, 'जब बात सांप्रदायिक हिंसा की आती है तो हम कोई भेदभाव नहीं करते हैं और ना ही किसी को सपॉर्ट करते हैं। 3 साल में दंगों में कुल 1254 लोगों को अरेस्ट किया गया। 2013 से 2017 के बीच हुए दंगों में कुल 670 मुस्लिमों की गिरफ्तारी हुई, जबकि हिंदुओं की संख्या 578 है। वहीं 6 ईसाईयों की भी गिरफ्तारी हुई। इन मुद्दों पे आतंकी सरगना को ज़लालत का सामना करना पड़ा है
सरकार का सेना प्रेम एक ढकोसला
ई.वि.ऍम. घपला: ई.वि.ऍम.
की घपले बाज़ी को इस पत्रकार ने अपने लेख ३१ जुलाई २०१७ को लिखे एक लेख Beware
with back stabbers ज़ाहिर किया है इस लेख में लेखक ने २०१३ से ई.वि.ऍम. घोटाले के ऊपर संशय वियक्त किया है. अब २०१७ में जा के बीजेपी ई.वि.ऍम. घोटाले पे बे नकाब और रूसवा हो गई.
राष्ट्र प्रेम: हिन्दू स्टेट के आतंकी ठोंग, ढकोसला
और राष्ट्र प्रेम का दिखावा करते है जबकि ये आतंकी खुद भारत को तबाह करने में कभी भी
पीछे नहीं रहते. धूर्व सक्सेना समेत जो १५ आतंकी पकडे गए थे भारत की सेना की ख़ुफ़िया
जानकारी पडोसी को मोहिय्या करने में वो सब या तो संघ, बजरंगदल, वहपी के आतंकी थे और
खूखार आतंकी संघटन बीजेपी के समर्थक. फिर ये आतंकी अपना पाखंड और झूट छुपाने के लिए
बे मतलब के स्लोगन "भारत........ " या
"गंदे होजा नरम" को मुद्दा
बना के जनता का ध्यान केंद्रित.करते है और अपने आपको राष्ट्रवादी दिखाने की कोशिश करते
है और जिसने ऐसे साप्रदायक, ज़हरीले, आतंकवादी समर्थित स्लोगन नहीं पड़े वो गद्दार. जबकि
एक स्लोगन के पड़ने से कोई राष्ट्रवादी नहीं हो जाता या न पड़ने से कोई गद्दार. उसका
आचरण देश हित के लिए होना चाहिए. आज जो आतंकवादी इन जैसे स्लोगन को राष्ट्रहित का पैमाना
बताते है इनमे से ८०% को वन्दे नामक गाना पूरा नहीं आता होगा. या इतना भी नहीं पता
होगा की जन गण मन ये गाना किस कवी ने लिखा है.
दिल्ली चुनाव: दिल्ली चुनाव में हिन्दू स्टेट का आतंकी सरगना और उसका खूखार संघटन हर तरफ से हार का सामना कर रहे थे. ये पत्रकार खुल के अरविंद केजरीवाल को समर्थन कर रहा था. और खूखार आतंकी संघटन के हर सवाल का का माकूल जवाब दे रहा था. शाज़िया इल्मी से ले कर किरण बेदी तक हर अस्त्र को ध्वस्त कर दिया गया था और नतीजा ये हुआ के खूखार आतंकी को बेदी, इल्मी ने ३ तलाक दे कर सदन में ३ के आकड़े पर महदूत कर दिया.
रईस बनाम काबिल: इंदौर का अंडरवर्ल्ड माफिया डॉन कैलाश और बॉलीवुड में हिन्दू आतंकी ने मुहिम चलाई थी रईस के खिलाफ काबिल को प्रोमोट करने की. क्योके राईस मुस्लिम और पाक स्टारर फिल्म थी. लेकिन ये पत्रकार रईस को प्रोमोट कर रहा था. और अब स्थिति सभी के सामने है.
बीजेपी का आतंकी और १५ अन्य विघटनकारी गतिविधिओ में लिप्त
दिल्ली चुनाव: दिल्ली चुनाव में हिन्दू स्टेट का आतंकी सरगना और उसका खूखार संघटन हर तरफ से हार का सामना कर रहे थे. ये पत्रकार खुल के अरविंद केजरीवाल को समर्थन कर रहा था. और खूखार आतंकी संघटन के हर सवाल का का माकूल जवाब दे रहा था. शाज़िया इल्मी से ले कर किरण बेदी तक हर अस्त्र को ध्वस्त कर दिया गया था और नतीजा ये हुआ के खूखार आतंकी को बेदी, इल्मी ने ३ तलाक दे कर सदन में ३ के आकड़े पर महदूत कर दिया.
रईस बनाम काबिल: इंदौर का अंडरवर्ल्ड माफिया डॉन कैलाश और बॉलीवुड में हिन्दू आतंकी ने मुहिम चलाई थी रईस के खिलाफ काबिल को प्रोमोट करने की. क्योके राईस मुस्लिम और पाक स्टारर फिल्म थी. लेकिन ये पत्रकार रईस को प्रोमोट कर रहा था. और अब स्थिति सभी के सामने है.
हाफिज भाई, अज़हर मसूद, ज़ाकिर नाइक: हिन्दू स्टेट
का आतंकी बोहोत उछल कूद कर के भी हाफिज साहब, अज़हर मसूद और ज़ाकिर नाइक का बाल भी बांका
नहीं कर सका. उसने एड़ी चौटी का ज़ोर लगा लिया के किसी तरह वो इन तीनो जाबाज़ मुस्लिम
स्कॉलर्स तक पहुंच जाए लेकिन हर बार इसको ज़िल्लत और रूसवाई का सामना करना पड़ा. ये पत्रकार
इन तीनो के साथ शाना-बा शाना खड़ा था और सपोर्ट कर रहा था.
ज़ाकिर नाइक इस्लामिक उपदेशक
लव जिहाद: लव जिहाद के मुद्दे पे भी हिन्दू स्टेट के आतंकिओ का पाखंड बे नाकाब हो चूका है और समूचे हिन्दू स्टेट की जनता और भारत की जनता को पता चल गया है के लव जिहाद असल में हिन्दू आतंकिओ का पाखंड था मुस्लिम समाज को बदनाम करने और हिन्दू लड़कीओ का मुस्लिम लड़को से बढ़ते हुए प्यार और इस्लाम के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को रोकने का एक घिनोना हथकंडा. इस विषय पे इस पत्रकार ने २५ अगस्त २०१४ को अपने लेख Hindu Media biased Media. और ३१ अगस्त २०१४ को लिखे लेख Hindu Love Jihad. ७ अक्टूबर २०१७ को अपने लेख Love
Buds may meet soon. १३ अक्टूबर २०१७ को अपने लेख Love
Jihad conspiracy of Hindu Terrorists. लव जिहाद के पाखंड और उसके पीछे की हकीकत की पोल खोल के रख दी है. इस गोरख धंदे में हिन्दू स्टेट के लंगूर पत्रकार भी शामिल है जिसका ज़िक्र लेखक ने अपने २५ अगस्त २०१४ के ऊपर लिखे लेख में किया है.
मुस्लिम बन के मुस्लिम बच्चीओ के जिस्म का व्यापार करना क्या ये धरम युद्ध का हिस्सा है
गौ हत्या बंदी: इस विषय पे भी हिन्दू स्टेट के आतंकी का शैतानी चेहरा और उसका पाखंड जग ज़ाहिर हो गया. लेखन इस विषय पे बोहोत से पब्लिक डिबेट और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात कह चूका है के गौ हत्या धार्मिक आस्था का प्रश्न न होते हुए राजनितिक प्रश्न ज़्यादा है. इस विषय पे लेखक ने १ नवंबर २०१६ को अपने एक लेख Double standard of Hindus with their mother. और ७ अप्रैल २०१७ के अपने लेख Hypocrisy of Indian Terrorists. सम्पूर्ण विषय पे रौशनी डाली है के गौ हत्या बंदी सही में हिन्दू स्टेट के आतंकी का एक पाखंड है और कुछ नहीं. जब लेखक की ये बात आम हो गई के गौ हत्या धार्मिक आस्था का विषय न होते हुए एक राजनैतिक षड्यंत्र का हिस्सा है तो वाराणसी दौरे पे मोदी के सवाल का लेखक ने अपने २३ सितम्बर २०१७ को अपने लेख पशु वोट देने नहीं जाते फिर भी हम कर रहे हैं उनकी स... के जरिये जवाब दिया. फिर अगर गाय धार्मिक आस्था का सवाल है तो गौ मॉस का निर्यात २०१४ के बाद १००% कैसे ज़्यादा हो गया और ब्राज़ील को कैसे पीछे छोड़ के हिन्दू स्टेट पहले नंबर पे पहुंच गया.
जब लेखक सच्चाई बयान करता है और हिन्दू स्टेट के आतंकिओ को कटघरे में खड़ा करता है तो उसको पाकिस्तानी कह के सम्भोदित किया जाता है. अभी दो दिन पहले पाकिस्तान में दो हिन्दू करोबारिओ का क़त्ल हो गया हलाके ये धार्मिक हमला न होते हुए लूट पात का मामला था उसके ऊपर लेखक के किया हुए वक्तव.
"पाकिस्तान सरकार अपल्पसख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करे ख़ास कर के वहां रह रहे हिन्दू समाज की. ये बात अलग है की हिन्दू स्टेट में मुसलमानो को हर दुसरे रोज़ हिन्दू आतंकी या हिन्दू स्टेट की जनता बेरहमी से क़त्ल कर रही है. लेकिन पाकिस्तान अगर हिन्दू स्टेट के रास्ते पे चलने लगा तो पाक में और नापाक हिन्दू स्टेट में क्या फर्क रह जाएगा. तभी तो हम हिन्दू स्टेट में रह कर भी "पाक सर ज़मी का तराना सुनते है", "पाकिस्तान पाइंदाबाद, शाद बाद" ये स्लोगन सुनते है किसी और से नहीं बल्कि खुद हिन्दू समाज से क्योके पाक में हिन्दू सुरक्षित है. ये बात भी बतलाने वाली है के पाक में कभी तो सालो बरसो में किसी एक आधा हिन्दू की हत्या होती है और हिन्दू स्टेट में तो हर रोज़ एक दो एक दो मुस्लिम नौजवानो को कभी गाला काट के कभी पीट पीट के कभी प्रताड़ित कर के मार दिया जाता है. लेकिन जो हिन्दू स्टेट के आतंकी या जनता करती है वो सब पाक में नहीं होना चाहिए. तभी ये पत्रकार फख्र से कह सकेगा "पाकिस्तान ज़िंदाबाद" "हिन्दू स्टेट और हिन्दू आतंकवाद मुर्दाबाद"”
तो ये बात खुली किताब की तरह है के हिन्दू आतंकिओ की मुस्लिम
समाज या मुस्लिम महिलाओ की चिंता नहीं है बल्कि वो पाखंड, झूट, फरेब के ज़रिये सत्ता
को हथियाना चाहते है. अगर हिन्दू स्टेट के आतंकी सरगना को मुस्लिम समाज की चिंता है
और वो किसी भी राजनैतिक फायदे के बगैर मुस्लिम महिलाओ के सरक्षण का बिल लाना चाहती
है तो सिर्फ ट्रिपल तलाक़ पे क्यों ५% मुस्लिम
महिलाओ को एजुकेशन और संसद में भागीदारी का बिल बनाये. आतंकवादी ट्रिपल तलाक़ पे सख्त
काहे को दिख रहा था और राज सभा में काहे को बिल बगैर किसी वोटिंग या डेबिट के पास करवाना
चाहता था. ज़ोर ज़बरदस्ती सदन में हिटलरशाही
का मुज़ाहेरा कर के ज़ब्र कर के सदन की गरिमा को ताख में रख के बिल पास करवाना चाहता
है तो उससे उसकी मंशा पे भी सवाल उठना लाज़मी है के इतनी जल्दबादी और प्रजातंत्र की
हत्या कर के बिल पास करवाने के पीछे की मंशा मुस्लिम महिलाओ की को सुरक्षा प्रदान करना
नहीं हो सकता हां कर्णाटक, मध्यप्रदेश और २०१९ के इलेक्शन में राजनैतिक लाभ लेने का
हो सकता है. तो जब जब झूट, फरेब, पाखंड के
ज़रिये हिन्दू स्टेट के आतंकी और उसका सरगना राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश करेगा ज़लील,
बेइज़्ज़त और रूसवा होगा.
नवंबर २०१६ गोरखपुर में युवा वाहिनी के आतंकी मुस्लिम
बच्ची की मजमूई अस्मतदरी करते हुए
तिलिंगना संघ का आतंकी कथित मुस्लिम बच्ची की आबरू उतारते
हुए
जुबेर
एहमद खान
पत्रकार