Thursday, 5 October 2017

सच्चे भक्त बनो अंध भक्त नहीं......

दिल्ली के थाने में अफसर की कुर्सी पर बैठ गई राधे मां, हाथ जोड़े खड़े रहे SHO

भारत एक ऐसा अकेला देश हे जहा पाखंडी बाबाओ का बोल बाला रहता हे और भक्त उनके सामने हाथ जोड़ के मूक दर्शक बने खड़े रहते हे.  इसी कड़ी में रामपाल, आसाराम और राम रहीम की गिरफ्तारी के बाद अगली क़िस्त विवादित दस्यु सुंदरी राधे माँ के ऊपर फोकस हे.  ये राधे माँ अपने भक्तो के साथ अश्लील हरकते करते हुए पकड़ी गई हे और इनके ऊपर कई मुक़दमे भी जारी है.  राधे माँ को कोई भक्त गोद में उठाय या चुम्मा करे तो इनको इसका आनंद आता हे. फिर राधे माँ के साथ हर कार्य के अलग अलग रेट लिस्ट है. गोद में उठाने की अलग रेट, साथ में गाना गाने की अलग रेट, चुम्मा करने की अलग रेट.  एक भक्त को राधे माँ उसका मू पकड़ के अपने घागरे के अंदर डालती है और फिर जब भक्त घागरे से अपना मू निकालता हे तो बेहद ही उत्तेजित और ख़ुशी की मुद्रा में दिखाई देता है जैसे की उसने कोई जंग जीत ली हो. फिर राधे माँ पूछती है केसा लगा किया देखा तो भक्त बदहवास सा दिखाई पड़ता हे फिर उसको पुछा जाता हे और देखेगा भक्त कहता है हां फिर उसका मू राधे माँ अपने घागरे में गुसा देती है फिर वीडियो कट हो जाता हे.

दिल्ली के विवेक विहार थाने से ऐसी ही हैरान कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है. यहां विवादित दस्यु सुंदरी और धर्मगुरु राधे माँ  थाने के अंदर पहुँच के एसएचओ संजय शर्मा की कुर्सी पर विराजमान हो गई.  कमरे में कुछ पुलिस वाले भी भक्त की मुद्रा में नजर रहे हैं.  इतना ही नहीं थाने के अंदर जुटी भक्तों की भीड़ राधे मां की जय-जयकार कर रही थी.  एसएचओ संजय शर्मा भक्त की मुद्रा में हाथ जोड़े राधे मां के सामने अभिभूत से खड़े दिखाई दे रहे है.  वर्दी के ऊपर मातारानी की चुनरी डाल रखी थी.  फोटो से ऐसा प्रतीत होता हे मानो ये एसएचओ महोदय भारत के सविधान की रक्षा के लिए नहीं बल्कि पाखंडी राधे माँ जैसे साधू संतो के लिए काम करते होंगे.
  
ये तो हुई विवादित धर्मगुरुओं की बात लेकिन और चौकाने वाली बात ये है के राष्ट्रपति जो के एक सवेधानिक, न्यायिक पोस्ट है और भारत का गौरव वो अगर एक साधू के सामने सर को झुकता है और हाथ जोड़ के साधू का नमन करता है तो इससे ज़्यादा शर्म की कोई बात हो ही नहीं सकती.  एक तस्वीर और सामने आई है जिसमे भारत के राष्ट्रपति श्रीमान, महान रामनाथ कोविंद एक साधू भगवाधारी प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी के सामने हाथ जोड़े शीश झुकाये किसी मुजरिम की मुद्रा में नज़र आ रहे हे.  अब इन राष्ट्रपति महोदय को कोई बाताय की मुख्य मंत्री की ओकात आपके सामने ज़ीरो है. ख़ास कर के अगर मुख्य मंत्री एक गधा, अनपढ़, जाहिल, मुजरिम, आतंकवाद का हामी इंसान हो तो आपको शीश झुकाने की कताई ज़रुरत नहीं.  आप अपनी गरिमा समझे आप उच्चतम न्यायलय के मौत के आदेश को रद्द कर सकते है और आप एक मुजरिम जिसके ऊपर तजिराते हिन्द में मुख्तलिफ धाराओं में केस दर्ज हे अदना से योगी के सामने सर को झुका रहे है. 
  

मेने मेरे ३१ अगस्त २०१७ के लेख सामाजिक बहिष्कार पे हो फ़तवा में न्याय पालिका और सर्वोच्च न्यायलय का एक दम सटीक और सही आकलन किया हे के सर्वोच्च न्यायलय को अब मेरिज ब्यूरो खोल लेना चाहिए.  जहा पे सर्वोच्च न्यायलय का कार्य छेत्र नहीं वहां पे भी सर्वोच्च न्यायल सिर्फ आतंकवादीओ और सरकार के दबाव में दखल अंदाज़ी कर रहा है. जिसकी वजह से उच्चतम न्यायल की गरिमा को ठेस पहुंच रही है.  और इस तरह की ठेस और बेइज़्ज़ती २०१४ के बाद से बोहोत बढ़ गई है. जब से आतंकवादीओ का कब्ज़ा दिल्ली की सल्तनत पे हुआ हे.  फिर सभी सरकारी अफसर और न्यायिक संस्थाए एक भक्त के जैसे बर्ताव कर रही है और आतंकवादीओ के रौब में फैसले सुना रही है.
 
जब एक चाय वाला देश का प्रधान मंत्री होगा और एक साधू प्रदेश का मुख्य मंत्री तो इन दोनों को प्रोटोकॉल की क्या एहमियत होती हे कैसे समझ में आएगा.  फिर एक उच्चतम न्यायलय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले काम करेगा और दूसरा राष्ट्रपति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले काम करेगा. फिर पुलिस अधिकारी की तो ओकात ही क्या है जब सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भक्त मुद्रा में नज़र आते है तो एसएचओ संजय शर्मा की तो बोहोत निचली पोस्ट है. अगर सफाई करना है तो ऊपर से शुरू करना पड़ेगी फिर आखिर में नीचे देखना चाहिए के सफाई हुई के नहीं.

जुबेर अहमद खान
पत्रकार

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...