जिस तरह से
गुजरात को आतंकवाद निगल चूका हे और हर दूसरे रोज़ हत्या लूट और सांप्रदायिक घटनाय बढ़
चुकी है तो अब गुजरात में भी भारतीय फौज की ज़रुरत महसूस होने लगी हे. और गुजरात को भी अब "Disturbed Areas" की श्रेणी में रख कर दिल्ली की सल्तनत पे काबिज़
राजा मोदी को “ऐ.ऑफ.अस.पि.ऐ.”
लगाना होगा. ये वही गुजरात हे जहा पे महात्मा
गाँधी सत्य और अहिंसा के प्रतिक ने जन्म लिया.
और ये वही गुजरात हे जो आज कल आतकवाद, सम्प्रदायवाद, क्रिमिनल, लोगो का अड्डा
बन चूका हे.
खबर गुजरात
के आणंद जिले से आ रही हे जहा रविवार को एक गरबा आयोजन में शामिल होने पर एक उच्च जाती
के समूह ने कथित तौर पर एक नौ उम्र 19 वर्षीय दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी.
पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
मिली जानकारी
के अनुसार इस घटना के संबंध में दायर शिकायत का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया के जयेश सोलंकी, उसका रिश्तेदार प्रकाश
सोलंकी और दो अन्य दलित व्यक्ति भद्रानिया गांव में एक मंदिर के बगल में स्थित घर के
पास बैठे गरबा देख रहे थे. तभी एक आरोपी ने ‘‘उनकी जाति के बारे में अपमानजनक टिप्पणी
की’. और कहा दलितों को गरबा देखने का अधिकार नहीं है. भद्रान पुलिस थाने के एक अधिकारी ने आगे जानकारी
देते हुए बताया कि फिर आरोपी ने और कुछ लोगों को मौके पर आने को कहा.’’ अधिकारी ने
कहा कि अगड़ी जाति के लोगों ने कथित तौर पर दलितों की पिटाई की और जयेश का सिर एक दीवार
पर दे मारा. जिससे उसकी मोकाये वारदात पे ही मृत्यु हो गई.
पहले क्रिस्टी समाज को मारा पीटा गया अहमदाबाद, बड़ोदा, सूरत में बजरंगदल और विहिपि के आतंकिओ ने चर्चेस पे हमले किये और क्रिस्टी समाज को भगाया गया. फिर मुस्लिम समाज के साथ क़त्ले आम जो अभी तक थमा नहीं हे. हाल ही में मार्च २०१७ में १०वी की परीक्षा खत्म होने के बाद एक बुर्का पोश मुस्लिम छात्रा के ऊपर हिन्दू छात्रों की अभद्र टिप्पड़ी के ऊपर पालनपुर में भीषण दंगा हुआ था. फिर वो आग अहमदाबाद तक पहुंची थी जिसमे मुस्लिम समाज के अनगिनत मकान, दूकान और वाहन सुपुर्दे आतिश कर दिए गए थे और कई मुस्लिम लोग मारे गए थे.
फिर ऊना की घटना बोलने जैसी नहीं हे जहा ७ दलित युवको को कार से बाँध के अर्ध नग्न अवस्था में गौ आतंकिओ ने बीच सड़क पे बेरहमी से पीटा था.
मोदी और भाजपा के तमाम गुलाम नेता भारत को एक सहिष्णु देश कहते फिरते हे किसी में भी सत्य को बोलने, सहने और कहने की हिम्मत नहीं है के २०१४ के बाद भारत में असहिष्णुता बेइंतेहा बड़ी हे. अब अगर एक १९ साल के जवान युवक को सिर्फ इसलिए मार दिया जाता हे के वो दलित हे और गरबा देख रहा हे तो ये केसी सहिष्णुता हे भारत की. गरबा एक खेल हे और उसको कोई भी देख सकता हे. उसको देखने के ऊपर प्रतिबंध सिर्फ इसलिए के दलित देख रहा हे कही तक जाइज़ नहीं हे. हां अगर आयोजको ने टिकट की व्यवस्था की होती और ये युवक बगैर टिकिट गरबा देख रहे होते तो भी उनको मौत के घाट उतारने का हक़ किसी को नहीं था. उनको पुलिस के हवाले कर के जो भी कानूनी कार्यवाही होती करना चाहिए थी. लेकिन यहाँ तो फ्री एंटरटेंटमेंट था फिर उनको मारने का कोई ठोस अयोचित समझमे नहीं आता. सिर्फ और सिर्फ नफरत जो क्रिस्टी, मुस्लिम और दलित समाज के खिलाफ ज़हर के जैसे आतंकिओ और बीजेपी के हामी साधू संतो ने हिन्दू समाज में भरी हे.
में केंद्र की सल्तनत पे काबिल राजा मोदी से अनुरोध करूँगा के गुजरात अब एक आतंकी अड्डा बन चूका हे और उसको "Disturbed Areas" की श्रेणी में रख के "ऐ.ऑफ.अस.पि.ऐ." पास करना चाहिए क्योके गुजरात दूसरा कश्मीर और आसाम साबित हो रहा हे.
राजन आपको गुजरात का आतकवाद नहीं दिख रहा हे और आप अपने नेत्र बंध कर के रखे हुए हे क्योके वो आतंकवाद आप ही की पार्टी के लोगो द्वारा प्रायोजित हे लेकिन इससे पहले स्थिति भयावह हो जाए और राजन आपको उसकी तपिश महसूस होने लगे और राजा को अपना सिंघासन डौलता नज़र आने लगे उसकी रोक थाम ज़रूरी हे.
जुबेर अहमद खान
पत्रकार
पत्रकार