मुंबई में तूफानी
बारिश से सामान्य
जन जीवन ठप्प
लोकल, बस और
दुसरे सभी वाहतूक
एक जगह जाम
हो गए और
मुंबई नगरी को
जैसे ब्रेक लग
गया हो. महाराष्ट्र
के मुख्य मंत्री
श्री देवेंद्र फडणवीस
ने खुद स्थिति
का जायज़ा लिया
और सभी सम्बंदित
आला अधिकारिओ को
सख्त निर्देश दिए
के किसी भी
तरह की जन
हानि नहीं होनी
चाहिए. मुख्य मंत्री ने
स्वतः हॉट लाइन
पे बी.ऍम.सी. तथा
आला पुलिस अधिकारिओ
को घायलों को
तुरत वेधकिया उपचार
के निर्देश दिए
और कोई घायल
तो नहीं हे
इस सबंध में
विचार पूस की.
आज शाम असर मगरिब के दरमियान रज़ा एकेडेमी के सरबराह जनाब सईद नूरी अपने मशाएकीन और मुरीदीन के साथ अपने ऑफिस से निकले और मोहम्मद अली रोड पे बारिश में भीगते हुए अज़ान दी. जिससे इस तूफ़ान का असर इंशाल्लाह कल तक कम होगा. क्योकि हर मुसलमान का ये अज़्म हे और पैगम्बर सल्लम की हदीस मुबारक हे के जब तुम अल्लाह का अज़ाब आने का अंदेशा महसूस करो या तूफ़ान की आहट महसूस करो तो अज़ान दिया करो, अज़ान अज़ाब और इंसान के बीच ठाल का काम करती है.
इस तरह के बोहोत से वाक़ेयात मौजूद है तमिलनाडु में सिर्फ अज़ान देने की वजह से भयंकर सूनामी आते आते रुक गया. क्योके मुसलमानो ने अज़ान देना शुरू कर दिया था. २०१४ में इसी तरह से तमिलनाडु के एक तटीय गांव में तूफ़ान की आहट को मुस्लिम समाज ने भाप लिया और अज़ान देना शुरू की और तूफ़ान रुक गया. इस सन्दर्भ में इस पर्त्रकार ने दिनाक २/४/२०१७ को एक लेख भी लिखा हे. And how long you disprove Allaha..
हां ये वही अज़ान हे जिसकी वजह से कुछ लोगो की नींद में खलल पड़ता है. लेकिन ये अज़ान तूफानों का रुख मोड़ देती है और अल्लाह के जलाल को कम करती है. फिर इसी अज़ान से शैतान ४० कोस दूर हो जाता है. बीजेपी के बोहोत से नेता मुस्लिम समाज पे व्यंग करते है के ये लोग १४०० साल पुरानी परम्पराओ को पालते है और मुस्लिम समाज रूडी वादी होता हे. फिर अगर १४०० साल पुरानी रूडी वादी परम्परा आज के २१वी सदी के तूफ़ान का रुख मोड़ सकती है जो साइंस और टेक्नोलॉजी नहीं कर सकती तो १४०० साल वाली रूडी वाड़ी परम्परा काम की है या आज का साइंस और टेक्नोलॉजी.
मुसलमान आज भी अगर सच्चे दिल से अल्लाह की हम्दो सना करे तो उसका दुनयावी ताक़त बाल भी बाक़ा नहीं कर सकती. ये हर सच्चे मुस्लिम का अज़्म हे. ये तो मुस्लिम सामाज थोड़ा सा भटक गया हे नहीं तो दुनिया की कोई भी ताक़त मुसलमानो का बाल भी बांका नहीं कर सकती. सहाबी उमर फ़ारूक़ रज़ि. अल्लाह ने जेरुसलम बगैर खून व् गरत के फतह किया था. सिर्फ इस्लामिक किरदार और टीचिंग की वजह से.
तो इंशाल्लाह कल तक ये तूफ़ान का रुख मोड़ दिया जाएगा.
जुबेर
अहमद खान
पत्रकार